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जम्मू में रोहिंग्याओं को जमीन किसने दी, प्रशासन को खबर क्यों नहीं? नरवाल में कार्रवाई के बाद उठे बड़े सवाल

Published: Thu, 17 Sep 2026 07:15 AM (IST)

जम्मू के नरवाल स्थित बर्मा कॉलोनी से रोहिंग्या समुदाय को हटाया गया है, जिससे उनकी और बांग्लादेशियों की अवैध मौजूदगी ...और पढ़ें

जम्मू के नरवाल में स्थित बर्मा कॉलोनी को खाली कराया गया है। (फाइल फोटो)

जम्मू के नरवाल में स्थित बर्मा कॉलोनी को खाली कराया गया है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. नरवाल की बर्मा कॉलोनी से रोहिंग्या समुदाय को हटाया गया।

  2. जम्मू में रोहिंग्या-बांग्लादेशियों की अवैध मौजूदगी पर सवाल।

  3. सुरक्षा एजेंसियों को अवैध बसावट के तंत्र की पहचान करनी चाहिए।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। शरदकालीन राजधानी जम्मू के बाहरी क्षेत्र नरवाल में स्थित बर्मा कॉलोनी, जहां रोहिंग्या समुदाय के लोग रह रहे थे, को खाली कराया गया है। यह कार्रवाई प्रशासन ने स्वयं की है, जमीन के मालिकों ने कराई है या फिर पिछले माह प्रदेश में जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़े मुद्दों का जायजा लेने आई केंद्रीय टीम के दौरे का इसका कोई संबंध है, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

हालांकि एक बात पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है कि जम्मू प्रांत, विशेषकर जम्मू शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

इनकी मौजूदगी को लेकर समय-समय पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों की ओर से कई बार इन्हें जम्मू-कश्मीर से बाहर भेजने की मांग की गई है, जिसके कारण यह मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है।

ये लोग जम्मू में आकर बसते कैसे हैं? 

सरकार ने जम्मू में अवैध रूप से बसे रोहिंग्या लोगों की पहचान, हिरासत और प्रत्यावर्तन के उद्देश्य से होल्डिंग सेंटर भी बनाया है। हालांकि अब तक कितने लोगों को वापस भेजा गया है और कितने लोगों की पहचान या सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हुई है, इस संबंध में स्पष्ट और नियमित सार्वजनिक जानकारी सामने आना जरूरी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सुरक्षा एजेंसियां इनकी मौजूदगी को लेकर चिंता जताती हैं और स्थानीय लोग भी समय-समय पर विरोध दर्ज कराते हैं, तो फिर ये लोग जम्मू में आकर बसते कैसे हैं? उन्हें जमीन कौन उपलब्ध कराता है? झुग्गियां या दुकानें बनाने की अनुमति किस स्तर पर मिलती है?

क्या जमीन मालिक या संबंधित व्यक्ति स्थानीय पुलिस चौकी को इसकी सूचना देता है? यदि सूचना दी जाती है तो अवैध निर्माण या बसावट को समय रहते क्यों नहीं रोका जाता और यदि सूचना नहीं दी जाती तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती?

प्रशासन से जवाब मांगने की जरूरत

इन सवालों का जवाब तलाशना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। अवैध घुसपैठ, अनधिकृत बसावट और संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए पुलिस, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है। जम्मू जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अनधिकृत बसावट को बढ़ावा देने वाले तंत्र की पहचान कर उसे समाप्त करना जरूरी है।