विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सरकारी नौकरी छोड़ कैंसर पीड़ितों का संवारा भविष्य, जम्मू की सुरूचि शर्मा के समर्पण से 100 से अधिक बच्चे हुए स्वस्थ

Published: Sat, 17 Oct 2026 02:03 PM (IST)

जम्मू की सुरुचि शर्मा ने कैंसर पीड़ित बच्चों की सेवा के लिए अपनी सरकारी शिक्षिका की नौकरी छोड़ दी। उनके ...और पढ़ें

जम्मू की सुरुचि शर्मा (फाइल फोटो)

जम्मू की सुरुचि शर्मा (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सुरुचि शर्मा ने कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए छोड़ी सरकारी नौकरी

  2. इलाज छोड़ने की दर 24% से घटकर 1% से भी कम हुई

  3. जम्मू में 100 से अधिक कैंसर पीड़ित बच्चे हुए स्वस्थ

रोहित जंडियाल, जम्मू। सुनने में आश्चर्य जरूर है लेकिन यह सच है। जम्मू के तालाब तिल्लो की रहने वाली एक युवती कैंसर पीड़ित बच्चों की सेवा में ऐसी जुटी कि उसने सरकारी शिक्षिका की नौकरी तक छोड़ दी। यह उसकी मेहनत और लगन तथा डॉक्टरों के साथ बनाए समन्वय का परिणाम है कि आज जम्मू के श्री महाराजा गुलाब सिंह अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आने वाले बच्चों का इलाज हो रहा है और बहुत से बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ हो रहे हैं।

जम्मू विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में स्नातकोतर सुरूचि शर्मा वर्ष 2016 में गैर सरकारी संगठन कैनकिड्स किड्सकैन के साथ जुड़ी और जम्मू के एसएमजीएस अस्पताल में कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए काम करने लगी।

कैनकिड्स किड्सकैन कैंसर पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को उपचार के दौरान विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान करता है। सुरुचि शर्मा बच्चों के उपचार के साथ-साथ उनके परिवारों की सामाजिक, आर्थिक और मानसिक समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयास करने लगी।

लेकिन चंद महीनों में बच्चों के साथ उसका ऐसा रिश्ता बन गया कि जब वर्ष 2018 में उसकी सरकारी शिक्षिका की नौकरी लगी तो उसने नाैकरी के स्थान पर बच्चों के लिए काम करने को प्राथमिकता दी।

सुरूचि अब जरूरतमंद बच्चों को कैनकिड्स के माध्यम से निश्शुल्क जांच और दवाइयां उपलब्ध करवाने के साथ मरीजों का रिकॉर्ड व्यवस्थित करना, परिवारों से नियमित संपर्क कर फालोअप करना तथा उपचार के प्रति उनकी निरंतरता सुनिश्चित करती है।

यही नहीं जरूरतमंद परिवारों को परिवहन किराया उपलब्ध कराने में सहायता भी दी जाती है ताकि आर्थिक कठिनाइयों के कारण बच्चों का इलाज प्रभावित न हो।

सुरुचि शर्मा बच्चों और उनके परिजनों को व्यक्तिगत तथा आनलाइन काउंसलिंग के माध्यम से भावनात्मक और मनोसामाजिक सहयोग प्रदान करती हैं। वह मरीजों को आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकरण कराने, शिक्षा संबंधी सहायता प्राप्त करने और आवश्यक दस्तावेज तैयार करने में भी मार्गदर्शन देती हैं।

इसके अलावा स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त एवं प्लेटलेट्स की व्यवस्था करने तथा परिवारों को कैंसर के उपचार और देखभाल के प्रति जागरूक करने के लिए जागरूकता सत्र आयोजित करने में भी उनकी अहम भूमिका है।

इलाज छोड़ने की दर में उल्लेखनीय कमी

सुरुचि शर्मा के समर्पित प्रयासों और नियमित फालोअप का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह रहा है कि वर्ष 2014 से पहले बच्चों द्वारा बीच में ही कैंसर का इलाज छोड़ देने की दर 24 प्रतिशत थी, जो अब घटकर एक प्रतिशत से भी कम रह गई है। यह उपलब्धि मरीजों और उनके परिवारों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने, उनकी समस्याओं को समझने और समय पर सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों को दर्शाती है।

शुरू में आई कई चुनौतियां

जब सुरूचि ने कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए काम करना शुरू किया तो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना सेहत नहीं थी।तब इलाज करवाने लिए संसाधनों को जुटाना चुनौती थी।लेकिन उसने कभी हिम्मत नहीं हारी।स्वजनों ने भी उसका पूरा सहयोग दिया।

सुरूचि का कहना है कि जब से वह यहां काम कर रही है, तब से डाक्टरों के अहम योगदान से सौ से भी अधिक बच्चे पूरी तरह से कैंसर को हरा चुके हैं।इनमें अधिकांश ब्लड कैंसर से पीड़ित थे।