79 साल बाद भी घर वापसी का इंतजार! गुलाम जम्मू-कश्मीर के विस्थापितों का छलका दर्द, समिति से बोले- हमें भी बसाएं
गुलाम जम्मू-कश्मीर के विस्थापितों ने केंद्रीय समिति के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त की, जिसमें 1947 के विस्थापन और पुनर्वास की ...और पढ़ें

गुलाम जम्मू कश्मीर के विस्थापितों को वापस लाने की मांग।
HighLights
विस्थापितों ने केंद्रीय समिति को अपनी समस्याएँ बताईं।
1947 के विस्थापन और पुनर्वास की मांग की।
2014 के वादे पूरे करने की अपील की।
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू कश्मीर की जन सांख्यिकी बदलाव का अध्ययन करने के लिए जम्मू आई केंद्रीय सरकार की उच्च स्तरीय समिति के समक्ष गुलाम जम्मू कश्मीर के विस्थापितों ने अपनी बात रखी। इन लोगों की संस्था एसओएस इंटरनेशनल के चेयरमैन राजीव चुनी ने कहा कि इन लोगों का जन सांख्यिकी बदलाव तो 1947 में ही हो गया था, जब पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के कुछ भाग पर हमला कर अपना कब्जा कर दिया था।
वहां के लोगों को विस्थापित होने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उसके बाद इन लोगों को इस ओर जम्मू-कश्मीर में आकर बसना पड़ा। 26300 विस्थापित परिवार जम्मू कश्मीर में आए जबकि 5300 पंजीकृत और 9500 गैर पंजीकृत गुलाम जम्मू कश्मीर के विस्थापितों को अन्य राज्यो में जाकर रहना पड़ा।
दशकों बाद भी घर वापसी का इंतजार
जन सांख्यिकी बदलाव तो आज भी हो रहा है क्योंकि लंबा अरसा बीत जाने के बाद भी अन्य राज्यों में रह रहे इन विस्थापितों को जम्मू कश्मीर नहीं लाया जा सका है। यह लोग जम्मू कश्मीर आना चाहते हैं मगर उनके लिए यहां कोई जगह का आवंटन नहीं, कोई राहत नहीं।
25 लाख मुआवजे का वादा भी अधूरा
चेयरमैन चुनी ने कहा कि 1990 में जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के समय जम्मू कश्मीर से बाहर रह रहे गुलाम जम्मू कश्मीर के विस्थापितों को जम्मू कश्मीर लाने के लिए कोई योजना शुरू की जा सकती थी। लेकिन कुछ नहीं किया गया। वहीं उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की 2014 कैबिनेट बैठक में गुलाम जम्मू कश्मीर के विस्थापितों को 25 लख रुपए के मुआवजे की बात हुई।
समिति को सौंपा ज्ञापन
चेयरमैन चुनी ने कहा कि 8500 सरकारी नौकरियां देने की बात हुई, मगर यह सब बातें आज तक पूरी नहीं हो पाई। गुलाम जम्मू कश्मीर के विस्थापित आज भी दयनीय जीवन जम्मू कश्मीर में जी रहे हैं। समिति को एसओएस इंटरनेशनल के सदस्यों ने मांगों का एक ज्ञापन पत्र भी सौंपा।
