कठुआ, राकेश शर्मा : इंटरनेट और सोशल मीडिया के जमाने में लाइब्रेरी की प्रासंगिकता काफी कम हो गई, फिर भी अग किसी लाइब्रेरी में सैकड़ों युवाओं की भीड़ रोज उमड़े तो मान लेना चाहिए कि लाइब्रेरी में जरूर कुछ खास है। खासकर एक जिले की लाइब्रेरी में। जम्मू कश्मीर में संभवत: कठुआ में की एक मात्र ऐसी लाइब्रेरी है, जिसमें हर दिन सैकड़ों की संख्या में युवा सुबह दस बजे से रात के आठ बजे तक जमे रहते हैं। यहां तक कि छुट्टी के दिनों में भी यह लाइब्रेरी खुली रहती है। युवाओं में लाइब्रेरी के प्रति यह रुझान बहुत सकारात्मक है। अब अभिभावकों की जिम्मेदारी बनती है कि अपने बच्चों को बताएं कि यह लाइब्रेरी क्यों अपने में खास है। वहां उनका भविष्य कैसे संवर सकता है?

कठुआ जिला मुख्यालय के मेधावी युवा और युवतियों के लिए पब्लिक लाइब्रेरी लाइफ चेंजर साबित हो रही है। यहां के करीब 300 होनहार युवा अपना भविष्य चमकाने का लक्ष्य लेकर यहां रोज पुस्तकें पढ़ने आते हैं। इन युवाओं में ज्यादातर वे युवा हैं, जो आइएएस और आइपीएस की तैयारी करते हैं या फिर किसी अच्छी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। यहां पर उन सभी युवाओं की जरूरत की सभी पुस्तकें मौजूद होती हैं। उनके लिए बैठने और पढ़ने की अच्छी सुविधा है। लाइब्रेरी प्रशासन भी युवाओं की सुविधाओं का ख्याल रखते हैं।

इस पब्लिक लाइब्रेरी में जैसा माहौल दिखता है, वैसा विरले ही किसी लाइब्रेरी में दिखता है। इसमें चाहे सरकार का बेहतर प्रयास कहें या लाइब्रेरी विभाग का। पर यह युवाओं के भविष्य के लिए बहुत अच्छा है। यहां पर युवाओं अध्यापक कार्य के लिए हर आधुनिक सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। सब ठीक रहा तो जल्द ही यह लाइब्रेरी डिजिटल भी हो जाएगी। अभी यहां पुस्तकों के साथ-साथ सामाचार पत्र भी उपलब्ध होता है, जिससे सिलेबस के अलावा युवा सामान्य ज्ञान को भी मजबूत करते हैं।

करोड़ों की लागत से लाइब्रेरी का विस्तान करने की योजना : जिला सरकारी लाइब्रेरी कठुआ के प्रभारी सुनील शर्मा ने कहा कि युवाओं की लाइब्रेरी के प्रति बढ़ती रुचि को देखते हुए विभाग करोड़ों रुपये की डीपीआर बनाकर इसका विस्तार करने जा रहा है। फंड मिलते ही विस्तारीकरण का काम शुरू हो जाएगा। इसके तहत डिजटिल लाइब्रेरी बनाई जानी है, जहां दुनिया की हर पुस्तक उपलब्ध होगी। इस समय भी लाइब्रेरी मेंं विषय और आइएएस, जेकेएएस, आपीएस सहित अन्य प्रतिस्पार्धी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी पुस्तकें मौजूद हैं। इसी वजह से सुबह 10 बजे से शाम आठ बजे तक युवा यहां जमे रहते हैं। छुटी के दिन भी सुबह 8 से 10 बजे दो घंटे के लिए खुली रहती है।

लाइब्रेरी से बाहर शहर का माहौल चिंताजनक : कठुआ की सरकारी लाइब्रेरी युवाओं का सही मार्गदर्शन करने में लगी है। हालांकि लाइब्रेरी से बाहर शहर का माहौल चिंताजनक है। नई पीढ़ी नशे की दलदल में धंसते जा रही है। उन्हें बचाने की जिम्मेदारी हर अभिभावक की बनती है। युवाओं को लाइब्रेरी जाने की लत लगानी चाहिए। खेल और पढाई ही युवाओं के भविष्य को संवारने का जरिया है। युवाओं को प्रेरित और आकर्षित करने के लिए कठुआ की लाइब्रेरी को स्मार्ट लाइब्रेरी बनाया जा रहा है।

Edited By: Lokesh Chandra Mishra