राज्य ब्यूरो, जम्मू : राज्य शिक्षा विभाग निजी स्कूलों की मनमानी के आगे बेबस नजर आता है। निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। हालांकि अभी परीक्षाएं होने के कारण फीस में बढ़ोतरी या रि-एडमिशन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, लेकिन कुछ निजी स्कूलों में दाखिले के लिए टेस्ट शुरू हो गए हैं। इसके लिए अभिभावकों से पांच सौ से एक हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त सचिव हृदेश कुमार ने निजी स्कूलों में तय शुल्क के मानदंडों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा है। पूर्व की सरकारों के ढुलमुल रवैये के कारण निजी स्कूलों की मनमानी बढ़ती गई है। हालत यह है कि आज तक जम्मू कश्मीर में प्राइवेट स्कूलों का फीस ढांचा तय करने के लिए कोई नीति नहीं बनाई गई है। पूर्व शिक्षा मंत्रियों के कई बार बयान आते रहे हैं कि लोगों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में डालना चाहिए।

पिछले साल निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर शिकायतें भी आई थीं। इसके बाद शिक्षा विभाग ने 19 निजी स्कूलों को नोटिस भेजा था। फीस ढांचा निर्धारित करने वाली कमेटी ने 28 जनवरी 2019 को आदेश जारी किया था, जिसमें फीस निर्धारित करने और बढ़ाने संबंधी नियम थे। सभी स्कूलों को दो तीन बार कहा गया था कि वे कमेटी के नियमों का पालन करें नहीं तो स्कूलों की मान्यता रद की जा सकती है। मान्यता प्राप्त निजी स्कूल जायज फीस ले रहे हैं : कमल गुप्ता

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रधान कमल गुप्ता का कहना है कि जम्मू कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एसोसिएशन से मान्यता प्राप्त निजी स्कूल जायज फीस ले रहे हैं। कोई लूटखसोट नहीं की जा रही है। स्कूलों के प्रबंधन पर अध्यापकों के वेतन, महंगाई व खेल फंड का दबाव रहता है। योग्य अध्यापक को कम वेतन नहीं दिया जा सकता। बोर्ड ने हर साल ली जाने वाली मान्यता फीस को बढ़ा दिया है। अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए ली जाने वाली फीस को बढ़ा दिया गया है। महंगाई के कारण ढांचागत सुविधाओं का खर्च बढ़ गया है। इसके बावजूद जम्मू में जायज फीस ली जा रही है।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस