बेटियों की रामलीला... जम्मू में बच्चियों ने संभाली कमान, अभिनय के साथ निर्देशन-लाइटिंग की जिम्मेदारी भी निभा रहीं
जम्मू में रजनी चंदा के निर्देशन में बेटियों द्वारा प्रस्तुत रामलीला नवरात्र में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यह ...और पढ़ें

सैनिक कालोनी में नवरात्र में हो रहे आयोजन में 30 से 40 बेटियां दिखा रही दम।
HighLights
रजनी चंदा के निर्देशन में बेटियों की रामलीला।
30-40 बेटियां निभा रहीं रामायण के पात्र।
नारी सशक्तीकरण और नेतृत्व क्षमता का संदेश।
अशोक शर्मा, जम्मू। नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के बीच सैनिक कालोनी की रामलीला बेटियों की प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता का संदेश दे रही है। श्री रामलीला क्लब सैनिक कालोनी में बेटियां रामायण के पात्रों को जीवंत करने के साथ मंच से जुड़ी कई जिम्मेदारियां भी निभाती हैं। रामलीला के कलाकारों से लेकर निर्देशन और रोशनी की व्यवस्था तक की कमान उनके हाथ में रहती है।
महिला निर्देशक रजनी चंदा के मार्गदर्शन में करीब 30 से 40 बच्चियां अभिनय करती हैं। संवाद अदायगी और आत्मविश्वास से वे दर्शकों को प्रभावित करती हैं। उनके लिए रामलीला में भाग लेना केवल एक भूमिका निभाना नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं को पहचानने और निखारने का अवसर है।
नवरात्र के दौरान प्रतिदिन आरती में भी बच्चियां हिस्सा लेती हैं। श्रद्धा से आरती करने के बाद वे रामायण के प्रसंगों में अभिनय करती हैं। इससे धर्म, संस्कृति और नारी सशक्तीकरण का सुंदर मेल दिखाई देता है।
बच्चियां निभाती हैं अलग-अलग भूमिकाएं
राम के बाल जीवन से लेकर फुलवारी जैसे प्रसंगों तक वे अलग-अलग भूमिकाएं निभाती हैं। अभिनय के साथ पात्रों के भाव और प्रसंग की समझ भी उनके प्रदर्शन में झलकती है। रामलीला के जरिए उन्हें भगवान राम के आदर्शों, मर्यादा, कर्तव्य और जीवन मूल्यों को जानने का अवसर मिलता है।
मंचन के बाद आधी रात तक चलती समीक्षा बैठक
मंचन रात करीब 12 बजे संपन्न होने के बाद दर्शक घर लौट जाते हैं, लेकिन बच्चियों की समीक्षा बैठक शुरू होती है। वे चर्चा करती हैं कि किस दृश्य में कमी रही, किस संवाद को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है और अगले दिन प्रस्तुति कैसे बेहतर हो। बच्चियां एक-दूसरे को सुझाव देती हैं और अपनी गलतियों पर भी खुलकर बात करती हैं।
कई को अपने संवादों के साथ अन्य कलाकारों के लंबे संवाद भी याद हैं। यह उनकी मेहनत और रामलीला के प्रति समर्पण दिखाता है। ये बैठकें उनके लिए नेतृत्व और टीमवर्क सीखने का अवसर भी हैं।
बच्चों को सिखाना है जरूरी
श्री रामलीला क्लब सैनिक कालोनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्लब के संस्थापक सदस्य राकेश चौधरी ने बताया कि क्लब का उद्देश्य बच्चों को रामायण से परिचित कराने और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ उन्हें अभिनय, संवाद अदायगी, अनुशासन और सामूहिक कार्य सिखाना है। मंच पर संवाद बोलने से आत्मविश्वास बढ़ता है और अभ्यास से अपनी कमियों को सुधारने की प्रेरणा मिलती है।
पर्दा गिरने के बाद भी दिखता है नेतृत्व का उजाला
सैनिक कालोनी की रामलीला में बेटियां एक दिन रोशनी की व्यवस्था से लेकर निर्देशन तक की जिम्मेदारी संभालकर दिखाती हैं कि अवसर और विश्वास मिलने पर वे हर भूमिका निभा सकती हैं। रात को मंच का पर्दा गिरता है, लेकिन बच्चियों के भीतर जगता आत्मविश्वास, संस्कार और नेतृत्व का उजाला उनके साथ बना रहता है।'
