लद्दाख में 60 हजार एकड़ भूमि पर मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ, पात्र धारकों को मिलेगा लाभ; सुझाव देने का समय भी बढ़ा
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में सरकारी बंजर भूमि (नोतोर) के नियमितीकरण नियमों पर सुझाव देने की अवधि 1 नवंबर तक ...और पढ़ें

बंजर भूमि देखने आए लद्दाख के एलजी विनय कुमार सक्सेना। फाइल फोटो
HighLights
बंजर भूमि नियमितीकरण पर सुझाव देने की अवधि 1 नवंबर तक बढ़ाई गई।
60 हजार एकड़ बंजर भूमि के मालिकाना हक का रास्ता साफ हुआ।
पात्र भूमि धारकों को आर्थिक सशक्तीकरण मिलेगा, कर्ज लेने में मदद।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में सरकारी बंजर भूमि (नोतोर) के नियमितीकरण नियमों पर सुझाव देने की अवधि को तीस दिन बढ़ा दिया है। अब लोग व संगठन 1 नवंबर तक इस मुद्दे पर आपत्तियां, सुझाव दे सकेंगे।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 4 सितंबर को एक एतिहासिक फैसला करते हुए लद्दाखियों को प्रदेश में साठ हजार एकड़ सरकारी बंजर भूमि के मालिकाना अधिकार देने का मार्ग प्रशस्त किया था। इस संबध में नियमों की अंतिम अधिसूचना जारी करने से पहले इन्हें दो सप्ताह के लिए सार्वजनिक परामर्श हेतु रखने का फैसला हुआ था। अब आम लोगों व संबंधित हितधारकों से सुझाव व आपत्तियां लेने की समय सीमा को बढ़ाया गया है।
दशकों से लंबित नोतोर भूमि के नियमितीकरण का रास्ता साफ
उपराज्यपाल ने लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (नोतोर) सरकारी बंजर भूमि नियमितीकरण नियम, 2026 को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से दशकों से लंबित नोतोर भूमि के नियमितीकरण का रास्ता साफ हो गया। पात्र भूमि धारकों को संपत्ति संबंधी अधिकार प्राप्त होंगे। दशकों से स्पष्ट कानूनी ढांचे के अभाव में नोतोर भूमि के प्रभावी उपयोग में बाधाएं आ रही थी।
लद्दाख में सरकार के स्वामित्व वाली करीब 60,000 एकड़ से अधिक बंजर व बेकार भूमि खेती के लिए लोगों को आवंटित की गई थी। लेकिन कानूनी व्यवस्था स्पष्ट न होने के कारण भूमि धारकों को इसका पूरा आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा था।
प्रस्तावित नियमों का मसौदा 4 सितंबर को किया था सार्वजनिक
उपराज्यपाल ने अवधि बढ़ाने का फैसला लद्दाख बौद्ध संघ, लद्दाख गोंपा एसोसिएशन व अंजुमन इमामिया, लेह के आग्रह पर किया है। इन संगठनों ने मसौदा नियमों का अध्ययन करने व अपने विचार व सुझाव प्रशासन के समक्ष रखने के लिए और समय मांगा था।
सभी हितधारकों से अपने सुझाव और टिप्पणियां 1 नवंबर तक राजस्व विभाग को भेजने को कहा गया है। राजस्व विभाग ने प्रस्तावित नियमों का मसौदा 4 सितंबर 2026 को सार्वजनिक किया था।
इस संबंध में बनाए गए नए नियमों का उद्देश्य नोतोर भूमि के संबंध में पारदर्शिता, जवाबदेही व जमीनी स्तर पर लोगों का आर्थिक सशक्तीकरण सुनिश्चित करना है। नए नियमों के तहत पात्र नोतोर भूमि में से अधिकतम 10 एकड़ तक भूमि पर मालिकाना अधिकार दिए जाएंगे।
ऐसा लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय परिषद द्वारा किया जाएगा। दस एकड़ से अधिक भूमि को सिर्फ लीजहोल्ड आधार पर ही आवंटित किया जा सकेगा। नियमित की गई भूमि को अब कानूनी रूप से बैंकों से कर्ज लिया जा सकेगा। इससे भूमि धारकों को कृषि एवं अन्य विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। नए नियमों के तहत नियमित नोतोर भूमि के भूमि उपयोग में परिवर्तन की अनुमति भी दी गई है।
