'सर्जिकल स्ट्राइक का साहस, लेकिन पाकिस्तान से...'; मणिशंकर अय्यर ने मोदी सरकार को घेरा, विदेश नीति पर उठाए सवाल
पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने केंद्र सरकार पर पाकिस्तान से बातचीत न करने को लेकर निशाना साधा और कहा ...और पढ़ें

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर। फाइल फोटो
पीटीआई, जम्मू। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान के साथ बातचीत नहीं करने को लेकर रविवार को केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने का साहस तो दिखाती है, लेकिन दोनों देशों के बीच लंबित मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने की इच्छाशक्ति नहीं दिखा रही।
श्रीनगर में आयोजित पांचवें हल्ला बोल सम्मेलन को संबोधित करते हुए अय्यर ने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू करने की वकालत की। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों के प्रतिनिधि अटारी-वाघा सीमा पर बैठकर बातचीत कर सकते हैं, ताकि किसी पक्ष को दूसरे देश में जाने की जरूरत न पड़े।
अय्यर ने कहा कि जब भारत पाकिस्तान के साथ सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है तो उसके साथ बातचीत करने का साहस क्यों नहीं दिखा सकता। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे से बातचीत करनी चाहिए और मित्रवत संबंध बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों के प्रतिनिधि एक-दूसरे के क्षेत्र में जाने में असहज महसूस करते हैं तो अटारी-वाघा सीमा पर ही एक मेज लगाकर बातचीत की जा सकती है। उनके अनुसार, इससे दोनों देशों को अपनी-अपनी सीमाओं के भीतर रहते हुए लगातार संवाद बनाए रखने का अवसर मिलेगा।
लंबित मुद्दों पर फिर बातचीत की जा सकती है
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बातचीत के जरिए यह तय किया जा सकता है कि किन मुद्दों का समाधान संभव है और किनका फिलहाल नहीं। जिन विषयों पर सहमति बने, उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए और जिन मुद्दों पर मतभेद कायम रहें, उन्हें कुछ समय के लिए टालकर संवाद जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां बदलने पर लंबित मुद्दों पर फिर बातचीत की जा सकती है।
अय्यर ने कहा कि अतीत को लेकर लगातार बहस करते रहना विदेश नीति नहीं है। उन्होंने रचनात्मक समाधान के लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत को जरूरी बताते हुए कहा कि संवाद में कितना भी समय लगे, उसे जारी रखा जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिका और रूस के बीच संबंधों का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों देशों ने राजनयिक संबंध और बातचीत कभी पूरी तरह समाप्त नहीं की।
सुधार के लिए गैर-हिंदुत्व दलों को एकजुट होना होगा
अय्यर ने कहा कि समझदार देश एक-दूसरे से बातचीत करते हैं। देश के राजनीतिक हालात पर पूछे गए सवाल के जवाब में अय्यर ने कहा कि भारतीय राजनीतिक माहौल में सुधार के लिए गैर-हिंदुत्व दलों को एकजुट होना होगा।
उन्होंने पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के उस आह्वान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कश्मीरियों से एकजुट होकर अपनी आवाज उठाने की बात कही थी। अय्यर ने कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में भी इसी तरह गैर-हिंदुत्व दलों के एक साथ आने की जरूरत है।
उन्होंने इंडिया गठबंधन का उल्लेख करते हुए दावा किया कि यदि 2024 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन के घटक दल पूरी तरह एकजुट होकर चुनाव लड़ते तो उसे बहुमत के लिए जरूरी अतिरिक्त सीटें मिल सकती थीं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के एकजुट होने से जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने और अनुच्छेद 370 तथा 35 ए को लेकर भी नई पहल की संभावना बन सकती थी।
भारत आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने रविवार को केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गया है और उसकी विदेश नीति दिशाहीन नजर आती है। उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करने और चीन के साथ सीमा संबंधी विवादों का समाधान करने की जरूरत है।
श्रीनगर में पांचवें हल्ला बोल सम्मेलन को संबोधित करते हुए अय्यर ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से स्थापित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में करीब 80 साल बाद बड़ा बदलाव हो रहा है, लेकिन भारत इस बदलाव का हिस्सा बनने के बजाय पीछे छूटता हुआ दिखाई दे रहा है।
उन्होंने दावा किया कि भारत आज जितना अलग-थलग है, उतना उन्होंने अपने जीवन के 85 वर्षों में पहले कभी नहीं देखा। अय्यर ने कहा कि भारत पहले अपनी विदेश नीति को नैतिकता के आधार पर आगे बढ़ाता था, जबकि मौजूदा सरकार की नीति को उन्होंने भ्रमित बताया।
पाकिस्तान के साथ शांति और चीन के साथ सीमा विवादों का समाधान
उन्होंने कहा कि आज भारत के पास दुनिया के सामने रखने के लिए वैसा रणनीतिक योगदान नहीं है, जैसा आजादी के शुरुआती वर्षों में महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के विचारों के रूप में था। उनके अनुसार, रणनीतिक स्वायत्तता तभी सार्थक हो सकती है जब भारत के पास दुनिया को देने के लिए कोई महत्वपूर्ण योगदान हो। उनके अनुसार, पाकिस्तान के साथ शांति और चीन के साथ सीमा विवादों का समाधान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे।
अय्यर के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब भारत की विदेश नीति, पड़ोसी देशों के साथ संबंधों और रणनीतिक स्वायत्तता को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। उनके बयान उनके व्यक्तिगत राजनीतिक आकलन और आलोचना को दर्शाते हैं।
