'खेती बन गई घाटे का सौदा'... धान पककर तैयार थी, फिर हुई बारिश और बरसे ओले; जम्मू-कश्मीर में किसानों को भारी नुकसान
मीरा साहिब क्षेत्र में बुधवार तड़के हुई बारिश और ओलावृष्टि से धान की खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। ...और पढ़ें

मीरा साहिब में बारिश और ओलावृष्टि से धान की फसल बर्बाद। (फाइल फोटो)
HighLights
मीरा साहिब में बारिश और ओलावृष्टि से धान की फसल को नुकसान।
किसानों ने प्रशासन से फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा मांगा।
खेती को घाटे का सौदा बताकर किसान चिंतित, भविष्य पर सवाल।
जागरण संवाददाता, मीरा साहिब। जम्मू-कश्मीर में बुधवार तड़के कई इलाकों में बारिश हुई। मीरा साहिब क्षेत्र में एक बार फिर बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की खड़ी और पककर तैयार हो रही धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। कीरपिंड, कोला, ममका, खोड़, लंगोटियां कोटली मियां फतेह चक्र शिया समेत कई गांवों में बारिश और ओले गिरने से खेतों में खड़ी फसल प्रभावित हुई है।
किसानों का कहना है कि पिछले दिनों भी बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण उनकी फसल को भारी नुकसान हुआ था, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से खेतों का मुआयना नहीं किया गया है और आज एक बार फिर से ओलावृष्टि और बारिश ने क हर भर पाया है|
किसानों की प्रशासन से मांग
किसान नेता सुरजीत रामपाल राजेंद्र सिंह सहित अन्य कई किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों में टीम भेजकर फसल नुकसान का जायजा लिया जाए और किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
'खेती करना एक घाटे का सौदा'
किसानों के अनुसार, आज उनके लिए खेती करना एक घाटे का सौदा बनता जा रहा है, क्योंकि जब फसल पूरी तरह से तैयार होती है तो कुदरत की मार पड़ जाती है। वहीं दूसरी ओर खराब हुई फसल का सरकार की ओर से नाम मात्र ही मुआवजा कभी-कभी मिलता है ऐसे में किसान आज खेती से नुकसान ही उठा रहा है।
किसानों का कहना है कि अगर समय रहते नुकसान की भरपाई नहीं की गई तो उनके लिए खेती-बाड़ी जारी रखना मुश्किल हो जाएगा और किसान खेती से ही मुंह मोड़ लगा, इसलिए सरकार को जल्द से जल्द बारिश और ओलावृष्टि से खराब हुई फसल का जायजा लेने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
