विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में बारिश ने बढ़ाई किसानों की टेंशन! धान से लेकर बागों तक मंडरा रहा ये खतरा, पशुपालक भी रहें सावधान

Published: Mon, 14 Sep 2026 02:47 PM (IST)

जम्मू में सितंबर के दूसरे पखवाड़े में मौसम में बदलाव के संकेत मिले हैं, जिसमें 16 सितंबर तक हल्की बारिश ...और पढ़ें

जम्मू में किसानों को फसल पर नजर रखने की सलाह। (फाइल फोटो)

जम्मू में किसानों को फसल पर नजर रखने की सलाह (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 16 सितंबर तक जम्मू में हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना।

  2. धान, मक्का, दलहन-तिलहन फसलों में रोग-कीट निगरानी की सलाह।

  3. पशुधन और बागों की देखभाल हेतु विशेष सावधानियां बरतें किसान।

जागरण संवाददाता, जम्मू। सितंबर का दूसरा पखवाड़ा शुरू होते ही मौसम में हल्के बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञान केंद्र अनुसार, 16 सितंबर तक हल्की बारिश और गरज-चमक के आसार, तापमान 37 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान। आसमान आंशिक से सामान्य रूप से बादलों से घिरा रह सकता है।

इस दौरान 14 से 16 सितंबर के बीच अलग-अलग स्थानों पर हल्की से बहुत हल्की बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना जताई गई है। सोमवार के बाद तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आने की संभावना है और 15-16 सितंबर को अधिकतम तापमान करीब 35.2 डिग्री रहने का अनुमान है। न्यूनतम तापमान 25 से 26 डिग्री के आसपास रह सकता है।

धान और खरीफ फसलों पर नजर जरूरी

कृषि मौसम विशेषज्ञ डा. महेंद्र सिंह ने कहा कि मौसम में संभावित बदलाव के बीच कृषि विशेषज्ञों की सलाह किसानों के लिए इस बात का संकेत है कि फसल प्रबंधन में मौसम की भूमिका को नजरअंदाज न किया जाए। हल्की बारिश भले ही राहत लेकर आए, लेकिन अधिक नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव फसलों में रोग और कीट प्रकोप का कारण भी बन सकता है। ऐसे में नियमित निगरानी और समय पर कृषि सलाह पर अमल करना फसल को सुरक्षित रखने में अहम साबित हो सकता है।

मौसम में नमी और हल्की बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों को धान, मक्का, खरीफ दलहन-तिलहन, सब्जियों और फलों की फसलों में जरूरत के अनुसार सिंचाई करने के लिए कहा गया है। कृषि विशेषज्ञ डा. जय कपूर ने बताया कि धान की फसल में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट, ब्लास्ट, पत्तीफोल्डर, ब्राउन स्पाट और शीथ ब्लाइट जैसे रोगों के लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए।

मक्का उत्पादकों को स्टेम बोरर और फाल आर्मीवार्म की निगरानी करने तथा इनके दिखाई देने पर साफ और सूखे मौसम में अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करे। डा. कपूर ने बताया कि काले चने की फसल में पीली पत्ती वाले पौधों को शुरुआती अवस्था में हटाने और व्हाइट फ्लाई के नियंत्रण के उपाय करने चाहिए।

लम्पी रोग को लेकर पशुपालक रहें सावधान

बदलते मौसम के बीच पशुपालकों के लिए भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। किसानों को पशुओं में लम्पी, गोठदार त्वचा रोग के संभावित प्रकोप को लेकर सतर्क रहने और लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।

डा. ज्योति गुप्ता ने कहा कि गर्मी के प्रभाव को देखते हुए पशुओं को हवादार स्थान पर रखने, पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट उपलब्ध कराने तथा नियमित रूप से डीवॉर्मिंग और टीकाकरण कराना चाहिए। पशुओं की साफ सफाई का खस ध्यान रखें। खासकर उनके बैठने और खाने का स्थान पूरी तरह से साफ और सूखा रखें।

चूजों को सीधे पानी के संपर्क में आने से बचाएं

मत्स्य पालकों को उपयुक्त आकार या पिछले वर्ष के स्टाक के आधार पर आंशिक कटाई करने की सलाह दी गई है। वहीं मुर्गी पालकों को चूजों को न्यूकैसल और गुम्ब्रू बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण कराने तथा मुर्गीघर में साफ बिस्तर सामग्री रखने को कहा गया है। बारिश के दौरान चूजों को सीधे पानी के संपर्क में आने से बचाएं।

आम, नींबू, अंगूर और बेर के बागों की देखभाल पर जोर

सितंबर माह में बागवानों को वर्षाकालीन पौधारोपण का कार्य मध्य सितंबर तक जारी रखने और बागों में पौधों की समुचित देखभाल करने की सलाह दी गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार आम के पौधों के सीधे विकास के लिए खूंटे का सहारा देना चाहिए, जबकि कमजोर व पीले पौधों को नाइट्रोजन की हल्की खुराक देने की आवश्यकता है।

पौधों के तनों को घास-फूस से मुक्त रखने के साथ-साथ मूल तने से निकलने वाले जलीय अंकुरों व आफशूट को तत्काल हटाने की सलाह दी गई है। आम के बागों में शूट बोरर और मैंगो स्केल के नियंत्रण के लिए सूखी शाखाओं को हटाने तथा एथेनोस के नियंत्रण के लिए पौधों पर 15 दिन के अंतराल पर कापर

आक्सीक्लोराइड का छिड़काव करने की सिफारिश की गई है। सिट्रस फलों में तकनीकी उपायों को दोहराने, लीफ माइनर और तितली की रोकथाम के लिए आवश्यक छिड़काव करने की सलाह दी गई है।