श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। कोविड-19 लॉकडाउन के कारण प्रदेश में थमी सार्वजनिक गतिविधियों से बेकरार हुए लोगों को राहत देने के लिए सात जून को 'करार' आ रहा है। प्रदेश के स्थानीय गायकों व संगीतकारों ने वर्चुअल म्यूजिक कंसर्ट के आयोजन का फैसला किया है। सात जून को प्रस्तावित इस संगीत कार्यक्रम को करार नाम दिया गया है।

कश्मीर म्यूजिक क्लब श्रीनगर के चेयरमैन वहीद जिलानी ने कहा कि यह सिर्फ एक संगीत कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। हम इसे पूरी दुनिया में आम जन तक ले जाएंगे। सात जून को यह कार्यक्रम शाम छह बजे से रात नौ बजे तक जारी रहेगा। फेसबुक पर लाइव प्रसारण होगा। देश के प्रतिष्ठित रेडियो जॉकी में शामिल विजदन सलीम ऑनलाइन ही इस कार्यक्रम का संचालन करेंगे। इस कार्यक्रम के लिए जाने माने कलाकारों के साथ नवोदित प्रतिभाएं भी सहयोग कर रही हैं।

प्रतिष्ठित रंगकर्मी और फिल्म अभिनेता एमके रैना ने कहा कि यह कश्मीरियों के लिए गर्व की बात है कि हमारे कलाकारों ने अपने गीत-संगीत और भाषा को करार के जरिए आगे बढ़ाया है। उन्होंने अपने वीडियो संदेश में उन्होंने कहा है कि जम्मू कश्मीर के कलाकारों को उचित अवसर और मंच मिले तो वह दुनिया में छा जाएंगे। अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता मुश्ताक अली खान ने कहा कि संगीत किसी भी बेरंग जिंदगी में रंग भर देता है। मैं इस कंसर्ट के आयोजकों को दिल से मुबारबाद देता देता हूं। मैं खुद भी करार का बेकरारी से इंतजार कर रहा हूं।ये दूर करेंगे बेकरारीवर्चुअल संगीत कार्यक्रम करार में वहीद जिलानी, राशिद जहांगीर, अब्दुल रशीद शाह, इश्फाक कावा, राजा बिलाल, अल्ताफ साहिल, डॉॅ शायस्ता अहमद और रबाब वादक नजीर गनई अपनी स्वर लहरियों और धुनों से लोगों का मनोरंजन करेंगे। उन्होंने अपना यह कार्यक्रम कोरोना योद्धाओं को समर्पित किया है।

ऑनलाइन मुशायरे की ओर बढ़ चली कला अकादमी

कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बीच प्रदेश के कवि और शायर अब ऑनलाइन वर्चुअल कवि गोष्ठियों और मुशायरों की ओर बढ़ चले हैं। लॉकडाउन के दौरान प्रदेश में या देश के किसी भी अन्य हिस्से में कोई भी कवि गोष्ठी या मुशायरा आयोजित नहीं हुआ है।

बदलते परिवेश के बीच जम्मू कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी ने सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाते हुए कवियों व शायरों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया है। अकादमी के सचिव मुनीर रकीब ने कहा कि सोशल मीडिया पर ही अब सब मिल रहे हैं। हमने गीत-संगीत, मुशायरों, कवि गोष्ठियों के ऑनलाइन छह पूर्ण सत्र आयोजित किए हैं। हमने विभिन्न भाषाओं के कवियों व शायरों के लिए अलग अलग भी आयोजन किया है।

मुनीर ने बताया कि दो दिन पहले कश्मीर के सबसे पुराने सांस्कृतिक संगठन रफियाबाद अदबी मरकज के साथ मिलकर मुशायरे का आयोजन किया था। इसमें 17 से ज्यादा शायरों ने भाग लिया। अकादमी में मुख्य संपादक मोहम्मद अशरफ टॉक ने कहा कि ऑनलाइन कवि गोष्ठियों, मुशायरों को सफल बनाने में स्थानीय सांस्कृतिक व साहित्यिक संगठनों की भूमिका उल्लेखनीय है।

Posted By: Preeti jha

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