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श्री माता वैष्णो देवी श्राइन में 550 करोड़ के ‘नकली चांदी’ चढ़ावे का मामला गरमाया, कोर्ट ने कहा- 'सबूत सुरक्षित रखो'

By Digital Desk Edited By: Rahul Sharma
Published: Tue, 04 Aug 2026 02:00 PM (IST)

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन में 550 करोड़ रुपये के कथित नकली चांदी चढ़ावे के मामले में जम्मू कोर्ट ने ...और पढ़ें

वैष्णो देवी श्राइन में 550 करोड़ के नकली चांदी चढ़ावे पर कोर्ट सख्त, सबूत सुरक्षित रखने का आदेश।

वैष्णो देवी श्राइन में 550 करोड़ के नकली चांदी चढ़ावे पर कोर्ट सख्त, सबूत सुरक्षित रखने का आदेश।

HighLights

  1. वैष्णो देवी श्राइन में 550 करोड़ के नकली चांदी का आरोप।

  2. जम्मू कोर्ट ने DySP भवन को सबूत सुरक्षित रखने का आदेश।

  3. एडवोकेट दीपक शर्मा ने 20 टन चांदी में गबन का आरोप।

डिजिटल डेस्क, जम्मू। श्री माता वैष्णो देवी जी श्राइन में कथित 550 करोड़ रुपये के नकली चांदी चढ़ावे का सनसनीखेज मामला अब न्यायिक जांच के अहम मोड़ पर पहुंच गया है।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) जम्मू की अदालत ने भवन, कटड़ा के पुलिस उपाधीक्षक (DySP) को मामले में विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने और सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुनीश कुमार मनहास ने 29 जुलाई 2026 को जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की गई है।

यह कार्यवाही एडवोकेट दीपक शर्मा द्वारा दायर एक आवेदन के बाद शुरू हुई है। शर्मा ने श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई लगभग 20 टन चांदी में कथित मिलावट, हेराफेरी, चोरी और संभावित गबन का आरोप लगाया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 550 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

एडवोकेट शर्मा ने इस संबंध में अपनी मूल शिकायत 9 मई 2026 को पुलिस महानिरीक्षक, क्राइम ब्रांच, जम्मू और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, क्राइम ब्रांच (आर्थिक अपराध शाखा), जम्मू को सौंपी थी।

शिकायत से लेकर अब तक हुई जांच

कोर्ट के सामने SSP, क्राइम ब्रांच (EOW) जम्मू द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार: 

  • क्राइम ब्रांच को शिकायत 11 मई को प्राप्त हुई और 20 मई को आगे की कार्रवाई के लिए क्राइम हेडक्वार्टर भेजा गया।
  • क्राइम हेडक्वार्टर ने 9 जून को इसे जोनल पुलिस हेडक्वार्टर, जम्मू को भेजने की मंजूरी दी, जिसके बाद 13 जून को इसे IGP, जम्मू जोन को भेजा गया।
  • इसके बाद मामले को जांच के लिए SSP रियासी के पास भेजा गया और अंततः जांच की जिम्मेदारी DySP भवन, कटरा को सौंपी गई।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अब तक इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं की गई है और मामला अभी भी जांच के स्तर पर ही है।

सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका, कोर्ट से लगाई गुहार

29 जुलाई की सुनवाई के दौरान एडवोकेट दीपक शर्मा ने कथित लेन-देन से जुड़े सभी भौतिक, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को तुरंत सुरक्षित रखने के लिए एक विस्तृत आवेदन दायर किया।

आवेदन में इन सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है:

  • भौतिक सबूत: बची हुई चांदी या कथित चांदी की वस्तुएं, नमूने, अवशेष, स्टॉक और तिजोरी रिकॉर्ड, वजन और प्रेषण रजिस्टर, जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट, सरकारी टकसाल के रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज और कब्जे की पूरी श्रृंखला का रिकॉर्ड।
  • डिजिटल सबूत: सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक इन्वेंट्री डेटा, आधिकारिक ईमेल, सर्वर लॉग, एक्सेस रिकॉर्ड, ऑडिट ट्रेल, अकाउंटिंग रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य।

आवेदन में कहा गया कि भौतिक सामग्री को और पिघलाने, रिफाइन करने, ट्रांसफर या प्रोसेस करने या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को डिलीट या ओवरराइट करने से सबूतों की पहचान, संरचना, वजन, शुद्धता और चेन ऑफ कस्टडी पर अपूरणीय असर पड़ सकता है।

आवेदन को रिकॉर्ड पर लेते हुए कोर्ट ने DySP भवन को सबूतों को सुरक्षित रखने वाली याचिका में बताए गए तथ्यों पर उचित कार्रवाई करने और अगली सुनवाई पर की जा रही जांच के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

सबूतों से कोई छेड़छाड़ न हो

इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए एडवोकेट दीपक शर्मा ने कहा, 'यह आदेश लंबित जांच और संभावित रूप से महत्वपूर्ण साक्ष्यों के संरक्षण दोनों को सीधे न्यायिक जांच के दायरे में ले आता है। मेरी तात्कालिक चिंता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी भौतिक, दस्तावेजी या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य में कोई बदलाव, पिघलाव, स्थानांतरण, विनाश, विलोपन या ओवरराइटिंग न हो।'