बदलते मौसम में संभलकर, जम्मू में वायरल फीवर के साथ डेंगू और निमोनिया का भी खतरा; बीमारी में खुद डॉक्टर न बनें
बदलते मौसम के कारण जम्मू और आसपास के इलाकों में बुखार, जुकाम, वायरल फीवर, निमोनिया और डेंगू के मामले तेजी ...और पढ़ें

जम्मू में वायरल फीवर के साथ डेंगू-निमोनिया का भी खतरा। (फाइल फोटो)
HighLights
बदलते मौसम से जम्मू में बुखार, डेंगू के मामले बढ़े।
अस्पतालों में वायरल फीवर, निमोनिया के मरीज अधिक।
स्वच्छता, सावधानी से मौसमी बीमारियों से करें बचाव।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। बदल रहे मौसम व कई जगहों पर मच्छर पनपने का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जम्मू शहर के साथ डोडा, सांबा व अन्य जगहों पर भी अस्पतालों में बुखार, जुकाम, डेंगू, निमोनिया के मामले आ रहे हैं। आलम है कि हर दूसरे तीसरे घर में कोई न कोई बुखार का मामला मिल जाता है।
जम्मू संभाग के सबसे बड़े राजकीय मेडिकल कालेज अस्पताल जम्मू की मेडिसिन विभाग की ओपीडी में आने वाले चालीस प्रतिशत मामले बुखार, डेंगू व अन्य मौसम संबंधी बीमारियों के हैं।
श्री महाराजा गुलाब सिंह अस्पताल जम्मू की ओपीडी में रोजाना लगभग 50 से 70 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत से अधिक बच्चे केवल तेज बुखार की समस्या से ग्रसित हैं।इस अस्पताल में कुछ दिनों से बच्चों में डेंगू के मामलों में कमी आई है, लेकिन वायरल फीवर, निमोनिया और टाइफाइड के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
वायरल फीवर के साथ निमोनिया और डेंगू ने बढ़ाई चिंता
जम्मू के गांधीनगर और सरवाल अस्पताल में भी ऐसी ही स्थिति है। इस बार डोडा जिले में भी डेंगू के मामले लगातार आए हैं। जीएमसी जम्मू में मेडिसिन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डा. जेबी सिंह का कहना है कि इस मौसम में वायरल फीवर के जितने मामलों की उम्मीद की जाती है, उतने तो आ ही रहे हैं। इसके अतिरिक्त निमोनिया और डेंगू के मामले भी बड़ी संख्या में आए हैं। विशेषकर इस बार डोडा जिले से यहां पर कई मामले आए हैं।
डेंगू और वायरल फीवर से बचाव के लिए अपनाएं ये तरीके
उन्होंने कहा कि मौसम बदलते समय ऐसे मामले देखने को मिलते हैं। डा. जेबी सिंह ने कहा कि वायरल फीवर से बचाव के लिए यह जरूरी है कि बाहर से आने के बाद और कुछ खाने के बाद साबून से अपने हाथ धोएं। खांसी और बुखार से पीड़ित व्यक्तियों से दूरी बनाकर रखें। खांसते या छींकते समय मुंह पर रूमाल रखें।
हमेशा उबला हुआ या फिल्टर पानी ही पिएं।खुले में बिकने वाले स्ट्रीट फूड, कच्चे सलाद या बिना धुले फल खाने से बचें।वहीं उन्होंने डेंगू से बचाव के लिए मच्छरदानी, मास्किटो रिपलेंट का इस्तेमाल करने और पूरी बाजू के कपड़े पहनने को कहा।अपने घरों के आसपास गमलों, कूलर या अन्य जगहों पर मच्छर न पनपने दें।
'भीड़-भाड़ वाली जगहों पर न जाएं'
एसएमजीएस बाल रोग विभाग एचओडी डा. संजीव ढीगरा ने कहा कि ताजा, गर्म और घर का बना हल्का भोजन लें। बाहर से आने के बाद, भोजन करने से पहले और छींकने या खांसने के बाद हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक साबुन-पानी से धोएं या हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करें।
भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें।बदलते मौसम में अचानक तापमान में गिरावट से बचने के लिए शरीर को पूरी तरह ढकने वाले और मौसम के अनुसार उपयुक्त कपड़े पहनें। यदि बुखार 100 डिग्री से ज्या हो, लगातार 2-3 दिन बना रहे या साथ में उल्टी, सांस लेने में तकलीफ या कमजोरी दिखे तो डाक्टर से संपर्क करें।
बच्चें को करें जागरूक
जीएमसी जम्मू एसोसिएट प्रोफेसर डा. जेबी सिंह ने कहा कि स्कूल असेंबली में शिक्षकों को बच्चों को मौसमी वायरल और डेंगू से बचाव के लिए जागरूक करने की जरूरत है।इसका भी प्रभाव पड़ता है। स्वच्छता को बढ़ावा दें।
बीमारी में खुद डाक्टर न बनें
बुखार, जुकाम या डेंगू होने पर कई लोग खुद ही डाक्टर बनकर प्रतिबंधित दवाइयां और बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने लगते हैं। डा. जेबी सिंह के अनुसार, ऐसा करने से बीमारी ठीक होने के बजाय स्वास्थ्य को और नुकसान पहुंच सकता है। बीमार होने पर मरीजों को निकट के अस्पताल में जांच करवानी चाहिए और डाक्टर की सलाह पर ही दवा लेनी चाहिए।
