श्रीनगर, राज्य ब्यूरो : कश्मीर के माहौल में बदलाव का असर साफ नजर आने लगा है।कश्मीर घाटी में जगह-जगह लहराते राष्ट्रध्वज और विभिन्न होर्डिंग में तिरंगें की तस्वीरें स्थानीय जनभावनाओं को व्यक्त कर रही हैं। लोगों में राष्ट्रवाद और मुख्यधारा में विलीन होने की भावना से पुलिस भी अछूती नहीं रही है। श्रीनगर पुलिस ने अपने ट्विटर में बदलाव करते हुए लालचौक स्थित ऐतिहासिक घंटाघर के शिखर पर लहराते तिरंगे की तस्वीर को शामिल किया।

आपको यह जानकर हैरानी होगी पर यह सर्च है कि पिछले 74 वर्षाें में यह पहला अवसर है, जब जम्मू-कश्मीर पुलिस के किसी विंग या किसी जिला पुलिस ने यूं अपने प्रतीक चिन्ह अथवा लोगो में इस तरह से राष्ट्रध्वज को शामिल किया हो। पांच अगस्त 2019 से पूर्व कश्मीर में आतंकियों और अलगाववादियों के डर से कोई सार्वजनिक रूप से राष्ट्रध्वज नहीं फहराता था। राष्ट्रध्वज सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी को ही वादी में सरकारी इमारतों या कुछ अन्य स्थानों पर कुछेक लोग ही फहराते नजर आतेे थे।

राष्ट्रध्वज सिर्फ सरकारी इमारतों और कुछ अन्य प्रतिष्ठानों पर या फिर सुरक्षा शिविरों में नहीं नजर आता था। इसके विपरीत कश्मीर में आए दिन अलगाववादियों और आतंकियों के समर्थक पाकिस्तानी झंडे लेकर गली-बाजारों में निकल आते थेे। उनके डर से आम लोग भी पाकिस्तानी झंडा उठाकर भीड़ का हिस्सा बन जाते रहे हैं। लोग आतंकियों व अलगाववादियों के फरमान पर स्वतंत्रता दिवस समारोह से भी दूर रहते और राष्ट्रध्वज को थामने से बचते थे।

अलबत्ता, अब परिस्थितियां बदल गई हैं। घाटी के विभिन्न इलाकों में आमजन अब अपने अपने स्तर पर तिरंगा रैलियां निकाल रहा है। सभी सरकारी इमारतों और कार्यालयों में राष्ट्रध्वज लहराया जा रहा है। लोगों में इसी भावना को जगाने के लिए श्रीनगर पुलिस ने भी शहर में विभिन्न जगहों पर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं जनता को भेंट करते हुए होॄडग्स लगाए हैं। इन होॄडग्स और अपने ट्विटर हैंडल में श्रीनगर पुलिस ने लालचौक के घंटाघर को शामिल किया है और उसके शिखर पर तिरंगा भी है।

कश्मीर मामलों के जानकार शब्बीर बुच्छ ने कहा कि आज से तीन साल पहले तक श्रीनगर में इस तरह चारों तरफ होर्डिंग्स में तिंरगे की कल्पना नहीं की जा सकती थी। अगर कहीं ऐसा होर्डिंग होता तो उसे कब कौन फाड़ गया,पता नहीं चलता। श्रीनगर पुलिस ने जिस तरह से अपने लोगो में लालचौक के घंटाघर को शामिल किया है, वह भी ध्यान देने योग्य है।

लालचौक का घंटाघर 1990 के बाद से राष्ट्रवाद और आतंकवाद, अलगाववाद के बीच प्रतिष्ठा का सवाल बना था। घंटाघर पर जिसका झंडा होता है,उसका ही यहां श्रीनगर में एक तरह से दबदबा माना जाता रहा है। पुलिस ने जिस तरह से घंटाघर के शिखर पर तिरंगे को अपने लोगो में शामिल किया है उससे एलान होता है कि कश्मीर सेे अलगाववाद व राष्ट्रविरोधी तत्वों प्रभाव समाप्त हो गया है। अब यहां पाक नहीं सिर्फ हिंदुस्तान का झंडा और नारा चलेगा। यह राष्ट्रवाद की विजय का प्रतीक भी है। इससे अलगाववादियों का मनोबल भी टूटेगा।

हारि पर्वत पर भी लहराएगा राष्ट्रध्वज : ग्रीष्मकालीन राजधानी के डाउन टाउन स्थित हारि पर्वत किले के प्राचीर पर 15 अगस्त को राष्ट्रध्वज लहराया जाएगा। 100 फीट के ऊंचे स्तंभ पर 24 फीट चौड़ा और 36 फीट लंबा राष्ट्रध्वज होगा। हारि पर्वत में ही मां शारिक भवानी का पौराणिक मंदिर है। मां शारिका जिन्हेंं त्रिपुर सुंदरी भी पुकारा जाता है, श्रीनगर शहर की ईष्ट देेवी भी हैं। 

Edited By: Rahul Sharma