जम्मू की रामलीला में इस बार क्या होगा खास? तैयारियों में जुटे कलाकार; डोगरी में गूंजेंगे रामायण के संवाद
जम्मू में नवरात्रों से पहले रामलीला की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं, जिसमें कलाकार अपने किरदारों को जीवंत करने के लिए रिहर्सल कर रहे हैं।

नवरात्र से पहले जम्मू में रामलीला की रिहर्सल तेज।
HighLights
जम्मू में नवरात्रों से पहले रामलीला की तैयारियां तेज हो गईं।
कलाकार अपने किरदारों को जीवंत करने के लिए रिहर्सल में जुटे हैं।
आधुनिक तकनीक संग श्रीराम के आदर्शों का प्रभावी मंचन होगा।
जागरण संवाददाता, जम्मू। नवरात्रों के पावन पर्व की आहट के साथ ही जम्मू शहर में रामलीला की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। शाम ढलते ही शहर के विभिन्न हिस्सों में कहीं संवादों की गूंज सुनाई दे रही है तो कहीं कलाकार अपने किरदार को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने के लिए रिहर्सल में पसीना बहा रहे हैं। रामलीला समितियों और संगठनों में इस बार भी मंचन को लेकर खासा उत्साह दिखाई दे रहा है।
हर संस्था की कोशिश है कि दर्शकों को ऐसा मंचन देखने को मिले, जिसमें भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों, मर्यादा और शिक्षाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
सरस्वती ड्रामेटिक क्लब पंजतीर्थी के चेयरमैन पूर्व विधायक अशोक खजूरिया ने कहा कि रामलीला जम्मू की सांस्कृतिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। वर्षों से नवरात्रों के दौरान होने वाले इन मंचनों का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है।
यही कारण है कि नवरात्र शुरू होने से पहले ही कलाकारों, निर्देशकों, तकनीकी टीमों और आयोजकों की गतिविधियां तेज हो जाती हैं। इस बार भी शहर की विभिन्न रामलीला समितियां अपनी-अपनी प्रस्तुतियों को बेहतर बनाने में जुटी हुई हैं।
मंच पर दिखेगा आधुनिकता और परंपरा का संगम
सरस्वती ड्रामेटिक क्लब के निर्देशक अनूप वर्मा इस वर्ष लगातार तीसरी बार डोगरी में राम लीला का मंचन करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि समय के साथ रामलीला के मंचन में भी काफी बदलाव आया है। पारंपरिक संवाद, वेशभूषा और अभिनय के साथ अब आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि प्रभाव, मंच सज्जा और तकनीकी साधनों का प्रयोग किया जा रहा है।
आयोजकों का प्रयास है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कथा की मूल भावना को बनाए रखते हुए किया जाए, ताकि दर्शकों को रामायण के प्रसंग अधिक प्रभावशाली और जीवंत नजर आएं।
मंच पर अयोध्या से लेकर वनवास, सीता हरण, लंका दहन और भगवान श्रीराम के विजय प्रसंगों तक की कथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की तैयारियां चल रही हैं। कलाकारों की मेहनत और तकनीकी टीम की तैयारियों के बीच हर दृश्य को आकर्षक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
किरदारों में जान डालने के लिए कलाकारों की मेहनत
सनातन धर्म नाटक समाज के निर्देशक राजेंद्र नारंग ने कहा कि रामलीला की सफलता में कलाकारों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि विभिन्न पात्र निभाने वाले कलाकार इन दिनों अपने संवाद, हाव-भाव और अभिनय को लेकर लगातार अभ्यास कर रहे हैं। राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान, रावण सहित विभिन्न पात्रों को निभाने वाले कलाकार अपने किरदार की भाव-भंगिमा और संवाद अदायगी को निखारने में जुटे हैं।
कई कलाकार अपने संवाद लगभग तैयार कर चुके हैं, लेकिन मंच पर प्रस्तुति के दौरान किसी भी प्रकार की कमी न रह जाए, इसके लिए रिहर्सल लगातार जारी है। अनुभवी कलाकार नए कलाकारों को अभिनय की बारीकियां समझा रहे हैं, जबकि निर्देशक प्रत्येक दृश्य को बेहतर बनाने के लिए कलाकारों के साथ मेहनत कर रहे हैं।
रामलीला सिर्फ मंचन नहीं, संस्कारों की पाठशाला भी
सनातन धर्म नाटक समाज के अध्यक्ष अनिल मासूम रामलीला को केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जाता। इसके माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े उन आदर्शों को समाज के सामने रखा जाता है, जो आज भी प्रासंगिक हैं। सत्य, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य, भाईचारा, माता-पिता के प्रति सम्मान और समाज के प्रति जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को रामलीला की कथा के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाया जाता है।
विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के लिए रामलीला भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनती है। मंच पर जब श्रीराम का चरित्र सामने आता है तो दर्शकों को केवल एक कथा देखने को नहीं मिलती, बल्कि जीवन में आदर्शों और मूल्यों को अपनाने का संदेश भी मिलता है।
हर समिति चाहती है अपनी प्रस्तुति को यादगार बनाना शहर की विभिन्न रामलीला समितियों के बीच अपनी प्रस्तुति को बेहतर और प्रभावशाली बनाने की तैयारी दिखाई दे रही है। कोई मंच सज्जा पर विशेष ध्यान दे रहा है तो कोई प्रकाश और ध्वनि प्रभाव को बेहतर बनाने में जुटा है। वहीं कलाकारों की टीम अभिनय और संवाद अदायगी को लेकर लगातार अभ्यास कर रही है।
रोशनी और शंखनाद के बीच सजेगा मंच
आयोजकों का प्रयास है कि हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में दर्शक रामलीला देखने पहुंचें और उन्हें ऐसा अनुभव मिले, जो लंबे समय तक याद रहे। इसके लिए मंच से लेकर पर्दे के पीछे तक तैयारियों का दौर जारी है। जैसे-जैसे नवरात्र नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे शहर में रामलीला का उत्साह भी बढ़ता जा रहा है।
अब इंतजार सिर्फ उस शाम का है, जब मंच पर रोशनी जगमगाएगी, शंखनाद के बीच रामायण की कथा शुरू होगी और जम्मू एक बार फिर ‘राम के रंग’ में रंगा नजर आएगा।
