'मेरी दुकान से 10 परिवारों का चूल्हा जलता था', जम्मू शिव मार्केट अग्निकांड ने छीनी 35 साल की कमाई; रो पड़े दुकानदार
जम्मू के शिव मार्केट में लगी भीषण आग ने दुकानदारों की जमा पूंजी को राख कर दिया, जिससे सैकड़ों कर्मचारियों ...और पढ़ें

शिव मार्केट में तबाही का मंजर, दुकानदारों की आंखों में आंसू।
HighLights
शिव मार्केट आग से दुकानदारों की वर्षों की मेहनत राख।
सैकड़ों कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर गहरा संकट मंडराया।
प्रभावित दुकानदार प्रशासन से मदद की उम्मीद कर रहे हैं।
जागरण संवाददाता, जम्मू। शिव मार्केट में लगी भीषण आग ने दुकानदारों की वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी को राख में बदल दिया। किसी की 35 साल पुरानी दुकान जलकर खाक हो गई तो किसी के सामने परिवार का भरण-पोषण करने का संकट खड़ा हो गया। अग्निकांड में दुकानों के साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की रोजी-रोटी भी छिन गई है।
एक दुकानदार ने भावुक होते हुए बताया कि उसकी दुकान करीब 35 साल पुरानी थी। आग में सब कुछ खत्म हो गया। उसने कहा कि मेरे पास 10 लड़के काम करते थे। मेरी दुकान से 10 परिवारों की रोजी-रोटी चलती थी। अब सब कुछ तबाह हो गया। हम कुछ भी नहीं बचा पाए।
दुकानदारों का दर्द केवल अपनी दुकान और नुकसान तक सीमित नहीं है। उनके साथ काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों की चिंता भी उन्हें सता रही है।
दुकानें जलीं तो रोजगार पर भी संकट
दुकानदारों के अनुसार, बाजार की प्रत्येक दुकान में औसतन चार से छह लोग काम करते थे, जबकि कुछ दुकानों में कर्मचारियों की संख्या इससे अधिक थी। ऐसे में आग की चपेट में आई 30 से अधिक दुकानों से जुड़े सैकड़ों लोगों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।
दीपावली के पहले उजड़ गया बाजार
अग्निकांड के बाद बाजार में हर तरफ तबाही का मंजर है। दुकानदारों की आंखों में आंसू हैं और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि जिंदगी को दोबारा पटरी पर कैसे लाया जाए। दीपावली नजदीक है, लेकिन जिन परिवारों के लिए यह समय खुशियां और कारोबार लेकर आता था, उनके सामने अब भविष्य की चिंता खड़ी है।
जिंदगीभर की कमाई कुछ ही घंटों में राख
दुकानदारों का कहना है कि उनकी जिंदगीभर की कमाई कुछ ही घंटों में राख हो गई। आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। फिलहाल प्रभावित दुकानदारों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी मदद के लिए आगे आएगा, ताकि वे दोबारा अपना कारोबार शुरू कर सकें और कर्मचारियों के परिवारों की रोजी-रोटी बहाल हो सके।
