राज्य ब्यूरो, जम्मू : कश्मीर से विस्थापित होकर जम्मू में बसे कई कश्मीरी पंडित मतदाता सूचियों में त्रुटियों के कारण वीरवार को श्रीनगर-बड़गाम संसदीय सीट के मतदान न कर पाए। ऐसे में कुल 4720 मतदाताओं में से 2100 ने ही वोट डाले।

एम फार्म भरने के बाद भी मतदाता सूचियों में नाम न देखकर गुस्साए मतदाताओं ने यहां स्थापित मतदान केंद्रों में प्रदर्शन कर प्रशासन व चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। भड़के मतदाता मांग कर रहे थे कि उनके नाम साजिश के तहत मतदाता सूचियों से काटे गए हैं। ऐसे में चुनाव आयोग इस पूरे मामले की जांच करवाकर दोषियों को सजा दे।

चुनाव आयोग ने दूसरे चरण के मतदान के लिए जम्मू शहर में श्रीनगर-बड़गाम विधानसभा क्षेत्र के माइग्रेंट कश्मीरी पंडित मतदाताओं के लिए 21 मतदान केंद्र बनाए थे। ये केंद्र जगटी, मुट्ठी, उधयवाला व तालाब तिल्लो में बनाए गए थे। सुबह मतदान शुरू होने के साथ ही कुछ मतदाता मतदाता सूचियों में अपना नाम न देखकर भड़क गए। ऐसे में जमकर आरोप लगे। मतदान में हिस्सा लेने के लिए एम फार्म भरना जरूरी था, ऐसे में भी वही कश्मीरी पंडित आए थे जिन्होंने मतदान में हिस्सा लेने की औपचारिकताएं पूरी की थी।

श्रीनगर संसदीय क्षेत्र के चाडूरा के रहने वाले आरके भट्ट व उनके 4 परिवारजनों के नाम मतदाता सूची में न होने के कारण वे वोट नही डाल पाए। उनका कहना था कि यह पंडितों को मतदान से दूर रखने की साजिश का हिस्सा है। अमीरा कदल के मिटू मावा को भी खाली हाथ लौटना पड़ा। मावा का कहना था कि सरवाल के कैंप कमांडेंट को एम फार्म भरकर सौंपा था। अब सूची में नाम नहीं है, चुनाव आयोग इस मामले में जांच करवाए। वहीं सरूप चंद भी अपना व परिवार के पांच सदस्यों के नाम मतदाता सूची में न देखकर निराश हुए। ऐसे ही एक मतदाता राजीव पंडित का कहना था कि चुनाव आयोग को आटोमेटिक तरीके से पंडितो के वोट जम्मू, ऊधमपुर व दिल्ली में स्थापित मतदान केंद्रों में ट्रांसफर करने चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि पंडितों की कश्मीर में सम्मानजनक वापसी होनी चाहिए। वहां पर उनकी सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त हों।

कई लोगों गलत तरीके से भरे थे फॉर्म

वोट न डालने से निराश हुए मतदाता एतराज जताने के लिए सहायक रिटर्निग अधिकारी, माइग्रेंट पंकज आनंद के पास पहुंचे। वही आनंद का कहना था कि कुछ लोगों ने एम फार्म गलत तरीके से भरे हैं। कइयों ने फॉर्म में अपने मतदान केंद्र का नाम ही नहीं लिखा था तो कुछ के नाम मेल नहीं खाते थे। ऐसे हालात में मतदाता सूचियां बनाने में परेशानियों को सामना करना पड़ा था। आनंद ने बताया कि जम्मू के मतदान केंद्रों में कश्मीरी पंडितों के 4720 वोट थे। इनमें से वीरवार को 2100 ने वोट डाले गए। बेहतर भविष्य के लिए युवाओं ने किया मतदान

दूसरी ओर कई युवा मतदाताओं ने बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ वीरवार को जम्मू में वोट डाले। युवा मतदाता वैशाली व नवीन का कहना था कि उनका वोट बेहतर भविष्य के लिए है। न सिर्फ कश्मीरी पंडितों को कश्मीर भेजने की दिशा में सार्थक कार्रवाई होनी चाहिए अपितु उनके लिए रोजगार के बेहतर साधन भी हों।

Posted By: Jagran