पनुन कश्मीर ने उठाई अलग होमलैंड की मांग, 1990 के विस्थापन को बताया 7वां निर्वासन, अब क्या है आगे का प्लान?
पनुन कश्मीर ने 1990 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन को सातवां निर्वासन बताते हुए घाटी में उनके लिए ...और पढ़ें

पनुन कश्मीर ने कश्मीरी पंडितों के लिए अलग होमलैंड की मांग दोहराई। (फोटो- इंटरनेट मीडिया)
HighLights
पनुन कश्मीर ने कश्मीरी हिंदुओं के लिए अलग होमलैंड की मांग की।
1990 के विस्थापन को समुदाय का सातवां निर्वासन बताया गया।
सुरक्षित होमलैंड में सुरक्षा, सम्मान और सांस्कृतिक निरंतरता सुनिश्चित हो।
जागरण संवाददाता, जम्मू। पनुन कश्मीर ने 1990 के दशक की शुरुआत में कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन को समुदाय का सातवां निर्वासन मानते हुए घाटी में एक स्थायी राजनीतिक एवं संवैधानिक समाधान की मांग की है।
संगठन ने कहा कि बार-बार हुए विस्थापन, संपत्तियों के नुकसान और सांस्कृतिक विघटन के मद्देनजर कश्मीरी पंडितों के लिए अलग, सुरक्षित और संवैधानिक रूप से संरक्षित होमलैंड आवश्यक है।
सांस्कृतिक पहचान बचाने की भी चुनौती
पनुन कश्मीर के संयोजक अग्निशेखर ने कहा कि कश्मीरी पंडितों के संकट को केवल पुनर्वास और वापसी तक सीमित नहीं किया जा सकता। विस्थापन का प्रभाव जीवन और संपत्ति के नुकसान के साथ-साथ समुदाय की सांस्कृतिक निरंतरता के टूटने के रूप में भी सामने आया है।
क्या है पनुन कश्मीर की प्रमुख मांग?
पनुन कश्मीर के अध्यक्ष टिटो गंजू ने कहा कि संगठन की प्रमुख राजनीतिक मांग घाटी में पनुन कश्मीर के रूप में अलग, सुरक्षित और संवैधानिक रूप से संरक्षित होमलैंड की स्थापना है।
इसमें सुरक्षा, सम्मान, सांस्कृतिक निरंतरता, राजनीतिक अधिकार और कश्मीरी पंडित समुदाय के सामूहिक अस्तित्व की गारंटी होनी चाहिए। स्वैच्छिक वापसी केवल सुरक्षा और सम्मानजनक परिस्थितियों में होनी चाहिए।
