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जम्मू में बारिश-ओलावृष्टि ने तोड़ी किसानों की कमर, परगवाल में धान की फसल बर्बाद; सरकार से मुआवजे की मांग

Published: Fri, 16 Oct 2026 06:20 PM (GMT+05:30)

जम्मू के परगवाल क्षेत्र में बारिश, तेज आंधी-तूफान और ओलावृष्टि से धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे ...और पढ़ें

परगवाल में मौसम की मार से धान की फसल बर्बाद।

परगवाल में मौसम की मार से धान की फसल बर्बाद।

HighLights

  1. परगवाल में बारिश, आंधी-तूफान से धान की फसल बर्बाद।

  2. किसानों को भारी आर्थिक नुकसान, प्रशासन से मुआवजे की मांग।

  3. गौरव सिंह मन्हास ने आंदोलन की चेतावनी दी।

जागरण संवाददाता, परगवाल। जम्मू के सीमावर्ती क्षेत्र परगवाल में लगातार बदल रहे मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश, तेज आंधी-तूफान और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। अपनी महीनों की मेहनत से तैयार की गई फसल को बर्बाद होते देख किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम का यही रुख जारी रहा, तो उनकी बची हुई फसल भी पूरी तरह खराब हो सकती है। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है।

परगवाल क्षेत्र के किसानों में प्रशासन के प्रति भारी रोष देखने को मिल रहा है। किसानों का आरोप है कि बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसलों को लगातार नुकसान हो रहा है, लेकिन अभी तक संबंधित विभागों के अधिकारियों ने खेतों में पहुंचकर नुकसान का जायजा नहीं लिया है।

किसानों का कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और इसी से उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है। फसल तैयार करने के लिए किसान बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर हजारों रुपये खर्च करते हैं। ऐसे में जब तैयार फसल प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ जाती है, तो उनकी सारी मेहनत और पूंजी पर पानी फिर जाता है।

किसानों ने सरकार और प्रशासन से लगाई गुहार

प्रभावित किसानों ने जम्मू-कश्मीर सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि परगवाल के प्रभावित गांवों में कृषि विभाग की विशेष टीमें भेजकर धान की फसल को हुए नुकसान का तत्काल सर्वेक्षण करवाया जाए। किसानों का कहना है कि अधिकारी केवल कार्यालयों में बैठकर आकलन न करें, बल्कि खेतों में पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखें, ताकि नुकसान की सही तस्वीर सामने आ सके।

किसानों ने मांग की है कि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें और आगामी कृषि कार्यों की तैयारी कर सकें। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो उनके लिए परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाएगा।

आंदोलन की दी चेतावनी

धान की फसल को हुए नुकसान और प्रशासन की कथित बेरुखी को लेकर क्षेत्र के किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। भाजपा मंडल परगवाल के प्रधान गौरव सिंह मन्हास सहित क्षेत्र के किसानों ने सरकार और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग उठाई।

इस दौरान सूरज सिंह, नरेंद्र सिंह, कुलबीर सिंह, गणेश कुमार, शारा सिंह, बनारसी लाल, रतन सिंह, रवि सिंह, राकेश सिंह, लोखदेव सिंह, संजय कुमार, बंसी लाल, रमेश सिंह, बूटी राम, तरसेम सिंह, भूपिंदर, कश्मीर, रतन कुमार और कमल सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों का जल्द से जल्द दौरा कर फसल नुकसान का आकलन किया जाए और किसानों को राहत प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

मन्हास ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया और उचित मुआवजे की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो वे अपनी मांगों को लेकर आगे की रणनीति बनाने के लिए मजबूर होंगे।

किसानों को राहत का इंतजार

परगवाल के किसानों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे अन्नदाताओं को राहत कब मिलेगी। एक ओर मौसम उनकी मेहनत पर पानी फेर रहा है, वहीं दूसरी ओर नुकसान का आकलन करने के लिए संबंधित विभागों की कार्रवाई का इंतजार है।

किसानों ने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सर्वेक्षण करवाया जाए, प्रभावित किसानों की पहचान की जाए और नियमानुसार उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।

किसानों की मांग स्पष्ट है कि खेतों में पहुंचकर नुकसान का आकलन किया जाए, प्रभावित परिवारों को राहत दी जाए और उनकी मेहनत को बर्बाद होने से बचाने के लिए समय रहते ठोस कदम उठाए जाएं।