भाटाधुलियां (पुंछ), गगन कोहली : जिले के चमरेड और भाटाधुलियां के जंगलों में आतंकी जिन हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह सीमा पार से ड्रोन की मदद से आतंकियों तक पहुंचाए गए हैं। स्थिति स्पष्ट है, इस साजिश के पीछे भी आतंकियों का आका पाकिस्तान ही है।

सूत्रों के अनुसार, आतंकियों का यह ग्रुप पिछले दो माह से इस क्षेत्र में सक्रिय है। पहले इन आतंकियों ने पुंछ के चमरेड के जंगल में सेना के दल पर हमला किया, जिसमें जेसीओ सहित पांच सैनिक शहीद हो गए। इस वारदात के ठीक चार दिन बाद आतंकी चमरेड के जंगल से निकल कर भाटाधुलियां के जंगल में पहुंच गए। यहां पर आतंकियों की सेना के जवानों से भीषण मुठभेड़ हुई, जिसमें जेसीओ सहित चार सैनिक बलिदान हो गए। उसके बाद से सेना ने इस ग्रुप को भाटाधुलियां के जंगल में घेर रखा है।

सूत्रों के अनुसार, आतंकियों का यह ग्रुप सीमा पार से बिना हथियार के दाखिल हुआ था और इनके पास हथियार ड्रोन के माध्यम से पहुंचाए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि थन्ना मंडी क्षेत्र में मई, जून में सुरक्षा बलों ने ड्रोन से भेजे गए हथियार बरामद किए थे, लेकिन कोई भी आतंकी नहीं पकड़ा गया था। इसके बाद ड्रोन की हलचल फिर से भारतीय क्षेत्र में देखी गई थी।

ड्रोन के माध्यम से हथियारों को भारतीय क्षेत्र में पहुंचाया गया और आतंकियों के मददगारों ने इन हथियारों को आतंकियों तक पहुंचाया। इसके बाद आतंकी क्षेत्र में पूरी तरह से सक्रिय हो गए और अपनी गतिविधियों को अंजाम देने लगे। चार आतंकियों को पिछले दो माह में सुरक्षाबलों ने ढेर भी कर दिया है। इसके बाद यह ग्रुप कुछ दिनों के लिए शांत हो गया और अब एक बार फिर सक्रिय हो चुका है। हालांकि अब यह ग्रुप पूरी तरह सेना के घेरे में है और इसके बच निकलने की उम्मीद न के बराबर है।

10 अक्टूबर के बाद नहीं खुला फोन : सूत्रों के अनुसार, आठ दिन पहले यानि 10 अक्टूबर को आतंकियों ने एक मोबाइल फोन में सिम डालकर अपने किसी साथी से बात की थी। इसके बाद वह नंबर बंद आ रहा है। दरअसल, आतंकियों ने चमरेड जंगल के पास रहने वाले किसी व्यक्ति के मोबाइल में अपनी सिम डाली थी। सुरक्षा एजेंसियां उस व्यक्ति से पूछताछ में जुटी हैं।

एक आतंकी पंजाबी भाषा में करता है बात : भाटाधुलियां के जंगल में जो आतंकी सेना के घेरे में फंसे हैं। उनमें से एक पंजाबी भाषा में बातचीत करता है और उसने काले व लाल रंग के जूते पहन रखे हैं। उसका कद भी ज्यादा लंबा नहीं है। यह बात सेना को उन लोगों ने बताई है, जिनके घर से आतंकी कुछ दिन पहले खाना लेकर गए थे।

दिन में हेलीकाप्टर से निगरानी तो रात को रोशनी गोले से : मेंढर के भाटाधुलियां के जंगल को सेना ने पूरी रणनीति के तहत घेरा हुआ है। आतंकी जंगल से भाग कर न जाएं सैन्य हेलीकाप्टर निगरानी कर रहे हैं। रात को बीच-बीच में रोशनी के गोले छोड़ उजाला किया जाता है। जंगल को सेना व पैरा कमांडों ने चारों तरफ से घेर रखा है। आतंकियों का निकलना नामुमकिन है। फिर भी सेना के चापर दिन में लगातार जंगल की निगरानी कर रहे हैं। रात को हेलीकाप्टर से जंगल की निगरानी करना संभव नहीं है। रात में रोशनी गोले दागे जाते हैं। इस गोले का उजाला इतना है कि जंगल के अंदर हर छोटी बड़ी हलचल को देखा जा सकता हैै। 

Edited By: Rahul Sharma