श्रीनगर, जेएनएन। पुलवामा मुठभेड़ के बाद घाटी के सोपाेर में आतंकवादियों ने घात लगाकर सैन्य गश्ती दल पर हमला किया है। आतंकवादियों द्वारा अचानक से किए गए इस हमले में एक जवान गंभीर रूप से घायल भी हुआ है। इससे पहले कि सेना के जवान हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई करते आतंकी गोलीबारी करते हुए मौके से फरार हो गए। घायल जवान को सैन्य अस्पताल में भर्ती किया गया है। जबकि हमलावरों की तलाश में सेना, पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने सर्च ऑपरेशन चलाया है।

पिछले 12 घंटों के भीतर कश्मीर घाटी में यह दूसरी आतंकी वारदात है। इससे पहले जिला पुलवामा में तड़के ढाई बजे सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी की थी जिसमें दो सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दोनों सुरक्षाकर्मियों को अस्पताल पहुंचाया गया जहां एक जवान ने जख्मों का ताव न सहते हुए दम तोड़ दिया। हालांकि जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी भी मारा गया। मुठभेड़ में मारे गए आतंकी का नाम आजाद ललहारी है। हिजबुल मुजाहिदीन में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले वह आतंकियों के लिए ओवरग्राउंड वर्कर के रुप में काम करता था। उसने ही 22 मई को पुलवामा में सुरक्षाबलों की एक नाका पार्टी पर अपने साथियों संग मिलकर हमला किया था। इस हमलें में पुलिसकर्मी अनूप सिंह शहीद हो गए थे। फिलहाल मुठभेड़ स्थल पर गोलीबारी थम चुकी है और सुरक्षाबलों ने और आतंकवादियों की मौजूदगी की आशंका के चलते इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी रखा हुआ है।

खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली की पुलवामा जिले के कमराजीपोरा में एक बाग में आतंकी छिपे हैं, सूचना मिलते ही सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया और इलाके में तलाशी अभियान चलाया। खुद को घिरा देख आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी। सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। हालांकि कार्रवाई के दौरान एक जवान शहीद हो गया है, लेकिन एक आतंकी भी मारा गया है। सुरक्षाबलों ने फिलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रखा है। घटनास्थल से एक-47, ग्रेनेड के साथ ही अन्य आपत्तिजनक सामान भी बरामद हुआ है। जिन्हें पुलिस ने कब्जे में ले लिया है।

इससे पहले मंगलवार को सीमा पार से हथियारों की तस्करी के हिजबुल मुजाहिदीन के मॉड्यूल का सुरक्षाबलों ने उत्तरी कश्मीर के सीमांत जिले कुपवाड़ा में पर्दाफाश किया है। एक आतंकी और चार ओजीडब्ल्यू को गिरफ्तार किया गया है। इनके कब्जे से एक एके 47 राइफल, दो 9 एमएम की चीनी पिस्टल और मैगजीन बरामद हुई है। इन हथियारों को घाटी में सक्रिय आतंकियों तक पहुंचाना था। 

 शोपियां मुठभेड़ की जांच के लिए डीएनए मिलान कराएगी पुलिस

शोपियां मुठभेड़ पर विवाद का संज्ञान लेते हुए जम्मू कश्मीर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस राजौरी से लापता श्रमिकों का पता लगाने के लिए उनके परिजनों के डीएनए के नमूने लेकर मारे गए आतंकियों के डीएनए से मिलान करेगी। इस बीच, उपराज्यपाल के सलाहकार फारूक खान ने कहा कि कुछ लोग कश्मीर के हालात बिगाड़ने के लिए विवाद को तूल दे रहे हैं। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। लोगों को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के परिणाम का इंतजार करना चाहिए।इस बीच, शोपियां के अमशीपोरा के निवासियों ने राजौरी के तीन श्रमिकों के गायब होने की पुष्टि तो की है, लेकिन किसी ने यह नहीं माना कि मारे गए आतंकी वही थे। उनके मुताबिक, आतंकियों के चेहरे पूरी तरह बिगड़े थे।

गौरतलब है कि शोपियां के अमशीपोरा में 18 जुलाई को सेना की 62 आरआर के जवानों ने तीन आतंकियों को मार गिराया था। इन आतंकियों के शवों के नमूने लेने के बाद बारामुला में दफनाया गया था। रविवार को राजौरी में कोट्रंका तहसील के तीन परिवारों ने इन आतंकियों की तस्वीरों के आधार पर दावा किया है कि मरने वाले आतंकी नहीं बल्कि उनके परिजन हैं और वे मजदूरी के लिए शोपियां गए थे। लापता श्रमिकों में 20 वर्षीय इम्तियाज अहमद, 18 वर्षीय इबरार अहमद के अलावा 25 वर्षीय मोहम्मद अबरार शामिल हैं।

सेना से जानकारियां मांगी हैं :

एसपीएसएसपी शोपियां अमृतपाल सिंह ने कहा कि श्रमिकों के परिजनों में से किसी ने भी हमारे साथ संपर्क नहीं किया है। अलबत्ता, उन्होंने राजौरी में एक शिकायत दर्ज कराई है। हम मुठभेड़स्थल के आसपास रहने वाले लोगों से भी बातचीत करेंगे। हमारा मकसद है कि सच सामने आए। सेना से भी कुछ जानकारियां मांगी जा रही हैं।

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