जम्मू, जेएनएन। जम्मू-कश्मीर सरकार के लिए घाटे का सबब बन रहे बिजली विभाग को कारपोरेशन का स्वरूप देकर अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों को जवाबदेह बनाने की प्रक्रिया का विरोध होना शुरू हाे गया है। पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट और पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के कर्मचारियों ने इस आदेश पर अमलीजामा पहनाने से पहले सरकार से उनकी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। यही नहीं इन कर्मचारियों ने बातचीत किए बिना आदेश लागू होने पर उग्र आंदोलन की शुरूआत करने का एलान भी कर दिया है। सरकार पर दबाव बनाने के लिए इन कर्मचारियों ने जम्मू एंड कश्मीर इलेक्ट्रिकल इंप्लाइज यूनियन के बैनर तले 8 जुलाई को हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है।

यूनियन के प्रधान कुलबीर सिंह ने कहा कि इस मामले पर सरकार से कई बार बातचीत हो चुकी है। गत वर्ष कमिश्नर पावर हृदेश कुमार सिंह के साथ हुई बैठक में कर्मचारियों को यह विश्वास दिलाया गया था कि बिजली विभाग के निजीकरण से संबंधित कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले कर्मचारी संगठनों को भी विश्वास में लिया जाएगा। सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों को विश्वास में लिए बिना आदेश को लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो हजारों कर्मचारियों का भविष्य हो इस विभाग से जुड़ा हुआ है, अंधकार में डूब जाएगा। इनमें अस्थायी कर्मी भी शामिल हैं।

यूनियन नेताओं व कर्मचारियों ने सरकार से अपील की कि वे आदेश को जारी करने से पहले कर्मचारियों से बातचीत करें। उन्हें यह बताया जाए कि कारपोरेशन बनने के बाद कर्मचारियों, अधिकारियों की ड्यूटी क्या रहेगी। कुलबीर सिंह ने कहा कि यदि यह आदेश उन पर थोपा गया तो इसके खिलाफ आंदोलन की शुरूआत होगी। फिलहाल आंदोलन के पहले चरण के तौर पर पीडीडी और पीडीसी कर्मचारी 8 जुलाई को हड़ताल पर रहेंगे। अगली रणनीति इसके बाद घोषित की जाएगी।

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