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जम्मू में शरद पूर्णिमा कब? घर में जलाएं घी के 21 दीपक; मां लक्ष्मी की कृपा के लिए करें ये उपाय

Published: Sat, 24 Oct 2026 07:00 AM (IST)

Sharad Purnima Kab Hai: शरद् पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस रात खीर चांदनी में रखने, चंद्रमा को देखने ...और पढ़ें

शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान में रखें मेवे वाली खीर। (फाइल फोटो)

शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान में रखें मेवे वाली खीर। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. शरद् पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी, चंद्रमा को देखें।

  2. चंद्रमा की किरणें नेत्रज्योति और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं।

  3. खीर चांदनी में रखकर मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करें।

जागरण संवाददाता, जम्मू। आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ चमकता है। इसे शरदोत्सव, रास पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा और कमला पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री ने शरद पूर्णिमा के धार्मिक महत्व की जानकारी दी।

शरद् पूर्णिमा की तिथि 25 अक्टूबर, रविवार को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर शुरू होकर 26 अक्टूबर, सोमवार को सुबह 9 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। रात्रिकालीन व्रत 25 अक्टूबर और दिवाकालीन व्रत 26 अक्टूबर को होगा।

चंद्रमा की पूजा और खीर रखने की परंपरा 25 अक्टूबर की रात निभाई जाएगी। स्नान, दान और पूजा-पाठ 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 42 मिनट से पहले किए जा सकते हैं।

शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने की क्या धार्मिक मान्यता है?

इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था, ऐसी पौराणिक मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा की किरणों को अमृतमयी और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया गया है। मेवे वाली खीर खुले स्थान पर चांदनी में रखें। अगले दिन स्नान के बाद भगवान को भोग लगाकर तीन ब्राह्मणों या कन्याओं को प्रसाद दें और परिवार में भी बांटें। संभव हो तो खीर चांदी के पात्र में रखें।

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय

मान्यता है कि इस रात जागरण करने वालों पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है। घर में घी के 21 दीपक जलाकर श्रीसूक्त के 21 पाठ करें। मोती या स्फटिक की माला से ‘ॐ सों सोमाय नमः’ जपें और कमलगट्टे की माला से ‘ॐ श्रीं’ मंत्र की 21 मालाएं करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’, कनकधारा स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम और मधुराष्टकम् का पाठ भी करें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत मनोकामना पूर्ति, संतान सुख, संतान की दीर्घायु और कुंवारी कन्याओं को मनवांछित वर प्रदान करता है। इस रात संयम और सात्त्विक आचरण को भी महत्व दिया गया है।