जम्मू, राज्य ब्यूरो: कारगिल की चोटियों पर बाइस साल पहले लड़े गए युद्ध के नायकों में जीत के जोश के साथ साथियों को खोने का गम भी है। कारगिल विजय दिवस पर द्रास पहुंचे सेना के वीरों ने युद्ध के मंजर के साथ शहादत देने वाले साथियों को भी याद किया।

दुश्मन से आमने सामने की लड़ाई में मुझे सत्रह गोलियां लगी थी, शरीर में ग्रेनेड के टुकडों से जख्म, खून निकल रहा था, जोश जुनून था कि मां भारती की सुरक्षा के लिए प्राण दे दूंगा। यह कहना है द्रास पहुंचे परमवीर चक्र विजेता सुबेदार योगेन्द्र सिंह यादव का। उन्होंने मीडिया से बातचीत में 22 साल पहले लड़े गए युद्ध के मंजर व कुर्बान होने वाले साथियों को याद करते हुए कहा कि देश के नागरिक व सेना का जवान होने के नाते देश के लिए जान देना बड़े सौभाग्य की बात होती है।

सुबेदार योगेन्द्र सिंह यादव ने जान की बाजी लगाकर दुश्मन के कब्जे से कारगिल की टाइगर हिल को आजाद करवाया था। उनके साथ भारतीय सेना में ऐसे 1300 से अधिक सैनिक हैं जिनके शरीरों पर लगी पाकिस्तानी सैनिकों की गोलियों के निशाना किसी वीरता पदक से कम नही हैं। युद्ध में 527 सैनिकों ने प्राणों की आहुति देकर सुनिश्चित किया थ कि दुश्मन काे बख्शा न जाए।

द्रास में 18 ग्रेनेडियर्स के सुबेदार योगेन्द्र सिंह यादव के साथ परमवीर चक्र विजेता 13 जम्मू कश्मीर राइफल्स के सुबेदार संजय कुमार कारगिल विजय दिवस के कार्यक्रम की शान रहे। उपराज्यपाल आरके माथुर ने भी उनसे बातचीत कर पुरानी यादें ताजा की। इन दोनों परमवीर चक्र विजेताओं ने चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत से विजय मशाल लेकर उसे कारगिल द्रास वार मेमोरियल में था।

द्रास में शहीदों के परिवारों ने अपने परिजनों की कुर्बानियों को याद कर बार बार कारगिल आने की इच्छा जताई। वहीं दूसरी ओर कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने युद्ध के दिनों को याद कर अपने उन पुराने साथियों की बहादुरी का जिक्र किया जाे पाकिस्तान के साथ हाथाें हाथ लड़ाई में चोटियों को आजाद करवाते शहीद हुए थे।

Edited By: Rahul Sharma