कठुआ, जागरण संवाददाता । बेटियां आज किसी से कम नहीं हैं। हर क्षेत्र में बेटियां अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। ऐसी बेटियां न केवल अपनी सफलता की इबारत खुद लिख रही हैं, बल्कि दूसरी बेटियों को भी जिंदगी में कुछ करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। बेटियों में जब कुछ कर गुजरने का हौसला बुलंद हो तो परिवार की माली हालत भी आड़े नहीं आती। ऐसी ही बेटी कठुआ की रीना जसरोटिया भी हैं, जिनके लिए परिवार की आर्थिक कमजोरी भी आड़े नहीं आ रही है। रीना न केवल एक उम्दा खिलाड़ी हैं, बल्कि दुश्मनों से लडऩे का भी जज्बा रखती हैं, जिसके लिए वह भारतीय सेना में भर्ती होने की तैयारियां कर रही हैं।

इंटर यूनिवर्सिटी जूडो, रेस्लिंग  में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं 

कठुआ के कंडी क्षेत्र के गांव डिंगा अंब की रीना जसरोटिया का पिता बस चालक हैं और माता गृहणी हैं। परिवार की आय पिता के सहारे ही है। बचपन से ही सेना में भर्ती होने का सपना संजोए रीना खेलों के जरिए अपने शरीर को फिट रख रही है। डिग्री कॉलेज कठुआ की आलराउंडर रही खिलाड़ी रीना जूड़ो, रेस्लिंग  और एथलेटिक में अपनी प्रतिभा का लोहा भी मनवा चुकी है। कॉलेज की तरफ से तीन बार रेस्लिंग की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी हैं। जम्मू कश्मीर में इंटर यूनिवर्सिटी मुकाबले में जूडो व रेस्लिंग  में 45 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। इसके अलावा सेना द्वारा गत वर्ष भद्रवाह में करवाए गए यूथ इंडिया मुकाबले में जम्मू कश्मीर स्तर पर रीना पांच हजार मीटर दौड़ में प्रथम स्थान पाकर गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं।

घर से 40 किलोमीटर दूर हो रही तैयारी

डिग्री कॉलेज कठुआ की छात्रा रीना ग्रेजुएशन के बाद सेना में जाने का सपना संजोए हुए है। अपनी शिक्षा को जारी रखने के साथ घर से 40 किलोमीटर दूर कठुआ में हॉस्टल में रहकर अपनी सेना में भर्ती होने की तैयारियों का अंजाम दे रही है। रीना कहती है कि जिस तरह के जम्मू कश्मीर में हालात हैं। दुश्मन आए दिन अपनी नापाक हरकत से अशांति फैला रहा है। मैं उसे एक दिन मुंहतोड़ जवाब दूंगी। मैंने बचपन से ही सेना में जाने का सपना संजोया था और उसे पूरा करने के लिए लगातार तैयार कर रही हूं। अगर सेना में भर्ती हो गई तो दुश्मन को उसी की भाषा में जवाब दूंगी।

रीना जसरोटिया कॉलेज में खेलकूद के लिए युवाओं की आइकान है। उसने तीन वर्षों में अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन करने साबित कर दिया है कि आर्थिक हालात बुलंद इरादों में आड़े नहीं आते हैं। मंजिल पर जाने का इरादा मजबूत होना चाहिए, सफलता स्वयं चल कर आती है।

-बलविंद्र सिंह, फिजिकल डायरेक्टर, कठुआ कॉलेज

 

Posted By: Rahul Sharma

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