लेह, राज्य ब्यूरो: बर्फीले रेगिस्तान कहे जाने वाले लद्दाख में अब फूलों की बहार है। नूबरा, खल्सी समेत लेह व कारगिल की वादियां अब खुबानी के फूलों की महक से सराबोर है। फूलों संग लद्दाखी गीत-संगीत और संस्कृति की खुशबू पर्यटकों को भी लुभा रही है। लेह और कारगिल जिलों में पर्यटकों को लुभाने और लद्दाख की संस्कृति से रूबरू कराने के लिए खुबानी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

इन कार्यक्रमों में खुबानी के उत्पादों के साथ लद्दाख की संस्कृति को बढ़ावा देने वाले रंगारंग कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। महोत्सवों के आयोजन के दौरान कोरोना रोकथाम संबंधी हिदायतों का सख्ती से पालन किया जाएगा।

फूलों से खिले ये बाग सर्दी जाने के साथ यह शुभ संदेश भी लाते हैं कि देश, विदेश के पर्यटकों की भीड़ लद्दाख आने वाली है। पर्यटन लद्दाख का मूल व्यवसाय है। ऐसे में पर्यटन को बढ़ावा देने की मुहिम के तहत लद्दाख में पहली बार खुबानी फूल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

इन महोत्सवों को कामयाब बनाने की जिम्मेवारी संभाल रहे लेह के डिप्टी कमिश्नर श्रीकांत सूसे का कहना है कि हम पर्यटकों को खुबानी के बागों में ले जाएंगे उन्हें दिखाई कि बहार का मौसम लद्दाख की खूबसूरती को किस तरह से चार चांद लगाता है।

कश्मीर में होता है ट्यूलिप महोत्सव: बहार के मौसम में ऐसे महोत्सव जापान में पर्यटकों को फूलों से लदे बागों में आने का संदेश देते हैं। कश्मीर में भी ट्यूलिप महोत्सव व फूलों से लदी बादामबारी भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। अब लद्दाख के बाग भी अपनी खूबूसरती दिखाएंगे।

अलग-अलग गांवों में होंगे आयोजन: अप्रैल के पहले सप्ताह में कारगिल के दारचिक गांव में यह महोत्सव आयोजित किया गया। अब लेह की नूबरा वेली में 12 से 13 अप्रैल तक खुबानी फूल महोत्सव होगा। यह महोत्सव तुरतुक व त्याकशी गांवों में होगा। इसके बाद 17 व 18 अप्रैल को खल्सी इलाके के दाह व बीमा गांवों में भी इस महोत्सव का आयोजन होगा। महोत्सव को कामयाब बनाने के लिए लेह प्रशासन की तैयारियां जोरशोर से जारी हैं। ऐसे में लेह के डिप्टी कमिश्नर ने पर्यटन विभाग के अधिकारियों से बैठक कर महोत्सव को कामयाब बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रबंधों का जायजा लिया।

चीन के व्‍यापारी लद्दाख लाए थे खुबानी के पेड़: करीब एक शताब्दी पहले चीन के व्यापारी खुबानी के पेड़ पूर्वी लद्दाख में लाए थे। यह पेड़ लद्दाख में दुर्गम हालात के लिए उपयुक्त हैं। ऐसे में ये पेड़ बढ़ते हुए इस इलाके में फैल गए। आज खुबानी लद्दाख की अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न अंग है। सूखी हुई खुबानी देश विदेश में बिकती है। इसे लद्दाखी भाषा में चुल्ली व हलमन्न भी कहा जाता है। गर्मी आने से पहले फूलों से लदे ये पेड़ बहुत खूबसूरत दिखते हैं।

  • कारगिल की अपनी अनूठी परंपरा और संस्कृति है और यह पर्यटकों को बरबस ही आकर्षित करती है। प्रशासन प्रयास कर रहा है आर्यन वेली को दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर लेकर आए। -सेरिंग मोटुप, एडीसी, कारगिल

 

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