आबादी के हिसाब से तय हो पंचायत की हदबंदी, 'पंचायती राज एक्ट' का पालन कर चुनाव कराए जाएं: पंचायत कॉन्फ्रेंस
जम्मू-कश्मीर में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। अब पंच सरपंचों की अग्रणी संस्था ऑल जम्मू-कश्मीर पंचायत कॉन्फ्रेंस ने कहा कि सरकार चुनाव कराने की जल्दी में है चुनाव से पहले पंचायत स्तर पर परिसीमन कराया जाना जरूरी है। साथ ही मतदाता के हिसाब से भी पंचायतें बराबर हो सकें लेकिन इस तरफ सरकार का कोई ध्यान नहीं हैं।

जम्मू ,जागरण संवाददाता। जम्मू-कश्मीर में अब जल्द ही पंचायतों के चुनाव कराए जाने हैं, इसके संकेत सरकार ने पहले ही दे दिए हैं। मगर, वहीं दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर में पंच सरपंचों की अग्रणी संस्था आल जम्मू-कश्मीर पंचायत कॉन्फ्रेंस ने कहा कि सरकार चुनाव कराने की जल्दी में है, लेकिन चुनाव से पहले पंचायत स्तर पर परिसीमन कराया जाना जरूरी है।
प्रधान अनिल शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 70 प्रतिशत पहाड़ी क्षेत्र है। कुछ पंचायतें ऐसी हैं, जहां चार हजार मतदाता हैं तो कुछ पंचायतों में 500 मतदाता भी नहीं हैं, लेकिन फंड सबको बराबरी का मिलता है। इसलिए सरकार का पहला काम बनता है कि वह पंचायत स्तर पर पहले परिसीमन कराए ताकि सब पंचायतों की आबादी के हिसाब से हदबंदी हो सके।
'मतदाता के हिसाब से पंचायतें बराबर हों'
वहीं, मतदाता के हिसाब से भी पंचायतें बराबर हो सकें, लेकिन इस तरफ सरकार का कोई ध्यान नहीं हैं लेकिन चुनाव कराने की तैयारी हो रही है। अनिल शर्मा ने कहा कि आल जम्मू-कश्मीर पंचायत कांफ्रेंस चुनाव के पक्ष में है, मगर जो काम जरूरी हैं, वह पहले होने चाहिए। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि सबका साथ और सबका विकास, लेकिन यह तभी होगा जब सब कुछ बराबर हो। जम्मू-कश्मीर में कोई पंचायत छोटी है तो कोई बड़ी, इन्हें तो पहले ठीक किया जाए।
पंचायती चुनाव एक्ट की बात की जाए तो पंचायती तंत्र के तीनों अंगों के चुनाव 45 दिन के भीतर हो जाने चाहिए, लेकिन जम्मू-कश्मीर में पंचायत, डीडीसी, बीडीसी के कार्यकाल में लंबा अंतराल है। बीडीसी चुनाव अगर 2024 में आते हैं तो डीडीसी चुनाव 2025 में आ रहे हैं।
यह अपने आप में ही पंचायत राज एक्ट की अवहेलना है। सरकार को चाहिए कि पंचायत में त्रिस्तरीय सिस्टम चलाने वाले तीनों अंगों के चुनाव एक साथ कराए जाने चाहिए। अगर सरकार महज पंचायतों के चुनाव करवाती है और बीडीसी के चुनाव महीनों बाद कराए जाते हैं, तो यह एक्ट की ही अवहेलना है। पूरे मामले पर सरकार विचार करे।

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