राकेश शर्मा, कठुआ/जम्मू। कोरोना संक्रमण के लिए अनलॉक की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ी देशभर में परिवहन व्यवस्था सामान्य होती चली गई लेकिन 370 के खात्मे के बावजूद जम्मू कश्मीर में अपनों से मिलने के कदम पाबंदियों की जकडऩ में फंसे हैं। पंजाब में किसान आंदोलन के कारण रेल सेवाएं बंद हैं और कोरोना पर पाबंदियों के बाद से जम्मू कश्मीर में अंतरराज्यीय परिवहन सेवाएं बंद हैं।

त्योहार के मौसम में जम्मू कश्मीर से सुरक्षाबलों के जवान और दूसरे राज्यों से आए मजदूर घर लौटने की चाह में जद्दोजहद में फंसे हैं। उसी तरह पंजाब व अन्य राज्यों से आने वाले जम्मू कश्मीर के हजारों यात्री नित नई परेशानी से दो-चार हो रहे हैं। महीनों अपनों से दूर रहे इन लोगों को त्योहार में लखनपुर में जारी पाबंदी हटने की उम्मीद थीं लेकिन अभी भी निराशा ही हाथ लगी है।

जम्मू लौट रहे युवा निशांत ने बताया कि दिल्ली और पंजाब में तमाम पाबंदियां लगभग हट चुकी हैं पर जम्मू कश्मीर के लिए कोई व्यवस्था अभी नहीं बन पाई। अब बसें बदल-बदलकर किसी तरह से लखनपुर पहुंचा हूं। अब एक घंटे के इंतजार के बाद तमाम प्रक्रियाएं पूरी हुई हैं। उम्मीद कर रहा हूं परिवार के साथ दीवाली मना पाउंगा। पर वापस लौटने की चिंता अभी से सताने लगी है। यूं ही परेशानी वापसी में भी झेलनी पड़ेगी। सामान्य तौर पर त्योहार पर करीब एक लाख घर आते या जाते हैं।

यूं समझें परेशानी

राज्य प्रशासन कोरोना संक्रमण के बाद से अंतरराज्यीय परिवहन सेवाओं को इजाजत नहीं दे रहा है। जबकि अन्य राज्यों में अनलॉकडाउन 5 के बाद से बस सेवाएं सुचारू हो चुकी हैं। पड़ोसी राज्य हिमाचल और पंजाब भी लगभग पूरी तरह खुल चुके हैं।

जम्मू कश्मीर आने-जाने के लिए लखनपुर में कोरोना टेस्ट अनिवार्य बनाया गया है। इंटर स्टेट बसेंं भी नहीं चलने से इन यात्रियों को काफी भटकना पड़ रहा है। पंजाब में किसान आंदोलन के कारण रेलसेवा भी ठप है। इसका सबसे बड़ा नुकसान जम्मू कश्मीर के पर्यटन को हो रहा है। वैष्णो देवी यात्रा में कमी के कारण कटरा भी लगभग बंद चल रहा है।

जम्मू से लखनपुर, लखनपुर से दिल्ली अलग-अलग बसों में, आगे ट्रेन में

छठ एवं दीवाली पर घर लौट रहे हजारों मजदूरों को भी झेलनी पड़ रही है। ट्रेन और बस सेवाएं ठप होने के कारण एक तरफ निजी ट्रांसपोर्टरों ने भी किराया डेढ़ से दोगुना तक कर दिया है। उस पर सीधी सेवा भी नहीं है। जम्मू या अन्य जिलों से पहले प्रदेश का ट्रांसपोर्टर अपनी बसों में लखनपुर तक पहुंचाता है। वहां से दूसरी बस में वह चंडीगढ़ या दिल्ली तक जाते हैं और फिर दिल्ली से ट्रेन के माध्यम से गंतव्य तक पहुंच रहे हैं। इस तरह इनको घर लौटने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मंत्री से उपराज्यपाल तक गुहार भी नहीं आई काम

जम्मू कश्मीर और खासकर कठुआ के लोगों ने इस संदर्भ में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से लेकर उपराज्यपाल के समक्ष यह मसला उठाया और आश्वासन भी मिले लेकिन अब तक स्थिति जस की तस है। पंजाब के विशेषकर पठानकोट, गुरदासपुर और हिमाचल के कांगड़ा जिलों से जुड़ी रोजमर्रा की गतिविधियां ठप होने से नुकसान हो रहा है।

यह है पंजाब और हिमाचल में स्थिति

पंजाब और हिमाचल में बस सेवा और अंतरराज्यीय परिवहन सामान्य हो चुका है। इस कारण रेल सेवा बाधित होने के बावजूद लोगों को परेशानी अधिक नहीं होती। अधिक से अधिक बस अड्डो पर केवल शरीर का तापमान ही जांचा जाता है। साथ ही मास्‍क पहनने की भी शर्त है। हालांकि लखनपुर में पाबंदी भी औपचारिकता से अधिक नहीं है। टेस्‍ट के परिणाम न जाने कैसे सामान्‍य ही आ रहे हैं।

इनका कहना है...

  • इंटर स्टेट बसों पर पाबंदी खोलने के लिए अभी तक सरकार का कोई आदेश नहीं है। इस कारण रोक जारी है। केवल टूर ऑपरेटरों की बसों को आने की अनुमति है और वह कोरोना जांच के बाद। चाहे वो खुद पीछे से करवाकर आएं या फिर लखनपुर में करवाएं।  - ओपी भगत, डीसी कठुआ
  • हमारी एसोसिएशन ने उप राज्यपाल के पूर्व सलाहकार केके शर्मा और मंडलायुक्त जम्मू संजीव वर्मा से भेंट करने के लिए समय मांगा था, लेकिन अवसर ही नहीं मिला। जम्मू की बसों को अन्‍य राज्यों तक जाने के लिए अनुमति नहीं दी जा रही है। बस मालिक भी कर्ज के फेर में फंस रहे हैं। अन्‍य राज्‍यों में सब सामान्‍य हो रहा है पर यहां लोगों को झेलना पड़ रहा है।  -विपिन कुमार, ऑल इंडिया स्लीपर बस एसोसिएशन

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