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जम्मू-कश्मीर का गन लाइसेंस घोटाला फिर चर्चा में, 2012-16 में बंटे लाखों परमिट; जानें कैसे चला खेल और अब आगे क्या?

Published: Fri, 02 Oct 2026 06:58 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में 2012-2016 के दौरान 2.74 लाख गन लाइसेंस जारी करने में बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। सीबीआई ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर के गन लाइसेंस केस में फिर बढ़ी हलचल। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर के गन लाइसेंस केस में फिर बढ़ी हलचल। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 2.74 लाख गन लाइसेंस घोटाले की सीबीआई जांच जारी।

  2. राजस्थान एटीएस ने 2017 में अनियमितताओं का पर्दाफाश किया।

  3. जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोगों को जारी हुए लाइसेंस।

जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2012 से 2016 के बीच कथित तौर पर बड़े पैमाने पर गन लाइसेंस जारी करने का मामला देश के सबसे बड़े लाइसेंस घोटालों में गिना जाता है। सीबीआई वर्ष 2019 से इस मामले की जांच कर रही है। जांच का केंद्र यह है कि निर्धारित नियमों की अनदेखी कर करीब 2.74 लाख गन लाइसेंस ऐसे लोगों को जारी किए गए, जिनमें बड़ी संख्या जम्मू-कश्मीर के बाहर रहने वालों की थी।

मामला वर्ष 2017 में राजस्थान पुलिस की जांच के दौरान सामने आया था। राजस्थान एटीएस को हथियारों के लाइसेंस से जुड़ी अनियमितताओं की जांच में जम्मू-कश्मीर से जारी बड़ी संख्या में लाइसेंस मिले।

जांच में सामने आया कि राजस्थान समेत देश के अन्य राज्यों में रहने वाले लोगों के नाम पर जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों से हथियार लाइसेंस जारी किए गए थे।

डोडा-रामबन से कुपवाड़ा-पुलवामा तक लाइसेंस जांच

राजस्थान पुलिस ने इस संबंध में जम्मू-कश्मीर सरकार को कई पत्र भेजे, जिसके बाद मामला और गंभीर होता गया। जांच में डोडा, रामबन, ऊधमपुर, कुपवाड़ा, बारामुला, किश्तवाड़, शोपियां, राजौरी और पुलवामा समेत कई जिलों में जारी लाइसेंस जांच के दायरे में आए।

राजस्थान एटीएस के अनुसार डोडा, रामबन और ऊधमपुर में जारी 1,43,013 लाइसेंसों में से 1,32,321 ऐसे लोगों को जारी किए गए थे, जो जम्मू-कश्मीर से बाहर रहते थे। सीबीआइ ने आरोप लगाया कि तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेटों, डिप्टी कमिश्नरों और लाइसेंसिंग अधिकारियों ने कथित आर्थिक लाभ के बदले लाइसेंस जारी किए।

हथियार लाइसेंस केस में अगला बड़ा कदम क्या?

जांच में हथियार डीलरों और अधिकारियों के बीच वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल हुई। इस मामले में सीबीआई ने आठ आइएएस अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी मांगी है। कुछ मामलों में गृह मंत्रालय ने अतिरिक्त दस्तावेज और मनी ट्रेल से संबंधित स्पष्टीकरण मांगा है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट भी मामले की प्रगति की निगरानी कर रहा है। इस तरह करीब एक दशक पुराना यह मामला अभी भी जांच और अभियोजन मंजूरी के महत्वपूर्ण चरण में है।