श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। एहतियातन हिरासत में 116 दिनों से बंद नेशनल कांफ्रेंस के दो वरिष्ठ नेताओं महासचिव अली मोहम्मद सागर और पूर्व विधायक शेख इशफाक जब्बार को उनकी हालत बिगडऩे पर शेरे कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान सौरा (स्किम्स) में भर्ती कराया गया है। दोनों ही पूर्व विधायक हैं। इनमें से एक की एंजियोग्राफी कराई गई है। श्रीनगर नगर निगम के डिप्टी मेयर को उपचार के लिए स्किम्स ले जाया गया था, लेकिन जांच के बाद डॉक्टरों ने वापस उप जेल एमएलए हॉस्टल भेज दिया।

जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के बाद पांच अगस्त से प्रशासन ने नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी, कांग्रेस, पीपुल्स कांफ्रेंस, अवामी इत्तेहाद पार्टी, जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट, पीपुल्स डेमोक्रेटिक फोरम, नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी समेत मुख्यधारा के विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 1100 प्रमुख नेताओं व कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में लिया या फिर नजरबंद किया गया है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं। इनमें से करीब 32 नेता उप जेल एमएलए हॉस्टल में बंद हैं। इनमें नेशनल कांफ्रेंस के महासचिव अली मोहम्मद सागर और नेकां के पूर्व विधायक शेख इशफाक जब्बार, पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता व श्रीनगर नगर निगम के डिप्टी मेयर शेख इमरान भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि गत वीरवार की रात को अली मोहम्मद सागर और शेख इशफाक जब्बार का स्वास्थ्य बिगड़ गया। उन्हें उप जेल में प्राथमिक उपचार के बाद स्किम्स ले जाया गया। यहां डॉक्टरों ने बताया कि अली मोहम्मद सागर और शेख इशफाक जब्बार की हालत अब पहले से बेहतर है। दोनों ही हृदयारोग से पीड़ित हैं। 65 वर्षीय सागर शुगर से भी पीडि़त हैं। वहीं, एमएलए हॉस्टल में रखे गए पूर्व शिक्षा मंत्री नईम अख्तर, पीडीपी के पूर्व उपाध्यक्ष सरताज मदनी, नेकां नेता बशीर वीरी की तबीयत भी खराब बतायी जा रही है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

इस बीच, नेकां के जम्मू संभाग के प्रधान देवेंद्र सिंह राणा, अजय सडोत्रा, सुरजीत सिंह सलाथिया, विजय बकाया, टीएस वजीर, संजय गुप्ता समेत दो दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ नेताओं ने साझा बयान जारी कर कहा है कि हिरासत में रखे गए नेताओं को सभी मौलिक और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएं। उन्होंने कहा कि भीषण ठंड में राजनीतिक कैदियों को ठंड से बचाव की सुविधा, स्वास्थ्य सेवा व अन्य सुविधाओं से वंचित रखना अमानवीय और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

Posted By: Rahul Sharma

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