पिता के नाम पर कलंक! बेटी से बार-बार की दरिंदगी, अब जिंदगी भर जेल में सड़ेगा; जम्मू POCSO कोर्ट का सख्त फैसला
जम्मू की विशेष फास्ट ट्रैक पोक्सो अदालत ने नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के दोषी पिता अशोक कुमार को उसकी प्राकृतिक ...और पढ़ें

बेटी से दुष्कर्म पर जम्मू कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद। (फाइल फोटो)
HighLights
पिता अशोक कुमार को नाबालिग बेटी से दुष्कर्म का दोषी ठहराया गया।
जम्मू पोक्सो अदालत ने प्राकृतिक मृत्यु तक उम्रकैद की सजा सुनाई।
अदालत ने पिता-पुत्री के पवित्र रिश्ते के उल्लंघन को गंभीर माना।
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू की विशेष फास्ट ट्रैक पोक्सो अदालत ने नाबालिग बेटी से बार-बार दुष्कर्म करने के मामले में दोषी पिता अशोक कुमार पुत्र रसाल चंद को उसकी प्राकृतिक मृत्यु तक उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि पिता-पुत्री के पवित्र रिश्ते में विश्वास और संरक्षण की गंभीर अवहेलना को देखते हुए केवल न्यूनतम कानूनी सजा न्याय के उद्देश्यों को पूरा नहीं करेगी।
कोर्ट ने आठ सितंबर को आरोपित को दोषी करार दिया था और आज अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए आरोपित को प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर दो माह का साधारण कारावास भुगतना होगा।
मामला अखनूर थाने का है जहां वर्ष 2022 में एफआइआर दर्ज हुई थी। पुलिस केस के अनुसार पीड़िता के स्कूल में पढ़ने के दौरान उसके साथ यौन शोषण शुरू हुआ और यह सिलसिला लंबे समय तक जारी रहा। जून 2022 में बच्ची ने परेशान होकर एक सहेली और अपने स्कूल के शिक्षकों को आपबीती बताई। स्कूल की पोक्सो समिति द्वारा मामले की जांच के बाद प्रिंसिपल ने उसकी लिखित शिकायत पुलिस को भेजी।
22 गवाह पेश
जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता के बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज करवाए तथा मोबाइल फोन और बेडशीट जब्त की। मेडिकल, फोरेंसिक और इलेक्ट्रानिक सबूत भी एकत्र किए गए। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि बेटी की एक पुरुष मित्र से दोस्ती का विरोध करने के कारण आरोपित को झूठे मामले में फंसाया गया है।
बचाव पक्ष ने कथित रूप से पीड़िता द्वारा रिकार्ड किए गए वीडियो को औपचारिक रूप से साबित नहीं किए जाने का तर्क भी दिया। अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए पीड़िता की गवाही को विश्वसनीय और भरोसेमंद माना।
रमी बरतने की अपील
अदालत ने कहा कि वीडियो का प्रमाणित न होना अपने आप में विश्वसनीय मौखिक सबूत को खारिज करने का आधार नहीं हो सकता। सजा पर बहस के दौरान अभियोजन ने अधिकतम सजा की मांग करते हुए कहा कि दोषी ने अपनी ही जैविक बेटी का यौन शोषण किया। वहीं बचाव पक्ष ने परिवार का एकमात्र कमाने वाला होने, लंबे समय से हिरासत में रहने और हिरासत के दौरान अच्छे आचरण का हवाला देते हुए नरमी बरतने की अपील की।
वहीं अदालत ने अपराध को अत्यंत गंभीर और निंदनीय करार देते हुए कहा कि पिता-पुत्री का रिश्ता विश्वास, सुरक्षा और देखभाल पर आधारित होता है। लेकिन दोषी ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय भरोसे का दुरुपयोग करते हुए बच्ची को यौन हिंसा का शिकार बनाया। अदालत ने कहा कि मामला मृत्युदंड जैसी चरम सजा के योग्य नहीं है, लेकिन केवल कानूनी न्यूनतम सजा देना भी न्याय के हित में पर्याप्त नहीं होगा।
