श्रीनगर, नवीन नवाज। सुरक्षा एजेंसियों ने जिहादी संगठनों और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को अब उनके हथियार से मात देने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जाएगा। विभिन्न इस्लामिक विद्वानों, उलेमाओं के वीडियो व भाषण मुस्लिम जिहादी संगठनों की पोल खोलेंगे। ये लोग भटके युवाओं में भरे जिहादी जहर को खत्म करने का काम करेंगे।

सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने पाक कुरान की रोशनी में मानव कल्याण, शांति, राष्ट्रभक्ति जैसे विषयों पर वीडियो, भाषण के प्रचार प्रसार का फैसला किया है। यह उलेमा कुरान की व्याख्या करते हुए बताएंगे कि जिहादी तत्व जिस जिहाद की बात करते हैं, उसका रास्ता सही नहीं है। वीडियो में जिहादी संगठनों द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों, इस्लाम की रोशनी में गैर इस्लामिक भी साबित करेंगे। योजना के तहत न सिर्फ कश्मीर में बल्कि घाटी से बाहर के कई नामी इस्लामिक विद्वानों और उलेमाओं की भी मदद ली जाएगी।

सभी को इंटरनेट पर यू टयूब, पोडकास्ट, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम समेत विभिन्न सोशल साइटों के इस्तेमाल की जानकारी देते हुए उन्हें बताया जाएगा कि वे कैसे अपनी बात को इन माध्यमों के जरिए दुनिया तक पहुंचा सकते हैं। यह उलेमा उर्दू, पंजाबी, कश्मीरी और पश्तो के अलावा अंग्रेजी भी अपने व्याख्यान तैयार कर सोशल मीडिया पर अपलोड करेंगे। अत्याचारों की वीडियो फुटेज के साथ ही कुरान में कत्लोगारत के खिलाफ दिए संदेश यू टयूब पर चलाए जाएंगे। यह उलेमा जिहादी संगठनों द्वारा विभिन्न विषयों पर जारी भाषणों, वीडियो का अध्ययन करते हुए उन्हें गलत साबित करने के लिए पाक कुरान की रोशनी में संबंधित मुद्दों पर विस्तार से जानकारी देने वाले अपने वीडियो जारी करेंगे।

सुरक्षा एजेंसियों की योजना को अंतिम रूप देगा गृहमंत्रालय: केंद्रीय गृहमंत्रालय ने सभी संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को पूरी कार्ययोजना को अंतिम रूप देते हुए उस पर जल्द अमल करने के लिए कहा है। कुछ उलेमाओं को यू टयूब पर चैनल तैयार करने के लिए कहा है। वादी में वर्ष 2014 के बाद से हुई आतंकी संगठनों में स्थानीय युवकों की भर्ती, वादी में हुई विभिन्न आतंकी वारदातों के अध्ययन के बाद कार्ययोजना का खाका तैयार किया। अधिकारियों ने बताया कि आतंकी संगठनों और पाक की खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने जम्मू कश्मीर में स्थानीय युवकों में धर्मांध जिहादी मानसिकता पैदा करने, उन्हें जिहादी संगठनों का हिस्सा बनने के लिए इंटरनेट के हर माध्यम का इस्तेमाल किया है।

कई आतंकी संगठनों ने किया है युवाओं को गुमराह: कश्मीर में कुछ वर्षों में जो आतंकी और ओवरग्राउंड वर्कर पकड़े गए हैं,उन्होंने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया है कि वह लश्कर, जैश,अल-बदर जैसे संगठन के सरगनाओं द्वारा सोशल मीडिया पर जारी किए जाने वाले वीडियो, भाषणों व जिहादी सामग्री से प्रभावित होकर ही आतंकवाद के रास्ते पर चले हैं। इनमें कइयों ने अजहर मसूद, मौलाना मक्कई और मलेशिया में फरारी काट रहे जाकिर नायक के भाषणों का भी जिक्र किया है।

जम्मू कश्मीर में सोशल मीडिया पर पाबंदी का असर: अधिकारियों के अनुसार वादी में अगस्त के बाद से अगर स्थानीय युवकों की आतंकी संगठनों में भर्ती के मामले कम हुए हैं या आतंकी वारदातों में कमी आई है तो उसमें सोशल मीडिया पर पाबंदी का बड़ा योगदान है। वादी में जगह जगह जिहादी भाषण सुनाने वाले मौलवी भी गायब हैं। सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जिहादी संगठनों व पाक खुफिया एजेंसी को उसकी भाषा मे जवाब देने का फैसला किया है। मुस्लिम युवाओं में जिहादी मानसिकता के प्रचार को रोकने के लिए मुस्लिम समुदाय के उलेमाओं और विद्वानों का सहयोग जरूरी है। 

Posted By: Rahul Sharma

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