श्रीनगर, जेएनएन। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री, नेशनल कांफ्रेंस के राज्य प्रधान और मौजूदा सांसद डॉ फारूक अब्दुल्ला से मिलने आज श्रीनगर पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने डाॅ फारूक की मौजूदगी में उनके निवास के बाहर खड़े पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह आज बहुत खुश हैं क्योंकि साढ़े सात महीने के बाद वह डाॅ फारूक अब्दुल्ला से मिले हैं। इसी के साथ उन्होंने हैरानगी जाहिर करते हुए कहा कि मुझे अभी भी समझ में नहीं आया कि फारूक घर में नजरबंद क्यों थे। अनुच्छेद 370 को हटाने से पहले राज्य के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित सैकड़ों राजनीतिज्ञों को हिरासत में ले लिया गया था। 

दिल्ली से आज दोपहर बाद श्रीनगर पहुंचे आजाद एयरपोर्ट से सीधा डॉ फारूक अब्दुल्ला से मिलने गुपकार स्थित उनके अवास पर पहुंचे। आजाद ने डाॅ अब्दुल्ला को रिहार्इ की बधाइ दी। इस बाद दोनों के बीच करीब आधा घंटे तक बातचीत हुर्इ।

आजाद को आज ही दिल्ली रवाना होना था इसीलिए बातचीत के बाद डाॅ अब्दुल्ला आैर आजाद घर से बाहर आए आैर वहां उनसे बात करने के लिए इंतजार कर रहे पत्रकारों से मिले। कांग्रेस नेता ने पत्रकारों से कहा कि नेताओं को इस तरह हिरासत में रखने से कश्मीर में प्रगति नहीं होगी। जम्मू-कश्मीर में विकास चाहिए तो नेताओं को छोड़ना होगा, रिहा करना होगा। राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करनी होगी। यहां चुनाव होने चाहिए और जम्मू-कश्मीर के लोग जो करना चाहते हैं, वे करें। 

आजाद ने कहा कि तीन वर्षों तक किसी भी परियोजना पर काम नहीं किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में बेरोजगारी है। पर्यटन, हस्तकला के साथ आयात-निर्यात भी प्रभावित हुए हैं। जम्मू में भी परिवहन, उद्योग, लघु उद्योग प्रभावित हुए हैं। जम्मू और कश्मीर राज्य को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने का निर्णय जम्मू और कश्मीर के लोगों का अपमान है। इसे निरस्त करना होगा। जम्मू और कश्मीर को फिर से राज्य घोषित किया जाना चाहिए।

इस बाद गुलाम नबी आजाद फिर से एयरपोर्ट के लिए निकल गए जहां से वह शाम 4.30 बजे की फ्लाइट से वापस दिल्ली रवाना हो गए। सनद रहे कि करीब सात महीने से हिरासत में रखे गए जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं मौजूदा सांसद डॉ फारूक अब्दुल्ला को कल रिहा कर दिया गया था। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने गत शुक्रवार को पहले डॉ फारूक पर लगाया गया जन सुरक्षा अधनियम (पीएसए) तत्काल प्रभाव से हटाया और उसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था। 

Posted By: Rahul Sharma

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