जम्मू, जागरण संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ परीक्षा पर चर्चा के लिए जम्मू के सात बच्चों का चयन हुआ है। इनमें से छह बच्चे सरकारी स्कूलों के हैं। 20 जनवरी को परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में होने जा रहा है।

इसमें देश भर के स्कूलों के बच्चे भाग लेने पहुंच रहे हैं। परीक्षा पर चर्चा के इस तीसरे अध्याय में भाग लेने के लिए जम्मू संभाग से 4569 स्कूली बच्चों ने अपना पंजीकरण करवाया था। शिक्षा निदेशालय की ओर से इसके लिए 85 सुविधा केंद्र बनाए गए थे। बच्चों को चयन के लिए परीक्षा से गुजरना था, जिसमें उन्हें आनलाइन फार्म भरने के बाद पांच चयनित विषयों में किसी एक पर 1500 अक्षरों का निबंध और अधिकतम पांच सौ अक्षरों का प्रधानमंत्री के नाम अपने प्रश्न को लिखना था।

इस परीक्षा में जम्मू के सात बच्चों, जिनमें गवर्नमेंट गल्र्स हायर सेकेंडरी स्कूल मुबारक मंडी की मान्य पंडोह, गवर्नमेंट गल्र्स मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल मुबारक मंडी की तुर्षिका, गवर्नमेंट गल्र्स हायर सेकेंडरी स्कूल नवाबाद की करिश्मा रैना व अवनी पंडिता, गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल ज्यौड़ियां की कनिका शर्मा, प्रजेंटेशन कान्वेंट स्कूल गांधीनगर की संचिता व रणबीर हायर सेकेंडरी स्कूल का छात्र लक्ष्य लंगेह का चयन हुआ। इन बच्चों में संचिता को छोड़ बाकी सभी बच्चे सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी हैं। यह सरकारी स्कूलों के लिए गर्व की बात है।

पूछने को कई सवाल, बस समय मिले : कनिका

गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल ज्यौड़ियां की छात्रा कनिका शर्मा का कहना है कि उसके पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछने को कई सवाल हैं, बस समय मिलना चाहिए। कनिका ने बताया कि उसने पांच विषयों में से एक कृतज्ञता महान है पर निबंध लिखा था। उसने पूछने के लिए सवाल भी इसी विषय पर चुना है। आजकल देखा जाता है कि युवा अपने माता-पिता और शिक्षकों के आभारी नहीं है। माता-पिता खुद भूखे रहकर भी बच्चों को पालते हैं और शिक्षक अपना पूरा ज्ञान बच्चों को पढ़ाने में लगा देते हैं। बच्चा जब कुछ बनता है तो वह न तो माता-पिता का आभार जताता है और न ही शिक्षक को याद करता है। कनिका ने बताया कि वह प्रधानमंत्री मोदी से पूछेंगी कि शिक्षा में ऐसा क्या किया जाए कि युवा अपने माता-पिता और शिक्षकों के आभारी बनें। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि एक विषय ही ऐसा रखा जाए जो बच्चों को कृतज्ञ बनने के लिए प्रेरित करे।

परीक्षा में लिखने को सिर्फ ढाई घंटे ही क्यों :

इसके अलावा मेरा दूसरा सवाल परीक्षा में समय को लेकर होगा। हम पूरे वर्ष खूब मेहनत से पढ़ते हैं, लेकिन लिखने को मिलते हैं सिर्फ दो से ढाई घंटे। क्या कुछ ऐसा नहीं हो सकता कि बच्चों को परीक्षा में मर्जी का समय दिया जाए ताकि जो उसने एक वर्ष पढ़ा है, उसे अच्छी तरह से सामने रख सके। परीक्षा में समय अवधि तय न हो क्योंकि हम अपनी पूरी बात नहीं रख पाते।

इंटरनेट बंद होने से परेशानी भी बताएंगी: कनिका जम्मू कश्मीर में इंटरनेट सेवा बाधित किए जाने से विद्यार्थियों को होने वाली परेशानियों को भी प्रधानमंत्री के सामने रखना चाहती हैं। उसका कहना है कि पता नहीं उसे इतने सवाल पूछने का मौका मिलेगा भी या नहीं। उनका कहना है कि वह कार्यक्रम में भाग लेने को बहुत उत्सुक है। उसका इसमें चयन होना किसी सपने के सच होने से कम नहीं है।

  • जम्मू कश्मीर में इंटरनेट सेवा बाधित रहने के बावजूद पूरे संभाग से 4569 बच्चे इस के लिए पंजीकृत हुए। शिक्षा निदेशालय ने बच्चों की सुविधा के लिए केंद्र स्थापित किए, जहां बच्चों ने परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अपनी प्रतिभा दिखार्इा। इस कार्यक्रम में नौवीं से 12वीं के बच्चे भाग लेंगे। - अनुराधा गुप्ता, स्कूल शिक्षा निदेशक जम्मू 

Posted By: Rahul Sharma

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