विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अब लद्दाख में भी खिलेंगे केसर के फूल, बंजर जमीन पर पहली बार रोपे गए ईरानी बल्ब; किसानों की होगी चांदी

Published: Sat, 03 Oct 2026 06:00 AM (IST)

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए पहली बार केसर की खेती का ...और पढ़ें

खेत में पहुंचे एलजी विनय कुमार सक्सेना। फोटो जागरण

खेत में पहुंचे एलजी विनय कुमार सक्सेना। फोटो जागरण

राज्य ब्यूरो, जम्मू। पुष्प कृषि को बढ़ावा देकर किसान को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए अब केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में केसर के फूल भी उगेंगे। बर्फीले रेगिस्तान में पहली बार केसर की खेती का प्रयोग शुरू किया गया है।

लेह में करीब तीन महीने पहले तक बंजर पड़ी भूमि के लगभग 4,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में प्रीमियम गुणवत्ता वाले ईरानी केसर के करीब 800 किलोग्राम (लगभग 90 हजार) बल्ब लगाए गए हैं। यह पहल लद्दाख में उच्च मूल्य वाली कृषि फसलों के विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग के रूप में की जा रही है।

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाकर किसानों और युवाओं के लिए आय के नए अवसर पैदा करना है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लगाए गए केसर के बल्बों से अच्छी मात्रा में केसर उत्पादन की उम्मीद है। केसर उगाने का यह प्रयोग लेह के स्पितुक फरका स्थित कमांड एरिया में किया जा रहा है।

बंजर भूमि को उपयोगी बनाना ही हमारा प्रयास- एलजी सक्सेना

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि लद्दाख की उंचाई व विशिष्ट कृषि-जलवायु परिस्थितियों में केसर जैसी उच्च मूल्य वाली फसल की शुरुआत स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की व्यापक संभावनाएं रखती है। उन्होंने कहा कि यह प्रयोग इस धारणा को भी बदल सकता है कि लद्दाख में केसर की खेती संभव नहीं है व बंजर या खराब हो चुकी भूमि को दोबारा उत्पादक नहीं बनाया जा सकता।

उपराज्यपाल ने बताया कि हमारा प्रयास क्षरित व बंजर भूमि को उत्पादक बनाकर किसानों के लिए नए अवसर पैदा करना है। केसर की शुरुआत फसल विविधीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण प्रयोग है, जो प्रीमियम मूल्य वाली फसल के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने का नया रास्ता खोल सकता है।

उन्होंने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारंपरिक कृषि पद्धतियों में विविधीकरण के जरिए किसानों की आर्थिक स्थिरता व युवाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के दृष्टिकोण के अनुरूप है। लद्दाख प्रशासन इससे पहले लेह में लिलियम व ग्लैडियोलस की बड़े पैमाने पर खेती का सफल प्रयोग कर चुका है। इससे किसानों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सामने आए हैं।

चार तालाबों की संयुक्त जल भंडारण क्षमता करीब 2.4 करोड़ लीटर

केसर की खेती वाला क्षेत्र लेह में उस 800 एकड़ भूमि का हिस्सा है जिसका पुनरुद्धार किया जा रहा है। इस भूमि को निकटवर्ती इगू-पेह सिंचाई नहर से पानी पहुंचाकर पुनर्जीवित किया जा रहा है। नहर को हाल ही में बहाल कर दोबारा चालू किया गया है।

उपराज्यपाल के निर्देश पर नहर के अनुपयोगी अथवा अतिरिक्त पानी को बंजर भूमि की ओर मोड़ा जा रहा है, जिससे मिट्टी में नमी बढ़ाकर उसे खेती के लिए उपयुक्त बनाया जा सके। यह क्षेत्र प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत विकसित किए गए चार जलाशयों के भी निकट है। इन चार तालाबों की संयुक्त जल भंडारण क्षमता करीब 2.4 करोड़ लीटर है।

केसर भारत में एक उच्च मूल्य वाली फसल है और इसकी बाजार में मजबूत मांग है। देश में केसर का लगभग 90 प्रतिशत उत्पादन जम्मू-कश्मीर में होता है। ऐसे में लद्दाख में इसकी खेती फिलहाल पायलट आधार पर शुरू की गई है, ताकि क्षेत्र की जलवायु में इसकी उपयुक्तता और आर्थिक संभावनाओं का आकलन किया जा सके।