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जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की बदली रणनीति, बड़े हमलों के बजाय हिट-एंड-रन की साजिश; सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

Published: Fri, 11 Sep 2026 10:25 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में आतंकी संगठनों ने अपनी रणनीति बदली है, अब वे बड़े हमलों की बजाय छोटे हिट-एंड-रन हमलों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

बड़े हमलों के बजाय हिट-एंड-रन की साजिश, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट।

बड़े हमलों के बजाय हिट-एंड-रन की साजिश, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट।

HighLights

  1. आतंकी संगठनों ने बड़े हमलों की बजाय छोटे हमले चुने।

  2. ऑनलाइन दुष्प्रचार, स्थानीय युवाओं की भर्ती पर जोर।

  3. सुरक्षा एजेंसियां जम्मू-कश्मीर में अभियान तेज कर रही हैं।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद की रणनीति में बदलाव से जुड़ी खुफिया सूचनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कश्मीर घाटी में ही नहीं जम्मू प्रांत के उच्च पर्वतीय इलाकों में भी आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आतंकी संगठनों ने फिलहाल बड़े हमलों के बजाय छोटे और अलग-अलग हिट-एंड-रन हमलों पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति बनाई है।

खुफिया इनपुट के अनुसार, इस रणनीति के तहत तीन स्तरों पर काम किया जा रहा है। इनमें ऑनलाइन दुष्प्रचार, नए स्थानीय युवाओं की भर्ती और छोटे हमलों को अंजाम देना शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर ऐसे युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिनका पहले कोई आपराधिक या पुलिस रिकॉर्ड नहीं है। इससे सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने की कोशिश की जा रही है।

एक खुफिया अधिकारी के मुताबिक, हमलों के बीच पर्याप्त अंतर रखने की योजना है, ताकि वे अलग-अलग घटनाओं की तरह दिखाई दें। अधिकारियों के अनुसार, भर्ती किए गए युवाओं को हथियार और हमले की जिम्मेदारी देने से पहले नेटवर्क के कई सदस्यों के जरिए संपर्क कराया जाता है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, लश्कर से जुड़े मॉड्यूल स्थानीय पुलिसकर्मियों, कश्मीरी हिंदुओं और प्रवासी श्रमिकों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी के साथ यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल के नाम से ऑनलाइन धमकी और प्रचार अभियान भी चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन अभियानों का उद्देश्य डर पैदा करने के साथ युवाओं को कट्टरपंथ और आतंकी भर्ती की ओर धकेलना है।

हाल की धमकियों में कश्मीरी हिंदुओं केसाथ महिलाओं और उनके परिवारों को भी निशाना बनाने की बात कही गई है। अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग समुदायों के बीच अविश्वास बढ़ाना और सामाजिक तनाव पैदा करना इस अभियान का हिस्सा हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आतंकी जम्मू प्रांत के पर्वतीय इलाकों में रहने वाले अल्पसंख्यकों को भी निशाना बना सकते हैं।इसके अलावा वह सुरक्षाबलों पर घात लगाकार हमला करने की रणनीति भी अपना सकते हैं।

सुरक्षा एजेंसियां अब ऑनलाइन गतिविधियों, संदिग्ध भर्ती मॉड्यूल और हथियारों की आवाजाही से जुड़े नेटवर्क पर नजर रख रही हैं। अधिकारियों को आशंका है कि बड़े हमलों की तैयारी के लिए पाकिस्तान से आतंकियों की घुसपैठ का प्रयास भी किया जा सकता है। तब तक छोटे हमलों और दुष्प्रचार के जरिए घाटी में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा सकती है।