रक्षाबंधन से पहले सजे जम्मू के बाजार, 15 रुपये से शुरू राखियां; मोती-रुद्राक्ष वाली देसी डिजाइन छाईं
जम्मू के बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सज गए हैं, जहां बहनें रक्षाबंधन के लिए अपने भाइयों की पसंद की राखियां ...और पढ़ें

रक्षाबंधन से पहले जम्मू के बाजारों में राखियों की धूम। (फाइल फोटो)
HighLights
जम्मू के बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सजे।
भारतीय राखियों की मांग बढ़ी, चीनी राखियां गायब।
राखियों की कीमतों में 10-20% की बढ़ोतरी।
जागरण संवाददाता, जम्मू। भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व नजदीक आते ही शहर के बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सज गए हैं। शहर के पक्का डंगा, मोती बाजार, गांधी नगर अप्सरा रोड सहित विभिन्न बाजारों में राखियों की दुकानों और स्टालों पर खरीदारी के लिए बहनों की भीड़ उमड़ने लगी है।
बहनें अपने भाइयों की पसंद के अनुसार राखियां खरीदने में जुटी हैं, वहीं दुकानदारों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए राखियों की विभिन्न डिजाइन और रेंज बाजार में उतारी हैं। रक्षाबंधन को लेकर इस बार बाजारों में पारंपरिक राखियों के साथ-साथ आधुनिक डिजाइन वाली राखियों की भी खूब मांग देखने को मिल रही है।
साधारण धागे वाली राखियों से लेकर मोतियों, स्टोन, रुद्राक्ष, चंदन और रंग-बिरंगे सजावटी सामान से तैयार राखियां दुकानों पर उपलब्ध हैं। वहीं युवाओं के लिए आकर्षक और स्टाइलिश डिजाइन की राखियां भी बाजार में दिखाई दे रही हैं।
बच्चों को लुभा रही कार्टून राखियां
बच्चों को ध्यान में रखते हुए दुकानदारों ने विशेष कार्टून राखियां बाजार में उतारी हैं। इन राखियों पर बच्चों के पसंदीदा कार्टून किरदारों की तस्वीरें और आकर्षक डिजाइन बनाए गए हैं। कई राखियों में रोशनी और अन्य आकर्षक फीचर भी दिए गए हैं। बच्चों के लिए छोटी उम्र के हिसाब से रंग-बिरंगी और आकर्षक राखियों की अलग-अलग रेंज रखी गई है। अभिभावक भी बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए इन राखियों की खरीदारी कर रहे हैं।
पारंपरिक राखियों की भी मांग
आधुनिक राखियों के बीच पारंपरिक राखियों की मांग भी बरकरार है। बाजार में मौली, कलावा और रेशमी धागे से बनी राखियां बहनों को आकर्षित कर रही हैं। धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए भगवान की तस्वीरों, ओम और स्वास्तिक जैसे धार्मिक प्रतीकों वाली राखियां भी उपलब्ध हैं। कई दुकानों पर राखियों के साथ पूजा की थाली और भाई के लिए उपहार पैक भी तैयार किए गए हैं।
बाजारों में बढ़ी रौनक
रक्षाबंधन के करीब आते ही पक्का डंगा और मोती बाजार जैसे शहर के पुराने बाजारों के साथ गांधी नगर, अप्सरा रोड और अन्य बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। राखियों की खरीदारी के लिए महिलाएं और बच्चे दुकानों पर पहुंच रहे हैं। शाम के समय बाजारों में ग्राहकों की संख्या अधिक दिखाई दे रही है।
दुकानदारों को उम्मीद है कि बुधवार व वीरवार को बिक्री में और तेजी आएगी। व्यापारियों का कहना है कि राखियों की कीमत डिजाइन और गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग है। सामान्य राखियों से लेकर प्रीमियम डिजाइन वाली राखियों तक उनके पास उपलब्ध हैं। इससे ग्राहक अपने बजट के अनुसार राखी खरीद सकते हैं।
ऑनलाइन खरीदारी के बावजूद बाजार में उत्साह
ऑनलाइन खरीदारी का चलन बढ़ने के बावजूद रक्षाबंधन के मौके पर स्थानीय बाजारों में लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है। कई बहनें राखी को सामने देखकर उसकी गुणवत्ता, डिजाइन और रंग पसंद करने के बाद खरीदना पसंद कर रही हैं। दुकानदारों ने भी इस बार ग्राहकों की पसंद को देखते हुए अलग-अलग आयु वर्ग के लिए राखियों की रेंज पेश की है।
रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का त्योहार नहीं बल्कि भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का अवसर भी है। यही वजह है कि त्योहार से पहले जम्मू के बाजारों में खरीदारी का माहौल उत्सव जैसा नजर आने लगा है। बहनों में जहां भाइयों की कलाई पर पसंदीदा राखी बांधने को लेकर उत्साह है, वहीं भाई भी अपनी बहनों के लिए उपहार खरीदने की तैयारी में जुटे हैं।
पिछले साल की तुलना में बढ़े राखियों के दाम
रक्षाबंधन को लेकर शहर के बाजारों में राखियों की खरीदारी जोर पकड़ रही है। प्रमुख बाजारों में रंग-बिरंगी और आकर्षक राखियों की भरमार है। हालांकि इस बार राखियों की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पक्का डंगा के विक्रेता रवि कुमार के अनुसार डिजाइन और गुणवत्ता के आधार पर कई राखियां पिछले साल की तुलना में करीब 10 से 20 प्रतिशत तक महंगी हुई हैं।
पिछले साल जहां सामान्य राखियां करीब 10 से 30 रुपये में उपलब्ध थीं, वहीं इस बार इनकी कीमत लगभग 15 से 40 रुपये तक पहुंच गई है। मोती, स्टोन और सजावटी सामग्री वाली राखियां पिछले साल करीब 40 से 80 रुपये में मिल रही थीं, जबकि इस साल इनकी कीमत 50 से 100 रुपये के आसपास है। वहीं प्रीमियम और डिजाइनर राखियों के दाम भी बढ़े हैं। बच्चों को आकर्षित करने वाली कार्टून राखियों की भी बाजार में अच्छी मांग है।
पिछले साल ऐसी राखियां करीब 50 से 100 रुपये में उपलब्ध थी, जबकि इस बार डिजाइन के अनुसार इनकी कीमत 60 से 120 रुपये तक बताई जा रही है। विक्रेताओं का कहना है कि राखियों की कीमत बढ़ने के पीछे सजावटी सामग्री, पैकेजिंग और परिवहन लागत में वृद्धि प्रमुख कारण हैं। हालांकि ग्राहकों के लिए बाजार में हर बजट के अनुरूप राखियां उपलब्ध हैं। दुकानदारों को उम्मीद है कि रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर बिक्री में और तेजी आएगी।
देसी राखियों की बढ़ी मांग
रक्षाबंधन पर इस बार चीन निर्मित राखियां दिखाई नहीं दे रही हैं। शहर के प्रमुख बाजारों में दुकानदारों ने भारतीय निर्माताओं और स्थानीय स्तर पर तैयार राखियों को ही बिक्री के लिए रखा है। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में चीन से आने वाली राखियों की मांग और उपलब्धता लगातार कम हुई है और अब बाजार में इनका लगभग अभाव है।
मोती बाजार में राखियों के थोक विक्रेता रमेश शर्मा के अनुसार पहले चीन निर्मित राखियों में आकर्षक डिजाइन और कम कीमत के कारण बच्चों और युवाओं के बीच इनकी मांग रहती थी। इस बार बाजार में उनकी जगह पूरी तरह से भारतीय राखियों ने ले ली है। देश में तैयार होने वाली राखियों में पारंपरिक धागे, मोती, रुद्राक्ष, स्टोन और अन्य सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ग्राहक भी अब भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर वाली राखियां भी देश में ही तैयार होकर बाजार में पहुंच रही हैं। इसके अलावा धार्मिक प्रतीकों और आकर्षक डिजाइन वाली राखियों की भी अच्छी मांग है।
