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जम्मू: पुराने शहर में कब गिर जाए कौन सी इमारत, भरोसा नहीं; 100-150 जर्जर मकान, 1300 से ज्यादा कस्टोडियन संपत्तियां

Published: Thu, 24 Sep 2026 07:00 AM (IST)

पुराने जम्मू की सैकड़ों जर्जर इमारतें बड़े हादसे का इंतजार कर रही हैं। कस्टोडियन और वक्फ संपत्तियों में कानूनी अड़चनों ...और पढ़ें

जम्मू के कई घनी आबादी वाले इलाकों में पुरानी इमारतें कमजोर नींव पर टिकीं (फाइल फोटो)

जम्मू के कई घनी आबादी वाले इलाकों में पुरानी इमारतें कमजोर नींव पर टिकीं (फाइल फोटो)

HighLights

  1. पुराने जम्मू में सैकड़ों इमारतें जर्जर, हादसे का इंतजार।

  2. कस्टोडियन संपत्तियों की मरम्मत कानूनी अड़चनों से रुकी।

  3. जम्मू नगर निगम असुरक्षित इमारतों पर कर रहा कार्रवाई।

अंचल सिंह, जम्मू। जम्मू की ऐतिहासिक गलियों और पुराने मोहल्लों में खड़ी सैकड़ों पुरानी इमारतें किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही हैं। पक्का डंगा, कच्ची छावनी, उस्ताद मोहल्ला, पीर मिट्ठा, कनक मंडी और पुरानी मंडी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में दशकों पुरानी इमारतें बेहद कमजोर नींव पर टिकी हैं। बारिश और सीलन के मौसम में दीवारों में आई गहरी दरारें और जर्जर छज्जे किसी भी पल भरभरा कर गिरने की स्थिति में पहुंच जाते हैं।

शहरी सर्वेक्षणों और वार्ड स्तर के आकलनों के अनुसार शहर में लगभग सौ से डेढ़ सौ इमारतें ऐसी हैं जो रहने अथवा व्यापार करने के लिहाज से बेहद खतरनाक हो चुकी हैं। इनमें से करीब चालीस से पचास प्रतिशत ढांचे कस्टोडियन अथवा वक्फ की संपत्तियों के दायरे में आते हैं।

दशकों से इन परिसरों में मामूली किराए पर काबिज लोग मालिकाना हक या कानूनी पाबंदियों के चलते बड़ी मरम्मत नहीं करवा सकते। कस्टोडियन विभाग की अनुमति मिलने में आने वाली अड़चनें और कई संपत्तियों पर न्यायालय में लंबित मुकदमों के कारण इन इमारतों का मरम्मत कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है।

जम्मू में कस्टोडियन संपत्तियों का बड़ा आंकड़ा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जम्मू शहर में कस्टोडियन के 1311 मकान तथा 346 दुकानें हैं। वहीं जम्मू ग्रामीण में 750 मकान और 217 दुकानें हैं। अधिकतर कस्टोडियन इमारतें उन लोगों को दी गई थीं जो भारत-पाक बटवारे के समय पाकिस्तान के पास चले गए हिस्से से जम्मू में शरण लेने आए थे।

आम जनता की सुरक्षा पर मंडराता संकट

पुराने शहर की संकरी गलियों में इन इमारतों की बदहाली सीधे तौर पर आम राहगीरों और पड़ोसियों की जिंदगी को खतरे में डालती है। आए दिन छज्जों और दीवारों से ईंटें या भारी मलबा सड़क पर गिरता है जिससे नीचे से गुजरने वाले स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों को गंभीर चोटें आने का अंदेशा बना रहता है।

इसके अलावा यदि कोई एक कमजोर ढांचा ढहता है तो आपस में सटी होने के कारण आसपास के कई सुरक्षित मकानों की दीवारों को भी भारी नुकसान पहुंचने का जोखिम रहता है। पिछले दिनों दो इमारतों के हिस्से गलियों में ढह गए थे। शुक्र यह रहा कि इसमें जानी-माली नुकसान नहीं हुआ क्योंकि इमारतें खाली थीं।

जम्मू नगर निगम की कार्यप्रणाली और कार्रवाई

जम्मू नगर निगम अपने अधिनियम के तहत ऐसी असुरक्षित इमारतों को चिह्नित कर उनके मालिकों और किराएदारों को धारा 258 व 259 के तहत नोटिस जारी करता है। निगम की तकनीकी टीमें मौके पर जाकर ढांचों की मजबूती, बीम और नींव की जांच करती हैं। जो इमारतें मरम्मत के लायक होती हैं, उन्हें तकनीकी सुधार की अनुमति दी जाती है, जबकि अत्यधिक जर्जर और जानलेवा स्थिति में पहुंच चुकी इमारतों को निगम खिलाफवर्जी दस्ते की मदद से सुरक्षित तरीके से ध्वस्त कर देता है।

क्या कहते हैं लोग

पुरानी मंडी निवासी अजेयश गुप्ता ने बताया कि पुराने शहर की अधिकतर कस्टोडियन इमारतें जर्जन हाे चुकी हैं। मालिकाना हक देकर उन्हें स्वयं इमारतें ठीक करने का मौका दिया जाए। जो रहने लायक नहीं हैं, उन इमारतों काे असुरक्षित घोषित कर कार्रवाई की जाए।’

धौंथली निवासी कर्ण सिंह ने बताया कि कस्टोडियन विभाग किराएदारों की परवाह नहीं कर रहा। इन इमारतों की समय-समय पर मरम्मत होती रहनी चाहिए। हालत यह है कि वर्षों से इनमें रहने वाले आज छत की तलाश में भटकने को मजबूर हैं। यही हाल रहा तो यह इमारतें आने वाले कुछ वर्षों में हादसों का कारण बनेंगी।

गुरुद्वारा गली पीर मिट्ठा निवासी रिंकू ने बताया कि कस्टोडियन प्रापर्टी की लगातार अनदेखी का ही नतीजा है कि यह इस हालत में पहुंच गई हैं। कुछ किराएदारों ने स्वयं से खर्च कर इनकी मरम्मत कर रहने लायक बनाया है। प्रशासन काे चाहिए कि जो लोग स्वय मरम्मत करवाने की हिम्मत रखते हैं उनका सहयोग करे, न कि परेशान किया जाए।

अफगाना मुहल्ला निवासी रतन लाल ने बताया कि मालिकाना हक नहीं हैं। मरम्मत करवाने अथवा नया निर्माण करवाने के लिए बड़ी अड़चने हैं। इसी कारण हर कोई परेशान है। आसपास रहने वाले भी खतरे में हैं। इन इमारतों की सुध ली जानी चाहिए। किराएदारों को राहत प्रदान की जाए।

क्या कहते हैं अधिकारी

जम्मू नगर निगम आयुक्त डॉ. देवांश यादव बताते हैं कि सभी वार्डों में तकनीकी और खिलाफवर्जी टीमों को पचास वर्ष से अधिक पुरानी तथा कमजोर इमारतों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।

कस्टोडियन विभाग के साथ भी लगातार समन्वय साधा जा रहा है ताकि कानूनी पेचीदगियों के कारण अटकी असुरक्षित इमारतों का तुरंत समाधान निकाला जा सके। जिन इमारतों से जनहानि की सीधी आशंका होगी, उन्हें नियमानुसार तुरंत गिराया जाएगा और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।