जम्मू, जागरण संवाददाता : चल गइया, तेरी ओ, हुर्र-हुर्र-हुर्रे जैसे जोश भरे नारों और भारत माता की जय के जयघोष और डीजे की धुन पर थिरकते हुए युवाओं ने घरों की छतों पर रक्षाबंधन पर खूब पतंगबाजी की। मौसम ने भी साथ दिया। देर शाम तक शहर में पतंगबाजी होती रही।

रविवार तड़के हुई बारिश से मौसम सुहावना हो गया और ठंडी हवाएं रक्षाबंधन पर जम्मू में पतंगबाजी को यादगार बना गई। सुबह मौसम साफ होने के साथ ही शहर में बच्चे और बड़े छतों पर चढ़ गए थे ताकि पतंगबाजी का मजा लिया जा सके। दिन आगे बढ़ने के साथ शहर के अधिकतर इलाकों विशेष पुराने शहर में युवाओं की टोलियां छतों पर पतंगबाजी करने में व्यस्त हो गई थीं। आसमान में घूमती रंग-बिरंगी पतंगें रक्षाबंधन के त्यौहार की खुशियों को चार चांद लगा गईं। कई बहने भी भाइयों की इस खुशी को दोगुना करने के लिए उनके साथ छतों पर खड़ी रहीं। डीजे की धुन पर हल्का-फुल्का डांस भी चलता रहा।

हर गली, बाजार, मोहल्ले से ‘वो कटेया ई आ.. की आवाजें गूंजती रहीं। जिसने पतंग काटी वो मस्ती में झूम कर उत्साहित हुआ तो जिसकी पतंग कटी, वह फिर से दूसरी पतंग को हवा में उड़ा अपनी हार का बदला लेने का प्रयास करता नजर आया। आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से पटा हुआ नजर आया। हालांकि पिछले वर्षों की तरह छतों पर युवाओं की टोलियां कम थीं लेकिन जोश में कोई कमी नहीं दिखी।

जम्मू शहर में रक्षा बंधन पर पतंगबाजी की परंपरा काफी पुरानी है जो जन्माष्टमी तक चलती है। शायद ही किसी घर की छत ऐसी होगी जिस पर लोग पतंगबाजी का मजा लेते न दिखे हों। कोरोना के चलते घरों में रहकर परेशान अभिभावक भी बच्चों के साथ पतंगबाजी में उत्साहित होते दिखे। अलबत्ता वे बच्चों को दूसरों की छतों, घरों से बाहर जाने से रोकते ही रहे। युवाओं ने छतों पर डीजे और म्यूजिक सिस्टम भी लगाए हुए थे। हर पेच के साथ अपनी हार-जीत को नाच गाकर मनाया गया। सबसे ज्यादा पतंगबाजी पुराने जम्मू शहर में दिखी। घरों की छत्तों पर कहीं कोई कन्नी बांधता नजर आया तो कोई चरखी लपेटता। छोटे-छोटे बच्चे भी किसी से पीछे नहीं रहे। अपने स्तर पर उन्होंने भी पतंगबाजी का खूब मजा उठाया।

खूब हुआ गट्टू डोर का इस्तेमाल

जम्मू : गट्टू डाेर पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने में सरकार नाकाम रही। अधिकतर पतंगें गट्टू डोर से उड़ाई जा रही थीं। युवाओं, बच्चों ने विभिन्न दुकानों से गट्टू का खरीदा। चोरी-छिपे ही सही, गट्टू की खूब बिक्री हुई। डोर विक्रेताओं की मानें तो पिछले साल की तुलना में बहुत कम गट्टू बिकी क्योंकि उन्हें माल ही नहीं मिला। बहुत से दुकानदारों ने पुराने सामान को ही बेचा। जो भी हो, युवाओं के हाथों में गट्टू रही और उन्होंने इससे खूब पतंगबाजी की। राम लाल, सुरेंद्र शर्मा, बंटू ने कहा कि गट्टू के बिना पतंगबाजी का मजा नहीं आता। ज्यादा पैसे देकर ही सही, वह गट्टू खरीद लाए। पंजाब से भी गट्टू मंगवाई गई।

Edited By: Vikas Abrol