जम्मू, राज्य ब्यूरो। बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए यात्रा मार्ग और पवित्र गुफा स्थल पर सभी आवश्यक तैयारी कर ली गई है। अब इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। डिप्टी कमिश्नरों ने उपराज्यपाल के सलाहकार बसीर अहमद खान को अपने जिलों में किए गए प्रबंधों की जानकारी दी।

डिप्टी कमिश्नरों ने बताया कि आधार शिविर और यात्रा मार्ग पर कैंपों के लिए जगह को चिन्हित किया गया है। यहां आवश्यक कर्मियों और मशीनरी को जल्द पहुंचा दिया जाएगा। सलाहकार ने यात्रा प्रबंधों की समीक्षा करते हुए कहा कि यात्रियों को ठहराने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में कश्मीर के डिवीजनल कमिश्नर पीके पोले, श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी, अनंतनाग व गांदरबल के डिप्टी कमिश्नरों सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।

श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की बैठक में अभी तक यात्रा शुरू करने या पंजीकरण को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है, लेकिन यात्रा के लिए तैयारी चल रही है। ट्रैक से बर्फ हटाने, पानी, बिजली, संचार सुविधा की जानकारी ली उपराज्यपाल के सलाहकार ने ट्रैक से बर्फ हटाने, रास्ते की मरम्मत, पानी, बिजली, संचार के टावर व अन्य प्रबंधों की जानकारी ली। उन्होंने मेडिकल टीमों की तैनाती, फायर टेंडर, ऑक्सीजन बूथ, अस्थायी राशन डिपो, पोनी और पालकी वालों की सेवाओं पर भी चर्चा की। 

अमरनाथ यात्रा की तर्ज पर चलाई जाए मचैल यात्रा

अमरनाथ यात्रा की तर्ज पर ही मचैल यात्रा को भी चलाने के लिए मचैल गांव के लोगों ने अपील की है। कोरोना संक्रमण के चलते सभी मंदिरों को बंद रखने का आदेश दिया गया है। कुछ मंदिरों में सिर्फ पुजारी को पूजा-पाठ की इजाजत दी गई है। बाकी आम लोगों को जाने की अनुमति नहीं है। इसी के चलते जम्मू कश्मीर में प्रसिद्ध माता वैष्णो देवी का मंदिर भी अभी भक्तों के लिए बंद पड़ा हुआ है और हर साल चलने वाली अमरनाथ यात्रा का भी अभी कोई फैसला नहीं हो पा रहा है कि कब और किस तरीके से यात्रा चलाई जाए। सिर्फ यह कहा जा रहा है कि जुलाई में अमरनाथ यात्रा चलाई जाएगी।

इसी के मद्देनजर मचैल गांव के निवासी श्रीकृष्ण, संजीव शर्मा, रंगेल सिंह, पहलवान सिंह और अन्य कई लोगों ने उपराज्यपाल को ज्ञापन भेजकर अपील की है कि अगर अमरनाथ यात्रा को चलाने का कार्यक्रम बनाया जाता है तो अगस्त के महीने में चलने वाली मचैल यात्रा के बारे में भी विचार किया जाए और धीरे-धीरे करके यात्रियों को माता चंडी के दरबार मचैल में आने की इजाजत दी जाए। माता की पवित्र छड़ी को भी आने की इजाजत दी जाए, ताकि वर्षो से चली आ रही परंपरा चलती रहे।

उनका कहना था कि मचैल यात्रा की वजह से इलाके के लोगों की पहचान बनी है और गुलाबगढ़ से लेकर मचैल तक लोगों की सालभर की रोजी-रोटी का भी यही यही जरिया होता है। पिछले वर्ष भी यात्रा शुरू होते ही अनुच्छेद 370 हटाने की वजह से तीन अगस्त को ही यात्रा बंद हो गई, जिसके चलते पूरे इलाके में लोगों का लाखों, करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। कई लोगों का सामान खराब हो गया, जिसे लोगों ने चुपचाप सह लिया। यही सोचा था कि अगले साल यात्रा और ज्यादा बढ़ेगी तथा यहां का कारोबार भी होगा। लेकिन इस वर्ष कोरोना की वजह से सब कुछ ठप पड़ा है।

उनका कहना था कि अगर सरकार सोच समझकर और कोविड-19 के कानून के अंतर्गत इस यात्रा को चलने की इजाजत देती है तो यहां के लोगों का सालभर की रोजी-रोटी का गुजारा भी हो जाएगा और जो यात्री माता चंडी के प्रति श्रद्धा रखते हैं, वे भी यहां आकर माथा टेक सकते हैं। इस मंदिर में सितंबर के बाद आना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि कभी भी बर्फबारी हो जाती है। इसलिए यहां पर यात्रियों के आने के लिए सिर्फ जुलाई-अगस्त और सितंबर का महीना ही होता है।

Posted By: Preeti jha

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