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जम्मू में स्मार्ट होगी वॉटर सप्लाई! शहर में AI संभालेगा कमान; मोबाइल से ऑन-ऑफ होंगे पंप; 5.83 करोड़ का बजट

Published: Fri, 11 Sep 2026 07:00 AM (IST)

जम्मू में जल शक्ति विभाग ने पानी के पंपों और पंपिंग स्टेशनों की निगरानी के लिए एआई आधारित प्रणाली शुरू ...और पढ़ें

इस परियोजना पर करीब 5.83 करोड़ रुपये खर्च होंगे। (फाइल फोटो)

इस परियोजना पर करीब 5.83 करोड़ रुपये खर्च होंगे। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जल शक्ति विभाग ने जम्मू में एआई आधारित निगरानी प्रणाली शुरू की।

  2. मोबाइल ऐप से पंपों की दूरस्थ निगरानी और नियंत्रण संभव होगा।

  3. प्रणाली खराबी का पता लगाकर विश्वसनीय जल आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।

जागरण संवाददाता, जम्मू। शहर में पानी की सप्लाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जल शक्ति विभाग की ओर से पानी के पंपों और पंपिंग स्टेशनों की निगरानी के लिए एआई आधारित निगरानी एवं स्वचालन प्रणाली शुरू की गई है। इसका उद्घाटन जम्मू नगर निगम के आयुक्त डॉ. देवांश यादव ने किया।

इस परियोजना के तहत जम्मू शहर के विभिन्न ट्यूबवेल और पंपिंग स्टेशनों पर 418 एआई आधारित पैनल लगाए जा रहे हैं। यह काम जम्मू नगर निगम के सिटी ग्रांट के तहत किया जा रहा है। परियोजना पर करीब 5.83 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

इस व्यवस्था की मदद से जल शक्ति विभाग के अधिकारी मोबाइल एप के माध्यम से पंपिंग स्टेशनों की निगरानी कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर पंप को दूर से ही चालू या बंद किया जा सकेगा। पंप की स्थिति, बिजली से जुड़े मानक और किसी तरह की खराबी की जानकारी वास्तविक समय में मिल सकेगी।

AI बताएगा पंप में खराबी का संकेत

प्रणाली में पंप के सूखा चलने, अधिक भार, फेज में असंतुलन, वोल्टेज और आवृत्ति में बदलाव तथा शार्ट सर्किट जैसी समस्याओं के लिए चेतावनी की सुविधा होगी। चोरी, घुसपैठ और उपकरण से छेड़छाड़ होने पर भी सूचना मिलेगी। एआई तकनीक पंप के स्वास्थ्य और उसके संचालन में होने वाली असामान्य स्थिति की शुरुआती पहचान करेगी।

इससे समय रहते मरम्मत संभव होगी और पंप के खराब रहने का समय कम किया जा सकेगा। बिजली की खपत को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

बिजली के आंकड़ों से पता चलेगा पानी का प्रवाह

इसके अलावा बिजली से जुड़े आंकड़ों के आधार पर पानी के प्रवाह का अनुमान लगाया जा सकेगा। इससे पारंपरिक प्रवाह मापने वाले उपकरणों पर निर्भरता कम होगी। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से पानी की सप्लाई अधिक विश्वसनीय होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिल सकेगी।