आतंकवाद पर पाकिस्तान का दोहरा खेल, 26/11 के मोस्ट वांटेड सूची से दो आतंकियों की तस्वीरें और लश्कर से हटाए संबंध
पाकिस्तान ने अपनी मोस्ट वांटेड सूची से 26/11 मुंबई हमलों से जुड़े दो आतंकियों, मुहम्मद खान और अब्दुल रहमान की ...और पढ़ें
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26/11 के मोस्ट वांटेड सूची से दो आतंकियों की तस्वीरें और लश्कर से हटाए संबंध। फाइल फोटो
HighLights
पाकिस्तान ने 26/11 आतंकियों की तस्वीरें और लश्कर संबंध हटाए।
मुहम्मद खान और अब्दुल रहमान की भूमिकाओं का विवरण गायब।
भारत का दावा, ये आतंकी अभी भी पाकिस्तान में मौजूद हैं।
नवीन नवाज, जम्मू। नवीन नवाज, जम्मू। पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का दावा करता है, आतंकियों पर कार्रवाई के आंकड़े गिनाता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताता है। लेकिन जब उसके अपने रिकॉर्ड आतंकियों की मौजूदगी और उनके नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं, तो वहीं पाकिस्तान उनकी पहचान और भूमिकाओं से जुड़े अहम सबूतों को मिटाने में जुटा दिखाई देता है। 26/11 मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े आतंकियों की सूची में हालिया बदलाव इसी दोहरे रवैये का एक और उदाहरण है।
पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने अपनी मोस्ट वांटेड सूची में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर पर इनामी राशि बढ़ाई है। लेकिन दूसरी ओर 26/11 हमलों से जुड़े 17 आतंकियों में से मुहम्मद खान और अब्दुल रहमान की तस्वीरें, लश्कर-ए-तैयबा से संबद्धता और हमलों में उनकी भूमिकाओं का विस्तृत विवरण कथित तौर पर हटा दिया गया है। नाम जरूर सूची में हैं, लेकिन उन जानकारियों को गायब कर दिया गया है, जो इन आतंकियों के नेटवर्क और हमले में उनकी भूमिका को उजागर करती थीं।
महत्वपूर्ण जानकारियां हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?
तुरबत निवासी मुहम्मद खान पर हमलावरों को समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचाने के लिए अल-हुसैनी नाव उपलब्ध कराने का आरोप है। बहावलनगर के अब्दुल रहमान की भी हमले में भूमिका बताई गई थी। सूत्रों के अनुसार, 2021 की एफआईए सूची में दोनों की तस्वीरों और भूमिकाओं का विस्तृत उल्लेख था।
सवाल यही है कि यदि ये लोग वास्तव में फरार हैं, तो उनके बारे में दर्ज महत्वपूर्ण जानकारियां हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?
नई सूची में लश्कर के 11 आतंकियों के नाम अब भी मौजूद हैं, जिन पर अल-हुसैनी और अल-फौज नावों के जरिए हमलावरों की समुद्री यात्रा में सहायता करने का आरोप है। छह अन्य नाम कथित वित्तीय मददगारों के हैं। यानी पाकिस्तान के अपने दस्तावेज ही बताते हैं कि 26/11 की साजिश में शामिल नेटवर्क कितना व्यापक था।
आतंकियों को बचाने की कोशिश
एफआईए का कहना है कि 26/11 से जुड़े सभी 17 आतंकी 18 वर्षों से फरार हैं। वहीं, सूत्रों के मुताबिक भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ये सभी पाकिस्तान में ही मौजूद हैं। यदि यह दावा सही है तो मोस्ट वांटेड सूची में नाम डालना कार्रवाई से ज्यादा खानापूर्ति प्रतीत होती है।
आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की कथित लड़ाई की असल परीक्षा सूची जारी करने में नहीं, बल्कि आतंकियों के खिलाफ निष्पक्ष और ठोस कार्रवाई में है। तस्वीरें हटाना, संबंध छिपाना और भूमिकाओं को मिटाना उन सवालों को और गहरा करता है, जिनका जवाब पाकिस्तान को देना चाहिए।
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का दावा और आतंकियों को बचाने की कोशिश दोनों साथ नहीं चल सकते। यही पाकिस्तान के दोहरे चरित्र की सबसे बड़ी विडंबना है।
