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अखरोट की लकड़ी से रेशम के धागों तक... दुनिया देखेगी कश्मीर का सदियों पुराना हुनर, इन 3 फिल्मों का IFFJK में चयन

Published: Sat, 05 Sep 2026 12:09 PM (IST)

फिल्मकार भारतबाला की 'वर्चुअल भारत' श्रृंखला की तीन डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का चयन जम्मू-कश्मीर के IFFJK 2026 के लिए हुआ है। ...और पढ़ें

कश्मीर की सदियों पुरानी कला अब अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दिखेगी। (फाइल फोटो)

कश्मीर की सदियों पुरानी कला अब अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दिखेगी(फाइल फोटो)

HighLights

  1. 'वर्चुअल भारत' की तीन फिल्में IFFJK 2026 में चयनित।

  2. कश्मीर की लकड़ी नक्काशी, कालीन बुनाई पर आधारित फिल्में।

  3. महोत्सव 7-10 सितंबर को श्रीनगर, जम्मू, गुलमर्ग में।

जागरण संवाददाता, जम्मू। कश्मीर की सदियों पुरानी कला, शिल्प और सांस्कृतिक परंपराओं की कहानी अब अंतरराष्ट्रीय फिल्म मंच पर दिखाई देगी। फिल्मकार भारतबाला की चर्चित डॉक्यूमेंट्री श्रृंखला ‘वर्चुअल भारत’ की तीन लघु फिल्मों का चयन जम्मू-कश्मीर के पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव एफएफजेके 2026 के लिए हुआ है। चार दिवसीय महोत्सव 7 से 10 सितंबर तक श्रीनगर, जम्मू और गुलमर्ग में आयोजित होगा।

वर्चुअल भारत की ‘नक्श-ए-दौर : द स्टोरी ऑफ गुलाम नबी दार’ और ‘तालीम’ को महोत्सव के जेके सलेक्ट कम्पटीशन सेक्शन में शामिल किया गया है। वहीं, नगालैंड की पारंपरिक वास्तुकला और लकड़ी की नक्काशी पर आधारित ‘कुनेमेची : ए होम कार्व्ड इन एन्सेस्ट्री’ को नान -कंपटीशन सेक्शन में प्रदर्शित किया जाएगा।

छह दशक से लकड़ी में उकेर रहे कश्मीर की विरासत

‘नक्श-ए-दौर’ श्रीनगर के सफाकदल के मास्टर शिल्पकार गुलाम नबी दार की कहानी है। छह दशकों से वह अखरोट की लकड़ी पर कश्मीर की सांस्कृतिक स्मृतियों को आकार दे रहे हैं।

फिल्म में चिनार के पारंपरिक रूपांकनों और कुरानिक सुलेख के साथ उस संघर्ष को दिखाया गया है, जिसमें औद्योगीकरण और बदलते समय के बीच पारंपरिक काष्ठकला को बचाए रखने का प्रयास जारी है। गुलाम नबी दार नई पीढ़ी के कारीगरों को भी प्रशिक्षित कर रहे हैं।

‘तालीम’ में हजारों हाथों की मेहनत

‘तालीम’ कश्मीर की सदियों पुरानी कालीन बुनाई की परंपरा पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि कारीगर पीढ़ियों से चली आ रही ‘तालीम’ नामक मौखिक परंपरा के आधार पर रेशम और ऊन के कालीनों में जटिल डिजाइन तैयार करते हैं।

कताई और रंगाई से लेकर बुनाई और अंतिम रूप देने तक हजारों हाथ इस कला को आकार देते हैं।

1100 से अधिक प्रविष्टियों में से 135 फिल्में शॉर्टलिस्ट

आईएफएफजेके 2026 का आयोजन जम्मू-कश्मीर सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से किया जा रहा है। महोत्सव के लिए 50 से अधिक देशों से 1100 से ज्यादा प्रविष्टियां मिलीं, जिनमें से 41 देशों की 135 फिल्मों को स्क्रीनिंग के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। पांच सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय जूरी फिल्मों का मूल्यांकन करेगी।

स्क्रीनिंग श्रीनगर के एसकेआईसीसी और आईएनओएक्स मल्टीप्लेक्स, जम्मू के मूवी टाइम सिनेमा तथा गुलमर्ग कन्वेंशन सेंटर में होगी। महोत्सव का उद्देश्य स्थानीय फिल्म प्रतिभाओं को मंच देने के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान और फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देना भी है।

भारत की अनकही कहानियों का दस्तावेज

15 अगस्त 2019 को शुरू ‘वर्चुअल भारत’ का लक्ष्य देश की आम जिंदगी, लोक परंपराओं, कला और संस्कृति से जुड़ी 1000 लघु डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का डिजिटल संग्रह तैयार करना है। भारतबाला गणपथी सिनेमा, विज्ञापन और डॉक्यूमेंट्री क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं और उन्हें डॉक्यूमेंट्री ‘रमनामी’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।