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क्या आप भी एक ही थैली में डालते हैं गीला-सूखा कचरा? अब नहीं चलेगी मनमानी, जम्मू नगर निगम करेगा कार्रवाई

Published: Mon, 14 Sep 2026 02:13 PM (IST)

जम्मू शहर में ठोस कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जहां आधी से ज़्यादा आबादी अभी भी गीले ...और पढ़ें

जम्मू में 60% घर आज भी नहीं कर रहे गीला और सूखा कचरा अलग। (फाइल फोटो)

जम्मू में 60% घर आज भी नहीं कर रहे गीला और सूखा कचरा अलग (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जम्मू में आधी से ज़्यादा आबादी नहीं कर रही कचरा अलग।

  2. नगर निगम के जागरूकता अभियान भी नहीं ला पाए अपेक्षित बदलाव।

  3. अब नियमों का उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई।

जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू शहर को स्वच्छ, सुंदर और आधुनिक बनाने के दावों के बीच ठोस कचरा प्रबंधन की जमीनी हकीकत आज भी चिंताजनक बनी हुई है। शहर की आधी से ज्यादा आबादी आज भी घरों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करने के बुनियादी नियम का पालन नहीं कर रही है।

जम्मू नगर निगम के कचरा एकत्र करने वाले आटो जब हर सुबह विभिन्न वार्डों की गलियों में पहुंचते हैं, तो अधिकांश घरों से उन्हें दोनों तरह का कचरा एक ही डिब्बे या थैली में मिलाकर सौंपा जा रहा है। लोगों की इस लापरवाही के चलते कचरे के सुरक्षित निपटान और रीसाइक्लिंग की पूरी प्रक्रिया पटरी से उतर रही है।

यदि जम्मू को स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल आना है और शहर को कचरे के ढेरों से बचाना है, तो नियमों का उल्लंघन करने वालों पर चालान और जुर्माना जैसी दंडात्मक कार्रवाई अमल में लानी होगी।

साथ ही, कचरा लेने वाले आटो चालकों को भी मिश्रित कचरा लेने से पूरी तरह मना करने के सख्त निर्देश देने होंगे, तभी शहर की सफाई व्यवस्था में स्थायी सुधार नजर आएगा। जम्मू शहर के सभी 75 वार्डों से प्रतिदिन करीब 400 मीट्रिक टन कचरा निकलता है।

60% घरों से अब भी मिल रहा मिला-जुला कचरा

नगर निगम के ताजा आंकड़ों और जमीनी आकलन के अनुसार, वर्तमान में शहर की केवल 40 प्रतिशत आबादी ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करके सफाई कर्मचारियों को सौंप रही है। बाकी 60 प्रतिशत घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से मिला-जुला कचरा ही एकत्र हो रहा है।

नियमों के मुताबिक, रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे जैसे सब्जियों के छिलके, बचा हुआ खाना आदि को हरे डिब्बे में और प्लास्टिक, कागज, कांच जैसी गैर-जैविक वस्तुओं को नीले डिब्बे में अलग रखना अनिवार्य है।

स्रोत पर यह छंटाई न होने के कारण डंपिंग यार्ड और प्रोसेसिंग प्लांटों पर सफाई कर्मियों का काम कई गुना बढ़ जाता है, जिससे ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली पर भारी दबाव बन रहा है।

जागरूकता अभियानों का सीमित असर

जम्मू नगर निगम की ओर से सालिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों को सख्ती से लागू करने के उद्देश्य से समय-समय पर जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। निगम की टीमें नुक्कड़ नाटकों, प्रचार वाहनों और रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशनों के माध्यम से लोगों को कचरा अलग करने का महत्व समझा रही हैं।

इसके बावजूद नागरिकों के व्यवहार में अपेक्षित बदलाव नहीं दिख रहा है। शहर के कई पाश इलाकों से लेकर घनी बस्तियों तक लोग एक ही डस्टबिन में सारा कचरा भरने के पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं, जिससे निगम की तमाम कोशिशों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है।

गीला-सूखा कचरा अलग न करने वालों पर कार्रवाई

जम्मू नगर निगम ज्वाइंट कमिश्नर (हेल्थ एंड सेनिटेशन) अब्दुल स्तार ने कहा कि सालिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों को सख्ती से लागू करवाने की दिशा में काम शुरू किया गया है।

लोगों को समझाने और अपील की रणनीति पर काम किया जा रहा था। अब सख्ती शुरू करेंगे। करीब 40 प्रतिशत आबादी से गीला-सूख कचरा अलग-अलग करके उठाया जा रहा है। ब्लक में कचरा बनाने वालों को नोटिस दिए जा रहे हैं।