लद्दाख में अधिकारियों के तबादले का बदला नियम, सिविल सर्विसेज बोर्ड में मुख्य सचिव को मिली कमान
लद्दाख प्रशासन ने सिविल सर्विसेज बोर्ड (सीएसबी) के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव किया है, जिसमें उपराज्यपाल के सलाहकार की जगह अब मुख्य सचिव को शामिल किया गया है।
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लद्दाख में प्रशासनिक फेरबदल की नई व्यवस्था।
HighLights
लद्दाख सिविल सर्विसेज बोर्ड के ढांचे में बड़ा बदलाव।
मुख्य सचिव को अब बोर्ड में मिली अहम जिम्मेदारी।
तबादलों में पारदर्शिता, उपराज्यपाल अंतिम निर्णय लेंगे।
संवाद सहयोगी, लेह। लद्दाख प्रशासन ने सिविल सर्विसेज बोर्ड (सीएसबी) के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव किया है। इसके तहत उपराज्यपाल के सलाहकार की जगह मुख्य सचिव तथा प्रधान सचिव के स्थान पर आयुक्त/सचिव को शामिल किया गया है।
लद्दाख के महाप्रशासनिक विभाग के अनुसार यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। लद्दाख प्रदेश में महाप्रशासनिक विभाग के एक आदेश में 13 अगस्त 2024 को जारी उस आदेश में बदलाव किया गया है, जिसके माध्यम से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में सिविल सर्विसेज बोर्ड का गठन हुआ था।
अलबत्ता, बोर्ड के कामकाज से संबंधित शर्तों व नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बोर्ड की अहम भूमिका प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों, तैनातियों और सेवा संबंधी मामलों में सिफारिशें करने की है। इसके दायरे में अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के अलावा जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा और वन सेवा के अधिकारी, जम्मू-कश्मीर से प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी तथा गैर-प्रशासनिक सेवाओं के विभागाध्यक्ष भी शामिल हैं।
संशोधित व्यवस्था के तहत मुख्य सचिव बोर्ड में पहले क्रम पर और आयुक्त/सचिव दूसरे क्रम पर रहेंगे। बोर्ड में गृह तथा वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण विभाग के प्रतिनिधियों के साथ सामान्य प्रशासन विभाग के प्रशासनिक सचिव को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। पुलिस और वन सेवाओं से जुड़े मामलों में संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों की अलग-अलग व्यवस्था भी है। तबादलों और तैनातियों पर सिफारिश करते समय बोर्ड को अधिकारियों के निर्धारित न्यूनतम कार्यकाल का ध्यान रखना होगा।
कार्यकाल पूरा होने से पहले तबादले की सिफारिश किए जाने पर उसके आधारों की समीक्षा और कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना आवश्यक है। लद्दाख के उपराज्यपाल बोर्ड की सिफारिशों पर अंतिम निर्णय लेने वाले सक्षम प्राधिकारी हैं। वह सिफारिशों से अलग निर्णय ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए लिखित कारण दर्ज करना अनिवार्य है।
बोर्ड का गठन सर्वोच्च न्यायालय के 31 अक्टूबर 2013 के टीएसआर सुब्रमण्यम बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले के अनुरूप किया गया था। न्यायालय ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसे बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए थे, ताकि अधिकारियों के तबादलों और सेवा संबंधी फैसलों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
