जम्मू, अशोक शर्मा । पेशेवर व्यवसायी वही है जो समय के साथ कदम ताल करना जानता है। खासकर सौंदर्य प्रसाधनों के व्यवसाय से जुड़े व्यवसायी को तो हर पल दुनिया में हो रहे बदलाव पर भी नजर रखनी पड़ती है।

स्वयं को सुंदर और आकर्षक दिखाने की प्रवृत्ति के कारण ही आजकल सौंदर्य प्रसाधनों का प्रचलन सर्वाधिक होने लगा है। बिना मेकअप किए अब व्यक्तित्व अधूरा-सा लगता है। सुंदरता की ललक ने अपने पांव इस तरह पसारे हैं कि स्त्रियां तरह-तरह के बनाव- श्रृंगार करती रहती हैं। अगर कहा जाए कि मंदिरों के शहर जम्मू में सौंदर्य निखारने में सबसे बड़ा योगदान पुराने शहर के पटेल बाजार स्थित गोल्डन ऐज का है तो गलत न होगा।

विश्वास जीतने के लिए जरूरी है कि गुणवत्ता से समझौता न किया जाए

गोल्डन ऐज के मालिक राजेश गुप्ता का कहना है कि किसी का विश्वास जीतने के लिए जरूरी है कि गुणवत्ता से समझौता न किया जाए। जो भी ग्राहक दुकान में आए उसे तसल्ली और विश्वास हो की जो चीज वह लेने दुकान में प्रवेश किया है। उसे वहां मिल जाएगी। चीज खरीद कर दुकान से निकलते हुए उसकाे विश्वास होना चाहिए कि उसने जो चीजें खरीदी हैं। उनमें कहीं किसी प्रकार का धोखा नहीं है। जिस कंपनी के उत्पाद का उसने भुगतान किया है। वही चीज उसे मिली है। राजेश कहते हैं व्यवसाय करने वाला कोई भी व्यवसायी पैसा कमा ले यह बड़ी बात नहीं। बड़ी बात तो है ग्राहक का विश्वास जीतना।

पिता मीरपुर सिदड़ के नामी व्यवसायी थे

राजेश गुप्ता बताते हैं कि भारत-पाक बंटवारे से पहले उनके पिता जी मीरपुर सिदड़ में साहुकार थे और एक नामी व्यवसायी थे। लेकिन बंटवारे की आगे ने सब कुछ छीन लिया। संघर्ष के उन दिनों में मेहनत तो खूब करनी पड़ी लेकिन किसी तरह से पुराने शहर के मल्होत्रा मोहल्ले में दुकान खोली। बड़े भाई सुभाष महाजन ने उस दुकान को इतने अच्छे तरीके से चलाया कि वर्ष 1965 में पुरानी मंडी पटेल बाजार में दुकान बनाई। वर्ष 2004 में दुकान को बड़ा किया। वर्ष 2012 को इस दुकान को शो रूम में बदल दिया। आज दावे से कह सकते हैं कि सौंदर्य प्रसाधन का शायद ही ही कोई प्रॉडक्ट होगा जो उनके शोरूम में न मिलता हो।

महिलाओं की पहली पसंद है गोल्डन ऐज

लोगों का विश्वास भी ऐसा है कि जम्मू-कश्मीर के लगभग हर कोने से ग्राहक उनकी दुकान पर आते हैं। खासकर शादी विवाह का सीजन हो तो कश्मीर से बहुत ज्यादा लोग इस विश्वास के साथ उनके शो रूम में पहुंचते हैं कि उनकी पसंद की हर चीज उन्हें इस शो रूम में मिल जाएगी। राजेश हंसते हुए कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिलाएं ही अपना श्रृंगार करती हैं। हर पत्नी अपने पति को खूबसूरत, जवान और चुस्त-दुरुस्त देखना चाहती है। इसलिए अब वह दिन चले गए जब महिलाएं ही सौंदर्य प्रसाधन मे विश्वास करती थी। आज युवा भी इस दौड़ में पीछे नहीं।

लॉकडाउन ने विश्वास बढ़ाया

इस लॉकडाउन ने हमारा विश्वास और बढ़ाया है। हमें लगता था कि ग्राहक और दुकानदार का रिश्ता दुकान तक ही सीमित होता है लेकिन ऐसा नहीं है। कोरोना संक्रमण के दौरान इतने ज्यादा ग्राहकों के जम्मू-कश्मीर के कोने-कोने से फोन आए कि लगा जैसे हमारे ग्राहक तो हमारे परिवार का हिस्सा हैं। मार्च से मई तक दुकान बंद रही लेकिन जैसे ही कश्मीर में शादियों का सीजन शुरू हुआ तो वहां से लगातार फोन आने शुरू हो गए। हर ग्राहक यही कहता था कि उन्हें चाहे कुछ दिन और इंतजार करना पडे़ लेकिन उन्हें शादी की खरीददारी उन्हीं के शो रूम से करनी है। लॉकडाउन जब शुरू हुआ तो घर वालों की भारत पाक बटवारे की बाते याद आती थी। लगता था कि कहीं वहीं संघर्ष फिर से तो नहीं करना पडे़गा लेकिन ग्राहकों के साथ उनके परिवार के सभी लोगों का जो रिश्ता बन चुका है वह काम आया।

लॉकडाउन के बाद ग्राहक ठीक उसी तरह से अाने लगे हैं जैसे पहले आया करते थे। बड़ी बात यह है कि शो रूम के कर्मचारियों ने भी उन पर पूरा विश्वास किया। जिस दिन दुकानें खुली हैं। ठीक उसी दिन सभी कर्मचारी भी उनके साथ खड़े थे। हालांकि अधिकतर कर्मचारी जो उनके साथ विभिन्न कंपनियों के हैं लेकिन उनके साथ भी एक ऐसा प्यार बन चुका है कि मुझे लगता है कि उनके विश्वास से ही हमारे शो रूम की एक खास पहचान है। काम करने वाली अधिकतर लड़किया ही हैं। सभी इतने अच्छे तरीके से काम करती हैं कि उन्हें काम करते हुए देखो तो लगता है कि परिवार के सभी लोग ही काम कर रहे हैं।

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