वेदवती का श्राप बना रावण के विनाश का कारण, सीता के रूप में हुआ पुनर्जन्म; जम्मू में डोगरी रामलीला ने खींचा ध्यान
जम्मू में नवरात्र के दौरान रामलीला का मंचन शुरू हो गया है, जिसमें दीवान मंदिर में वेदवती-रावण प्रसंग ने दर्शकों ...और पढ़ें

जम्मू में रामलीला का आगाज। (फाइल फोटो)
HighLights
दीवान मंदिर में वेदवती-रावण प्रसंग ने मन मोहा।
वेदवती के शाप से सीता बनीं रावण के विनाश का कारण।
पंजतीर्थी में डोगरी रामलीला भी रही आकर्षण का केंद्र।
जागरण संवाददाता, जम्मू। नवरात्र के दौरान जम्मू शहर के विभिन्न स्थानों पर रामलीला का मंचन शुरू हो गया है। पहले नवरात्र पर रविवार को सनातन धर्म नाटक समाज, दीवान मंदिर में वेदवती-रावण प्रसंग ने दर्शकों का ध्यान खींचा। वहीं, सरस्वती ड्रामेटिक क्लब, पंजतीर्थी में डोगरी भाषा में प्रस्तुत रामलीला आकर्षण का केंद्र रही।
रामलीला की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद रावण तपस्या, नारद मोह, कैलाश पर्वत और श्रवण कुमार के प्रसंगों का मंचन किया गया। रावण तपस्या में मदन रंगीला ने रावण, सुधाकर खजूरिया ने विश्रवा, सौरभ शर्मा ने ब्रह्मा और कन्हैया शर्मा ने नारद की भूमिका निभाई। नारद मोह में प्रदीप शर्मा कामदेव, राम मगोतरा भगवान शिव और सक्षम भगवान विष्णु बने।
कैलाश पर्वत प्रसंग में मदन रंगीला रावण और राम मगोतरा भगवान शिव की भूमिका में नजर आए। श्रवण कुमार प्रसंग में मंगल सिंह ने श्रवण कुमार, सुधाकर खजूरिया ने राजा दशरथ और प्रदीप शर्मा ने सुमंत की भूमिका निभाई।
वेदवती के श्राप से जुड़ी रावण के विनाश की कथा
दीवान मंदिर की रामलीला में भगवान विष्णु की परम भक्त वेदवती की कथा दिखाई गई। पौराणिक मान्यता के अनुसार, हिमालय में भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए तपस्या कर रहीं वेदवती पर लंकापति रावण की नजर पड़ी। उनकी सुंदरता से मोहित रावण ने इच्छा के विरुद्ध उन्हें अपने साथ ले जाने का प्रयास किया।
आहत वेदवती ने श्राप दिया कि वह एक दिन उसके विनाश का कारण बनेंगी। रावण से बचने के लिए उन्होंने अग्नि में प्रवेश कर प्राण त्याग दिए। मान्यता है कि बाद में उन्होंने मिथिला नरेश राजा जनक के यहां माता सीता के रूप में जन्म लिया और रावण के विनाश का कारण बनीं।
युवा पीढ़ी को धार्मिक आयोजनों से जोड़ने पर जोर
मुख्य अतिथि विधायक युद्धवीर सेठी ने कहा कि रामलीला से अच्छा संदेश मिलता है और युवा पीढ़ी को ऐसे धार्मिक आयोजनों से जोड़ना चाहिए। उन्होंने अनुभवी कलाकारों से युवा कलाकारों को सीखने की बात कही और आयोजन को सफल बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले कलाकारों तथा पर्दे के पीछे काम करने वालों की सराहना की।
उन्होंने पुराने कलाकारों और निर्देशकों से जुड़ी यादें साझा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन अनुशासन से संभव होते हैं। कलाकारों से उन्होंने पूरी लगन और निष्ठा से भूमिका निभाने का आग्रह किया।
