पूर्वज की मृत्यु तिथि नहीं पता? सर्वपितृ अमावस्या के दिन करें श्राद्ध; जम्मू के ज्योतिषाचार्य से जानें इसका महत्व
Sarvapitri Amavasya Kab hai: 10 अक्तूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या है। यह दिन उन पितरों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी ...और पढ़ें

पूर्वजों की मृत्यु तिथि नहीं मालूम तो 10 अक्टूबर को करें श्राद्ध।
HighLights
10 अक्तूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या, पितृ विसर्जन का दिन।
श्राद्ध पक्ष का समापन भी इसी पावन तिथि पर होगा।
अज्ञात तिथि वाले पितरों का श्राद्ध इस दिन विशेष महत्व रखता है।
जागरण संवाददाता, जम्मू। पितृ पक्ष में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु की तिथि पता नहीं होती या किसी कारण से तय तिथि पर उनका श्राद्ध नहीं हो पाता। इस वर्ष पितृ विसर्जन अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को है।
श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या यानी पितृ विसर्जन अमावस्या, सर्वपितृ श्राद्ध और श्राद्ध पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को होगा। यह दिन उन सभी पितरों के लिए खास माना जाता है, जिनकी मृत्यु की तिथि पता नहीं है या किसी वजह से तय तिथि पर उनका श्राद्ध नहीं हो सका।
मृत्यु तिथि न पता हो तो अमावस्या का दिन महत्वपूर्ण
महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि जिस तिथि को किसी परिजन का देहांत हुआ हो। उसी तिथि को पितृ पक्ष में उनका श्राद्ध करना शास्त्रसम्मत परंपरा मानी जाती है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो ऐसे पितरों का श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जाता है। इसी कारण पितृ विसर्जन अमावस्या को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
पितृ विसर्जन का धार्मिक महत्व
महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि पितृ विसर्जन अमावस्या केवल श्राद्ध पक्ष की समाप्ति का दिन नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और पारिवारिक संस्कारों को स्मरण करने का अवसर भी है। इस दिन विधिपूर्वक श्राद्ध एवं तर्पण करने के साथ पितरों से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए आशीर्वाद की प्रार्थना करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पितरों के प्रति श्रद्धा केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके संस्कारों, आदर्शों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
