नवीन नवाज, श्रीनगर।  चार अगस्त मध्य रात्रि को बंद हुई इंटरनेट सेवाओं ने घाटी में आतंकियों का सूचना तंत्र लगभग तबाह कर दिया है। आतंकी पड़ोसी देश या कहीं और बैठे अपने आकाओं से नियमित तौर पर संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। अब आतंकियों और उनके ओवरग्राउंड वर्करों (ओजीडब्ल्यू) को जब भी अपने आकाओं से संपर्क करना हो तो उन्हें सिर्फ अपने सुरक्षित ठिकाने ही नहीं बल्कि जम्मू कश्मीर से भी बाहर निकलना पड़ रहा है। आतंकियों के ओवरग्राउंड वर्कर अब पड़ोसी राज्य पंजाब के पठानकोट या फिर दिल्ली जा रहे हैं। वहां से ओजीडब्ल्यू अपने हैंडलर यानी अपने आकाओं से संपर्क साध रहे हैं।

राज्य में आतंकरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहे राज्य पुलिस एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मोबाइल फोन और इंटरनेट आतंकियों के लिए संजीवनी बन चुकी थी। अब इनके ठप होने से उनकी सांसें अटक गई हैं। विभिन्न सोशल मीडिया एप्स के माध्यम से वह अपने हैंडलरों और अन्य लोगों से संपर्क करते थे। इस कारण वह पकड़ में भी नहीं आते थे। उनके संदेश आसानी से डिकोड नहीं होते थे। मगर अब इंटरनेट बंद होने से आतंकी हताश हैं। वह अपने नेटवर्क से जुड़े लोगों से संपर्क करने में असमर्थ हैं, इसलिए वह खुद या फिर उनके ओवरग्राउंड वर्कर राज्य से बाहर जा रहे हैं, जहां से उन्हें वह आसानी से संपर्क कर पा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के फैसले के पहले ही मोबाइल फोन व इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया था। इसका मकसद किसी भी अप्रिय घटना से निपटने और अफवाहों पर काबू पाना था। इंटरनेट बंद होने से आतंकियों और उनके ओजीडब्ल्यू को अपनी गतिविधियों संचालित करना मुश्किल हो चुका है। वह जम्मू कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय अन्य साथियों और सरहद पार बैठे अपने आकाओं से भी संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। इससे जहां आतंकियों के पास धन की कमी हो चुकी है तो वहीं अन्य साजो सामान की भी दिक्कत पैदा हो गई है।हिमाचल व दिल्ली में पहुंच चुके हैं ओजीडब्ल्यूपुलिस अधिकारी ने बताया कि गत दिनों लखनपुर में पकड़े गए जैश आतंकी उबैद उल इस्लाम सिर्फ इसलिए ही दिल्ली जा रहा था क्योंकि वहां इंटरनेट सुविधा उपलब्ध थी। उसने भी जम्मू कश्मीर की सीमा लांघने के बाद सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर से संपर्क साधा था। सोशल मीडिया पर ही उसे हथियारों की डिलवरी के बारे में बताया गया था। इसके अलावा जम्मू में पकड़े गए जैश माडयूल का सरगना इम्तियाज नेंगरू एक पखवाड़े में तीन-चार बार पठानकोट जा चुका है। जब भी उसे कोई नया संदेश प्राप्त करना हो या कोई सूचना सीमा पार पहुंचानी होती थी तो वह पठानकोट चला जाता था। इम्तियाज की मानें तो उसकी तरह कुछ और ओजीडब्ल्यू पंजाब, हिमाचल और दिल्ली सिर्फ पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलरों से संपर्क करने गए हैं।कश्मीरी ट्रक चालकों का भी लिया जा रहा सहारा पुलिस अधिकारी ने बताया कि जैश माड्यूल के मुताबिक, कश्मीर के कई ट्रक चालकों को भी आतंकी इस्तेमाल कर रहे हैं।

ट्रक चालकों को कहा जाता है कि कश्मीर से सरहद पार रिश्तेदारों से बातचीत नहीं हो रही है। जब पंजाब या दिल्ली पहुंचे तो वाट्सअप से फलां नंबर पर हालचाल बता दें कि यहां सबकुछ ठीक है या फिर फलां परेशानी हैं। इसके अलावा कुछ शब्द भी बताए जाते हैं जो सामान्य तौर पर आम ही होते हैं, लेकिन उनका आतंकी अपने संपर्क के लिए कोड के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

उन्होंने बताया कि जैश माडयूल से मिली जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों ने कई जगह ट्रक चालकों को सचेत कर दिया है कि वह किसी भी व्यक्ति द्वारा बताए गए नंबर पर बिना पुष्टि किए कोई संपर्क न करें। अगर वह देश से बाहर किसी अन्य मुल्क में किसी अन्य व्यक्ति के पड़ोसी या रिश्तेदार के लिए संपर्क करते हैं तो इसकी पुलिस को जरूर दें।

 

Posted By: Preeti jha

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