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कहां से आए, कैसे बसे और अब क्यों हटाए जा रहे? जम्मू में रोहिंग्याओं पर बड़े सवाल, 101 मामलों ने बढ़ाई चिंता

Published: Fri, 18 Sep 2026 05:47 AM (IST)

जम्मू में रोहिंग्या नागरिकों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है, जहां कभी उन्हें बसाया गया था। मानव तस्करी, ...और पढ़ें

मानव तस्करी, नशीले पदार्थ, अवैध दस्तावेजों से जुड़े मामलों ने चिंता बढ़ाई। (फाइल फोटो)

मानव तस्करी, नशीले पदार्थ, अवैध दस्तावेजों से जुड़े मामलों ने चिंता बढ़ाई। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जम्मू में रोहिंग्या नागरिकों पर प्रशासनिक कार्रवाई अब हुई तेज।

  2. मानव तस्करी, नशीले पदार्थ जैसे 101 मामले दर्ज किए गए।

  3. अवैध रूप से रह रहे 14 हजार रोहिंग्याओं की पहचान की गई।

दिनेश महाजन, जम्मू। करीब दो दशक पहले जम्मू में रोहिंग्या नागरिकों की बढ़ती मौजूदगी को लेकर जिस व्यवस्था पर सवाल उठते रहे, अब उसी आबादी को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। वर्ष 2000 के मध्य दशक में जम्मू में रोहिंग्या नागरिकों के बसने का सिलसिला बढ़ा। विभिन्न रिपोर्टों और सुरक्षा एजेंसियों की जांच में समय-समय पर यह बात सामने आती रही कि इनमें से बड़ी संख्या बिना वैध दस्तावेजों के जम्मू पहुंची और यहां अलग-अलग इलाकों में बस गई। उस दौर में एजेंटों के सक्रिय होने के आरोप लगे।

आरोपों के मुताबिक कुछ गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय लोगों की मदद से इन परिवारों को जम्मू में रोजगार, बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य का भरोसा देकर लाया गया। जम्मू पहुंचने के बाद उन्हें मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल इलाकों के आसपास किराये या अस्थायी ठिकानों पर बसाया गया।

नरवाल, सुजवां, बठिंडी और चौआदी समेत कई क्षेत्रों में समय के साथ इनकी बस्तियां विकसित होती चली गईं। इस बीच सामने आए सरकारी आंकड़ों ने इस पूरे मामले के क्राइम एंगल को भी उजागर किया है।

जम्मू संभाग में रोहिंग्या नागरिकों से जुड़े 101 मामले दर्ज

अगस्त 2026 में जम्मू आए हाई लेवल कमेटी आन डेमोग्राफिक चेंजेज के समक्ष रखे गए आंकड़ों के मुताबिक जम्मू संभाग में रोहिंग्या नागरिकों के खिलाफ 101 मामले दर्ज हैं। इन मामलों में 179 पुरुष और 21 महिलाएं शामिल हैं।

इनमें मानव तस्करी, नशीले पदार्थ और अवैध दस्तावेजों से जुड़े मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। पूरे जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या नागरिकों से जुड़े दर्ज मामलों की संख्या 117 बताई गई है।

शुरुआती दिनों में भोजन और आर्थिक मदद होती थी

वर्ष 2004 से 2014 तक स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगते रहे कि जम्मू पहुंचने वाले रोहिंग्या नागरिक परिवारों को शुरुआती दिनों में भोजन और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती थी। कुछ क्षेत्रों में बच्चों की इस्लामिक धार्मिक शिक्षा के लिए मदरसों की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आती रही।

हालांकि, ऐसी गतिविधियों और इनके पीछे किसी संगठित साजिश के आरोपों की पुष्टि प्रत्येक मामले में अलग-अलग जांच के आधार पर ही की जा सकती है। रोहिंग्या नागरिकों के जम्मू पहुंचने के लिए उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों से रोजगार का लालच देकर जम्मू लाया गया।

बिहार और अन्य राज्यों से ट्रेन के माध्यम से लोगों को जम्मू लाए जाने की बातें जांच एजेंसियों के सामने आती रही हैं। धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई और कई स्थानों पर छोटे-छोटे समूहों के रूप में बस्तियां विकसित हो गईं।

युवतियों की तस्करी और जबरन निकाह के मामले भी सामने आए

रोहिंग्या युवतियों को जम्मू लाकर उनके निकाह करवाने से जुड़े गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। पुलिस के विभिन्न थानों में दर्ज मामलों में मानव तस्करी और नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर अथवा उनकी खरीदकर जम्मू लाने के आरोपों की जांच हुई है।

आरोप है कि कुछ युवतियों को जम्मू संभाग के डोडा, किश्तवाड़, पुंछ और राजौरी समेत अन्य क्षेत्रों में ले जाकर निकाह करवाए गए। हाल के वर्षों में प्रशासन ने जम्मू में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया तेज की।

पहचान किए गए रोहिंग्या नागरिकों को कठुआ में बनाए गए होल्डिंग सेंटर में रखने की कार्रवाई की गई। इसी प्रक्रिया के दौरान ऐसी युवतियों की भी पहचान किए जाने की बात सामने आई, जिन्हें कथित तौर पर निकाह के नाम पर जम्मू लाया गया था। पुलिस ने कुछ मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की।

जम्मू में रोहिंग्या आबादी को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट में करीब 14 हजार अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या नागरिकों की मौजूदगी का दावा किया गया है। वहीं, नरवाल क्षेत्र में इनकी संख्या करीब सात हजार बताए जाने की बात भी सामने आई है। प्रशासन की ओर से अब उन जमीन मालिकों पर दबाव बनाया जा रहा है, जिनकी भूमि पर अवैध रूप से झुग्गियां या अस्थायी ढांचे बनाकर लोग रह रहे हैं।

अब शरण देने वालों पर भी नजर

जिन स्थानों से रोहिंग्या नागरिकों को हटाया जा रहा है, वहां उनके सामने दोबारा ठिकाना बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को कानून का उल्लंघन करते हुए दोबारा बसाने या उन्हें शरण देने वालों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

करीब दो दशक में जम्मू में रोहिंग्या नागरिकों की मौजूदगी को लेकर परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। जहां कभी इनके बसने और रोजगार की व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर सहयोग मिलने के आरोप लगते रहे, वहीं अब प्रशासन का जोर पहचान, दस्तावेजों के सत्यापन, अवैध कब्जे हटाने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने पर है।